PM e-Bus Sewa MP: मध्य प्रदेश में रहने वाले शहरी लोगों के लिए यह जुलाई का महीना ढेर सारी खुशियां लेकर आने वाला है।
अगर आप भी रोज़ाना बस से सफर करते हैं, तो अब आपको महंगे किराये और डीजल के धुएं से राहत मिलने वाली है।
केंद्र सरकार की ‘पीएम ई-बस सेवा’ (PM e-Bus Sewa)के तहत मध्य प्रदेश के बड़े शहरों की सड़कों पर बेहद आधुनिक, वातानुकूलित (AC) और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाने वाली इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में कुल 582 ई-बसें चलाई जाएंगी, जो छह प्रमुख शहरों के यातायात का चेहरा बदल देंगी।
सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है और इसके लिए बाकायदा अगले 20 सालों की आबादी और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखकर रूट तय किए गए हैं, ताकि बार-बार रास्तों को बदलना न पड़े।
पहले इंदौर और भोपाल की बारी
इस शानदार सफर की शुरुआत सबसे पहले देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से होने जा रही है।
इंदौर में कुल 150 बसें चलाई जाएंगी, जिनके लिए 8 अलग-अलग रूट तय किए गए हैं।
इंदौर का सबसे लंबा रूट रंगवासा से देपालपुर तक होगा, जिसकी दूरी करीब 52.30 किलोमीटर है।
वहीं, इंदौर का सबसे व्यस्त रूट महू नाका से सांवेर का होगा, जहाँ यात्रियों को लंबा इंतज़ार न करना पड़े, इसलिए अकेले इसी रूट पर 50 बसें उतारने का फैसला किया गया है।
इंदौर के तुरंत बाद, जुलाई के दूसरे या तीसरे हफ्ते से राजधानी भोपाल और जबलपुर में भी ये बसें चलने लगेंगी।
भोपाल में 10 रूटों पर 100 बसें चलाई जाएंगी। भोपाल का सबसे लंबा रूट सीहोर से रातापानी तक का होगा, जो लगभग 68.5 किलोमीटर लंबा है।
इस रूट के शुरू होने से सीहोर, फंदा, बैरागढ़, कलेक्ट्रेट और हमीदिया अस्पताल जैसे बेहद जरूरी इलाके आपस में जुड़ जाएंगे।
पहले चरण में इंदौर, भोपाल और जबलपुर को कवर करने के बाद, दूसरे चरण में ग्वालियर, सागर और उज्जैन जैसे शहरों में भी इन बसों को चलाया जाएगा।
जेब पर नहीं पड़ेगा भारी, किराया सुनकर हो जाएंगे खुश
अक्सर लग्जरी और एसी बसों का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि किराया बहुत ज्यादा होगा, लेकिन इस मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं है।
शुरुआत में इन बसों का किराया सिर्फ 1.5 रुपये प्रति किलोमीटर रखा गया है।
इसका मतलब है कि अगर आप 5 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, तो आपको सिर्फ 7.5 रुपये देने होंगे। यह किराया आज के समय में चलने वाली डीजल बसों से भी काफी सस्ता है।
हालांकि, आगे चलकर इसे 2 रुपये प्रति किलोमीटर करने का एक प्रस्ताव है, जिस पर एक हाई-लेवल कमेटी फैसला लेगी।
बहुत लंबी दूरी के लिए यह किराया अधिकतम 3 रुपये प्रति किलोमीटर तक हो सकता है।
खर्च में भारी बचत और पर्यावरण को फायदा
सरकार इस योजना को इतने बड़े पैमाने पर इसलिए बढ़ावा दे रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के पैसे और पर्यावरण दोनों की बचत करती है।
उदाहरण के तौर पर, एक साधारण डीजल बस को एक किलोमीटर चलाने में लगभग 40 रुपये का खर्च आता है।
वहीं, इन नई इलेक्ट्रिक बसों को एक किलोमीटर चलाने में मात्र 12 रुपये की बिजली खर्च होती है। यानी डीजल के मुकाबले खर्च सीधे तीन गुना से भी कम हो जाता है।
इससे शहरों में होने वाला वायु प्रदूषण (Air Pollution) भी बहुत कम होगा।
सुरक्षा और सुविधाओं से लैस हैं ये बसें
इन बसों में सिर्फ सफर ही सस्ता नहीं होगा, बल्कि आपको इसमें बैठकर किसी महंगी वीआईपी कार जैसा अहसास होगा।
- ये 25 सीटों वाली फुली ऑटोमैटिक और एसी बसें हैं।
- सुरक्षा के लिहाज से हर एक बस में 7 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं।
- बसों के दरवाजे ऑटोमैटिक हैं जो पूरी तरह रुकने पर ही खुलेंगे।
- किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए बस में एक ‘पैनिक बटन’ दिया गया है और खिड़कियों के पास कांच तोड़ने के लिए इमरजेंसी हैमर (हथौड़ी) भी रखी गई है।
- इतना ही नहीं, हमारे दिव्यांग भाइयों और बहनों के लिए बस में व्हीलचेयर रैंप की सुविधा है।
- बस में कितने लोग चढ़े और उतरे, इसकी गिनती के लिए ‘पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम’ है और अगले स्टॉप की जानकारी देने के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।
कैसे होगा इनका संचालन और चार्जिंग?
इन बसों को चलाने और इनकी देखरेख का जिम्मा ‘ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी को दिया गया है।
कंपनी ही ड्राइवर, कंडक्टर और बाकी स्टाफ का इंतजाम करेगी।
कंपनी को बस चलाने के लिए 58.14 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा, जिसमें से 22 रुपये केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में देगी और बाकी के 36.14 रुपये राज्य सरकार चुकाएगी।
नियम के मुताबिक, हर बस को रोज़ाना कम से कम 180 किलोमीटर चलना ही होगा।
बसों को चार्ज करने के लिए मध्य प्रदेश के इन शहरों में 9 अत्याधुनिक डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
अकेले भोपाल के बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में 14 करोड़ की लागत से दो डिपो बन रहे हैं, जबकि इंदौर के नायता मुंडला और चंदन नगर में दो डिपो तैयार किए जा रहे हैं।
इन चार्जिंग स्टेशनों पर कुल 59.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रहे, इसके लिए 41 किलोमीटर लंबी हाई टेंशन बिजली लाइन भी बिछाई जा रही है।
