Jaish e Mohammed terrorists arrested: गुजरात और मध्य प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।
गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों को धर-दबोचा है।
पकड़े गए ये सभी आरोपी गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से दो लड़कों की उम्र महज 18 और 19 साल है, जिन्हें बहुत ही कम उम्र में कट्टरपंथ के रास्ते पर धकेल दिया गया था।

गुजरात में स्लीपर सेल बनाने की थी फिराक
शुरुआती जांच और एटीएस (ATS) की पूछताछ में सामने आया है कि ये सभी आरोपी गुजरात के भीतर जैश-ए-मोहम्मद का एक मजबूत और एक्टिव नेटवर्क (स्लीपर सेल) तैयार करने में जुटे थे।
इनका मकसद राज्य में युवाओं को बरगलाना, उन्हें संगठन से जोड़ना और आने वाले समय में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देना था।
फिलहाल, गुजरात एटीएस इन सभी से बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क, इन्हें मिलने वाली फंडिंग और इनके असली आकाओं का पता लगाया जा सके।

क्या है ‘जैश-ए-मोहम्मद’ और कौन है मसूद अजहर?
जैश-ए-मोहम्मद (JeM) पाकिस्तान की धरती से चलने वाला एक बेहद खूंखार और बदनाम आतंकवादी संगठन है।
इसकी नींव आज से करीब 26 साल पहले यानी साल 2000 में खूंखार आतंकी मसूद अजहर ने रखी थी।
मसूद अजहर वही शख्स है जिसे साल 1994 में भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया था।

लेकिन, दिसंबर 1999 में आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को हाईजैक (अपहरण) कर लिया था।
उस वक्त विमान में सवार भारतीय नागरिकों की जान बचाने के लिए मजबूरन भारत सरकार को मसूद अजहर को रिहा करना पड़ा था।
जेल से छूटते ही मसूद अजहर ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित बहावलपुर को अपना हेडक्वार्टर बनाया और भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया।

भारत के सीने पर दिए 6 गहरे जख्म
मसूद अजहर के इस संगठन ने पिछले दो दशकों में भारत पर कई कायराना और बड़े आत्मघाती हमले किए हैं, जिनमें हमारे सैकड़ों जवान और बेगुनाह नागरिक शहीद हुए हैं:
1. सेना मुख्यालय पर हमला (अप्रैल 2000):
संगठन बनने के तुरंत बाद जैश के एक 17 साल के आत्मघाती हमलावर आफाक अहमद शाह ने जम्मू-कश्मीर में सेना की 15वीं कोर के दफ्तर के बाहर बारूद से भरी कार उड़ा दी थी, जिसमें 4 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।
2. जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला (अक्टूबर 2001):
श्रीनगर में विधानसभा परिसर के बाहर किए गए आत्मघाती धमाके में 30 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।
3. देश की संसद पर हमला (दिसंबर 2001):
जैश और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने दिल्ली में लोकतंत्र के मंदिर (संसद भवन) पर हमला किया था। सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी से आतंकी अंदर नहीं घुस पाए, लेकिन इस हमले में 8 सुरक्षाकर्मियों सहित 14 लोग शहीद हुए थे।
4. पठानकोट एयरबेस हमला (जनवरी 2016):
पंजाब के पठानकोट में स्थित वायुसेना के बेस पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमें हमारे 3 जांबाज जवान शहीद हुए।
5. उरी ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला (सितंबर 2016):
कश्मीर के उरी में सेना के कैंप पर सोते हुए जवानों पर हमला किया गया, जिसमें 19 सैनिक शहीद हुए।
भारत ने इसका बदला लेने के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में घुसकर ऐतिहासिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी।

6. पुलवामा आतंकी हमला (फरवरी 2019):
कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी टकरा दी थी। इस दर्दनाक हमले में देश के 40 जवान शहीद हो गए थे।
जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर जैश के ट्रेनिंग कैंपों पर ‘एयर स्ट्राइक’ कर उन्हें तबाह कर दिया था।

अब गुजरात और एमपी से इन 8 आतंकियों का पकड़ा जाना यह साफ करता है कि ये संगठन एक बार फिर भारत के शांत राज्यों में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया।
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