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बेंगलुरु डे-केयर केस: मासूमों के मन में बैठा डर, पैरेंट्स बोले- आवाज़ सुनकर कांप जाते हैं बच्चे; जानें कैसे रखें नज़र?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bengaluru daycare case update: बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर से सामने आई दिल दहला देने वाली घटना ने कामकाजी माता-पिता (वर्किंग पैरेंट्स) को झकझोर कर रख दिया है।

आईटी कंपनी ‘कैपजेमिनी’ के बेंगलुरु स्थित एचएएल (HAL) कैंपस में बने डे-केयर सेंटर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, पुलिस ने जब बच्चों के माता-पिता से बात की, तो कई चौंकाने वाले और डराने वाले खुलासे हुए।

मासूमों के मन में बैठ गया खौफ

वायरल वीडियो में जिस छोटी बच्ची के साथ बेरहमी की जा रही थी, उसकी माँ ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी के व्यवहार में पिछले दो महीनों से काफी बदलाव आ गया था।

वह अचानक बाथरूम जाने से डरने लगी थी। जब भी उसे वॉशरुम ले जाया जाता, वह रोने लगती और वहाँ से भागने की कोशिश करती थी।

वहीं, एक अन्य तीन साल के बच्चे के माता-पिता ने बताया कि उनका बेटा डे-केयर के कुछ कर्मचारियों (केयरगिवर्स) की आवाज़ सुनते ही डर से कांपने और सहमने लगता था।

पैरेंट्स को तब समझ नहीं आया, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनके बच्चों के साथ वहाँ क्या-क्या टॉर्चर हो रहा था।

टॉयलेट में बंद करना और वॉशिंग मशीन में बिठाना!

यह पूरा मामला 1 जुलाई को तब सामने आया जब डे-केयर सेंटर के अंदर का एक वीडियो लीक हुआ।

इस वीडियो में देखा जा सकता था कि कैसे मासूम बच्चों को सजा के तौर पर टॉयलेट के अंदर बंद कर दिया जाता था।

इतना ही नहीं, उनके चेहरों पर पानी का जेट स्प्रे मारा जाता था और उन्हें डराने के लिए वॉशिंग मशीन के अंदर बिठा दिया जाता था।

इस अमानवीय व्यवहार को देखने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 5 महिला कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इनमें से 55 साल की विजयलक्ष्मी नाम की महिला को गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि बाकी 4 से पूछताछ जारी है।

कम सैलरी और तनाव का एंगल

इस मामले की जांच में एक और बड़ा मोड़ आया है।

पुलिस और श्रम विभाग की शुरुआती जांच में पता चला है कि इन महिला कर्मचारियों को महीने के सिर्फ ₹8,000 वेतन दिया जा रहा था।

जबकि सरकारी नियमों (श्रम विभाग) के मुताबिक, न्यूनतम वेतन कम से कम ₹25,000 होना चाहिए।

अब पुलिस और श्रम विभाग इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या कम सैलरी मिलने के कारण ये कर्मचारी डिप्रेशन या तनाव में थे, जिसका गुस्सा उन्होंने मासूम बच्चों पर निकाला।

कंपनी ने लिया एक्शन, बंद किया सेंटर

कैपजेमिनी कंपनी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि उनके कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा उनके लिए सबसे पहले है।

उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है और एहतियात के तौर पर बेंगलुरु कैंपस के इस डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

आपको बता दें कि कैपजेमिनी फ्रांस की एक बहुत बड़ी आईटी कंपनी है, जिसके भारत के 8 शहरों में ऑफिस हैं और यहाँ लगभग 2.3 लाख लोग काम करते हैं।

बड़े शहरों में जहाँ पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं, वे अपने बच्चों को ड्यूटी के दौरान ऐसे ही डे-केयर सेंटर्स में छोड़ते हैं।

पैरेंट्स के लिए जरूरी गाइडलाइन: कानूनी एक्शन और निगरानी

अगर बच्चे के साथ गलत व्यवहार हो, तो क्या करें?

  1. पुलिस में शिकायत: सबसे पहले तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर एफआईआर (FIR) दर्ज करवाएं।
  2. बाल कल्याण समिति: स्थानीय बाल सुरक्षा अधिकारी या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को मामले की लिखित शिकायत दें।
  3. मेडिकल टेस्ट: बच्चे का तुरंत मेडिकल और साइकोलॉजिकल चेकअप करवाएं ताकि कानूनी तौर पर सबूत मजबूत रहे।
  4. कानूनी सलाह: किसी अच्छे वकील से संपर्क कर सेंटर प्रबंधन और दोषी कर्मचारियों पर सख्त धाराएं लगवाएं।

डे-केयर पर नजर कैसे रखें?

  • सरप्राइज विजिट: बिना बताए अचानक कभी भी डे-केयर सेंटर पहुंच जाएं ताकि वहाँ के असली माहौल का पता चल सके।
  • CCTV फुटेज मांगें: मैनेजमेंट से समय-समय पर सीसीटीवी फुटेज चेक करने की जिद करें।
  • बच्चे के व्यवहार पर ध्यान दें: अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो रहा है, वॉशरूम जाने से डर रहा है, या उसके शरीर पर कोई खरोंच है, तो उसे हल्के में न लें।
  • स्टाफ से बात करें: रोज आते-जाते समय वहाँ के स्टाफ से बच्चे के मूड और व्यवहार के बारे में बात करते रहें।

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