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लखनऊ अग्निकांड: कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत, PM मोदी ने जताया दुख- मुआवजे का ऐलान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lucknow Coaching Fire Accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके से सोमवार को एक बेहद ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई।

यहाँ सेक्टर-डी स्थित एक दो मंजिला इमारत में दोपहर करीब 2:15 बजे अचानक भीषण आग लग गई।

इस हादसे ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और इसकी चपेट में आने से 15 मासूम छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई।

PM ने दुख जताया, मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख के मुआवजे का ऐलान

इस हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी दुख जताया है, मोदी ने X पर लिखा- उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आग लगने की घटना में हुई मौतों से बहुत दुख हुआ है। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की मदद दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

दम घुटने से हुई छात्रों की मौत

बताया जा रहा है कि जब आग लगी, तो अपनी जान बचाने के लिए कई बच्चे दूसरी मंजिल पर बने बाथरूम में जाकर छिप गए थे।

लेकिन दुर्भाग्य से वही बाथरूम उनके लिए मौत का कुआँ बन गया।

धुएं और दम घुटने (सफोकेशन) के कारण सभी 15 बच्चों की वहीं मौत हो गई।

जैसे ही बिल्डिंग से काले धुएं का गुबार और आग की लपटें उठती दिखीं, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

कोचिंग के अंदर मौजूद बच्चों के बीच भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए कुछ छात्र खिड़कियों और बालकनी की तरफ भागे।

एक छात्र ने तो खुद को बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी, लेकिन वह नीचे लगी लोहे की ग्रिल पर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया।

किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने 15 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में बच्चों के शरीर पर जलने के निशान कम हैं, जिससे साफ है कि ज्यादातर मौतें दम घुटने के कारण हुई हैं।

बेसमेंट से लेकर दूसरी मंजिल तक फैली आग

जिस दो मंजिला इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसमें कई तरह के काम चल रहे थे। बिल्डिंग के बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर एक पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) और क्लीनिक संचालित था।

वहीं, इसके दूसरे फ्लोर पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की एक लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर था, जिसके साथ ही ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नाम का एक 3D आर्ट और गेमिंग का ऑफिस भी चल रहा था।

शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे की वजह एसी (AC) में हुआ शॉर्ट सर्किट हो सकती है, जिसने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।

दीवार तोड़कर निकाले गए शव

घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की करीब 10 गाड़ियां और एक आधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मशीन मौके पर पहुंची।

हालात की गंभीरता को देखते हुए NDRF और SDRF की टीमों को भी तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया।

बिल्डिंग के अंदर धुआं इतना ज्यादा भर चुका था कि पीछे की दीवार को तोड़कर रास्ता बनाना पड़ा।

इसी तोड़ी गई दीवार के रास्ते से राहत कर्मियों ने अंदर फंसे बच्चों के शवों को बाहर निकाला।

मौके पर एम्बुलेंस कम पड़ गईं, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत और गाड़ियां बुलाईं ताकि घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके।

दौरा छोड़ लखनऊ लौटे सीएम योगी

इस भीषण हादसे की खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ का दौरा बीच में ही छोड़ दिया और तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

अलीगढ़ में उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ की घटना अत्यंत दुखद है और वह पीड़ित परिवारों की मदद और स्थिति का जायजा लेने खुद लखनऊ जा रहे हैं।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को पूरी घटना की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।

उन्होंने साफ कहा कि इस लापरवाही के पीछे जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

डिप्टी सीएम मौके पर मौजूद

दूसरी तरफ, हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे।

डिप्टी सीएम ने खुद खड़े होकर राहत और बचाव कार्य की निगरानी की और अस्पतालों को अलर्ट पर रहने को कहा।

एहतियात के तौर पर पुलिस ने आसपास की अन्य इमारतों को भी खाली करा लिया है और उस रूट के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया है।

 

फिलहाल प्रशासन का पूरा जोर घायलों को बेहतर इलाज देने और प्रभावित परिवारों को संभालने पर है।

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