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महाराष्ट्र के परभणी में बड़ा हादसा: हनुमान मंदिर में गिरी निर्माणाधीन छत; 7 की मौत, मलबे में दबे दर्जनों श्रद्धालु

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Maharashtra Hanuman temple roof collapse: महाराष्ट्र के परभणी जिले से एक बेहद दुखद और दर्दनाक खबर सामने आई है।

यहाँ के यशवाड़ी गांव में स्थित एक हनुमान मंदिर में शनिवार दोपहर को एक बड़ा हादसा हो गया।

मंदिर परिसर में बन रहे सभा मंडप की भारी-भरकम कंक्रीट की छत अचानक भरभराकर गिर गई।

इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 30 से 40 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

जयकारों के बीच ढह गई कंक्रीट की छत, संभलने का मौका भी नहीं मिला

शनिवार का दिन होने के कारण मंदिर में सुबह से ही बजरंगबली के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी।

जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था और लोग महाप्रसाद लेने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक मौत का यह मंजर सामने आ गया।

चश्मदीदों के मुताबिक, शनिवार की दोपहर यशवाड़ी देवस्थान का पूरा परिसर बजरंगबली के जयकारों से गूंज रहा था।

श्रद्धालु श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर रहे थे और दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे।

इसी दौरान मंदिर के ठीक सामने बन रहे सभा मंडप के मुख्य पिलर अचानक मुड़ गए।

पिलर मुड़ते ही लोहे की छड़ों और कंक्रीट से बनी भारी-भरकम छत सीधे नीचे खड़े भक्तों पर आ गिरी।

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छत इतनी तेजी से गिरी कि नीचे खड़े लोगों को भागने या खुद को संभालने का एक पल का भी मौका नहीं मिला।

चारों तरफ मलबे, लोहे की रॉड और पत्थरों का ढेर लग गया।

पल भर में मंदिर का शांत और भक्तिमय माहौल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

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स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा, युद्ध स्तर पर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसा होते ही आसपास के ग्रामीण और स्थानीय युवक तुरंत मदद के लिए दौड़े।

उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए मलबे को हाथों से हटाना शुरू किया और फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की।

हालांकि, कंक्रीट के स्लैब और पिलर इतने भारी थे कि उन्हें बिना मशीनों के हटाना मुमकिन नहीं था।

घटना की सूचना मिलते ही परभणी जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) की टीमें क्रेन, कटर और पोकलेन जैसी भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गईं।

मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

अब तक करीब 25 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल लोगों को मलबे से निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

निर्माणाधीन मंडप बना हादसे की वजह, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक बड़े सभा मंडप का निर्माण कार्य चल रहा था।

काम पूरा नहीं हुआ था और कंक्रीट का हिस्सा अभी कमजोर था या पिलर इसका वजन नहीं संभाल पाए, इसकी जांच की जा रही है।

इस हादसे में 5 से 6 श्रद्धालुओं के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी मौतों के आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मलबे को पूरी तरह हटाने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों की जान बचाना है।

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