Monsoon Delayed India 2026: भारत में इस बार मानसून की शुरुआत तो धमाकेदार रही और शुरुआती 15 दिनों में इसने देश के 19 राज्यों में दस्तक दे दी।
लेकिन इसके बाद मानसूनी हवाओं की रफ्तार पर ऐसा ब्रेक लगा कि पिछले 11 दिनों से मानसून तेलंगाना में ही अटका हुआ है।
8 जून के बाद से मानसून आगे नहीं बढ़ पाया है, जिसकी वजह से देश के कई राज्य बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
आंकड़ों की मानें तो देश के 7 राज्यों में इस दौरान सामान्य से 60% तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के इस तरह थमने के पीछे एक-दो नहीं, बल्कि 5 अलग-अलग मौसमी सिस्टम जिम्मेदार हैं।
ये सभी सिस्टम एक साथ कमजोर पड़ गए हैं, जिसके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी वाली हवाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
नतीजा यह है कि दक्षिण भारत से बादलों का कारवां उत्तर भारत की तरफ कूच नहीं कर पा रहा है।
1 से 18 जून के बीच पूरे देश में सामान्य से 38% कम बारिश हुई है।
सबसे बुरी हालत महाराष्ट्र और गुजरात की है, जहां सामान्य से क्रमशः 78% और 79% कम पानी बरसा है।

आखिर मानसून को किन 5 ‘विलेनों’ ने रोका?
मानसून की राह में रोड़ा बन रहे इन 5 सिस्टमों को हम बहुत ही आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं:
- अरब सागर की सुस्ती: आमतौर पर मानसून को आगे बढ़ाने में अरब सागर से आने वाली नम हवाएं सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस बार ये हवाएं बेहद कमजोर हैं, जिससे मानसून आगे नहीं सरक रहा।
- दक्षिण-पश्चिमी हवाओं में दम नहीं: अरब सागर के ऊपर बहने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वे महाराष्ट्र और उसके आस-पास के इलाकों तक पर्याप्त नमी (Moisture) पहुंचा ही नहीं पा रही हैं।
- क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना: भूमध्य रेखा (Equator) को पार करके जो हवाएं भारत की तरफ आती हैं, इस बार उनकी नमी रास्ते में ही खत्म हो रही है। हवा सूखी होने के कारण बादल नहीं बन पा रहे।
- लो-प्रेशर एरिया का न बनना: बारिश के लिए समुद्र में कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure System) बनना जरूरी होता है। इस समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही जगहों पर ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं दिख रहा है।
- MJO (मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन) का ठंडा पड़ना: यह एक ऐसा समुद्री-वायुमंडलीय सिस्टम है जो बादलों को धक्का देकर दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर लाता है। फिलहाल यह भी सुस्त पड़ा हुआ है।

भीषण गर्मी की मार: 40 डिग्री के पार पहुंचा पारा
भले ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में रुक-रुक कर प्री-मानसून गतिविधियां (हल्की आंधी-बारिश) हो रही हैं, लेकिन इसने लोगों को गर्मी से राहत नहीं दी है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र और ओडिशा के कई शहरों में तापमान लगातार 40°C के पार बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश का बांदा शहर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 43.2°C दर्ज किया गया।
इसके अलावा ओडिशा के बौध में 42.8°C और महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.3°C तापमान ने लोगों को बेहाल कर दिया।

अल नीनो और आईटीसीजेड (ITCZ) की दोहरी मार
अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) के सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक, इस बार ‘इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन’ (ITCZ) सही समय पर और सही रफ्तार से एक्टिव नहीं हो पाया है।
आमतौर पर यह जून के मध्य तक उत्तर भारत की ओर बढ़कर समुद्र से नमी खींचता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
इसके साथ ही प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ की परिस्थितियां भी दोबारा सिर उठा रही हैं।
अगर अल नीनो का असर बढ़ता है, तो देश को आने वाले दिनों में लंबे समय तक सूखे और असमान बारिश का सामना करना पड़ सकता है।

राहत की खबर: जेट स्ट्रीम कमजोर होते ही बढ़ेगा मानसून
मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि आसमान में करीब 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर ‘जेट स्ट्रीम’ नाम की बहुत तेज हवाएं चल रही हैं।
जब तक जेट स्ट्रीम का यह मौजूदा पैटर्न कमजोर नहीं पड़ता, तब तक मानसूनी हवाएं उत्तर भारत की तरफ नहीं बढ़ पाएंगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 4 से 5 दिनों में यह पैटर्न बदलेगा, जिससे मानसून एक बार फिर करवट लेगा और महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा छत्तीसगढ़ के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ेगा।

अगले दो दिनों का मौसम पूर्वानुमान
- 20 जून: बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तेज हवाओं (50-70 किमी/घंटा) के साथ बारिश होगी।
- असम, मेघालय और कर्नाटक में भारी बारिश का अलर्ट है।
- वहीं एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में धूलभरी आंधी के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
- 21 जून: सिक्किम, असम और मेघालय में भारी बारिश जारी रहेगी।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान में 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बारिश होगी।
- दक्षिण भारत के राज्यों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा।
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