Tribal Exemption in UCC MP: मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
इसके लिए गठित विशेष कमेटी ने पूरे राज्य का दौरा कर आम जनता, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए हैं।
गुरुवार, 25 जून को ग्वालियर में इस कमेटी की आखिरी जन परामर्श (Public Consultation) बैठक हुई, जिसके साथ ही सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
अब सारा ध्यान भोपाल पर है, जहां इन सुझावों के आधार पर कानून का अंतिम ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार किया जा रहा है।
आगामी 5 जुलाई को इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया जा सकता है।
इस पूरे कानून में सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल यह था कि क्या मध्य प्रदेश का बड़ा आदिवासी समुदाय भी UCC के दायरे में आएगा?
आदिवासियों को मिलेगी पूरी छूट!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कमेटी आदिवासियों की अनूठी परंपराओं और संस्कृति को देखते हुए उन्हें UCC से पूरी तरह बाहर रखने के पक्ष में है।
वर्तमान में राज्य सरकार का रुख यही है कि आदिवासियों के पारंपरिक नियमों में कोई दखल न दिया जाए।
हालांकि, जन परामर्श के दौरान एक दिलचस्प सुझाव यह भी आया है कि जो आदिवासी स्वेच्छा से (अपनी मर्जी से) UCC को अपनाना चाहते हैं, उन्हें इसका कानूनी अधिकार मिलना चाहिए।
पढ़े-लिखे आदिवासियों और गैर-आदिवासी वर्ग की तरफ से इस वैकल्पिक (Optional) व्यवस्था की मांग की गई है, जिस पर अभी विचार चल रहा है।
धर्मांतरण करने वालों पर सख्त रुख क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कमिटी के सामने ‘धर्मांतरण’ (Religion Conversion) को लेकर एक बेहद सख्त सुझाव रखा गया।
इस सुझाव के मुताबिक, जो आदिवासी अपना मूल धर्म छोड़कर ईसाई, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म को अपना चुके हैं, उन्हें UCC से मिलने वाली छूट का फायदा बिल्कुल नहीं मिलना चाहिए।
सुझाव देने वाले जानकारों और सामाजिक संगठनों का तर्क है कि जब कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म बदल लेता है, तो वह आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों, रूढ़ियों और संस्कृति से पूरी तरह अलग हो जाता है।
ऐसे में उन्हें विशेष छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता और उनके साथ देश के सामान्य नागरिकों की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।
हालांकि, इस व्यवस्था को कानूनी रूप से कैसे अमलीजामा पहनाया जाएगा, इस पर भोपाल में कानूनी विशेषज्ञों के साथ गहन मंथन जारी है।
आगे क्या होगा?
ग्वालियर की बैठक खत्म होने के बाद अब कमेटी के सदस्य भोपाल में बैठकर सभी सुझावों की समीक्षा कर रहे हैं।
कानूनी पहलुओं को बारीकी से परखा जा रहा है ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।
उम्मीद जताई जा रही है कि 5 जुलाई को जब यह मसौदा जनता के सामने आएगा, तो मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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