MP intercity govt bus routes: मध्य प्रदेश के बस यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है।
राज्य में एक बार फिर सरकारी बसों का दौर लौटने जा रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने ‘राज्य सड़क परिवहन स्कीम’ के तहत प्रदेश के 40 प्रमुख इंटरसिटी (दो शहरों को जोड़ने वाले) रूटों पर सरकारी बसें चलाने का बड़ा फैसला किया है।
सरकार का मुख्य मकसद निजी ऑपरेटरों की मनमानी पर लगाम लगाना और आम जनता को एक सुरक्षित, व्यवस्थित और समय पर मिलने वाली परिवहन सेवा देना है।
इस नई योजना के लागू होने के मात्र 7 दिनों के भीतर इन रूटों पर बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

क्या है पूरी योजना और कैसे चलेंगी बसें?
इस नई योजना को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग के ‘मध्य प्रदेश यात्री बस परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ को सौंपी गई है।
खास बात यह है कि ये बसें पूरी तरह सरकारी परमिट पर चलेंगी, लेकिन इनके संचालन के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP – Public Private Partnership) मॉडल को अपनाया जाएगा।
यानी सरकार निजी बस संचालकों के साथ एग्रीमेंट करेगी।
इन नोटिफाई किए गए 40 रूटों पर अब सरकारी और निजी दोनों ही तरह की बसें समानांतर रूप से चलेंगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे।

मध्य प्रदेश के कौन-कौन से जिले जुड़ेंगे?
इस योजना के दायरे में मध्य प्रदेश के लगभग सभी बड़े और प्रमुख जिले शामिल किए गए हैं।
रूट चार्ट में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे महानगरों के साथ-साथ रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर और नरसिंहपुर को जोड़ा गया है।
इन सभी जिलों को आपस में जोड़ने के लिए कुल 40 इंटरसिटी मार्ग तय किए गए हैं।
जानिए सबसे लंबे और सबसे छोटे रूट
इस योजना में छोटे सफर से लेकर बेहद लंबे सफर तक का ध्यान रखा गया है:
* सबसे लंबा रूट: इंदौर से सिंगरौली तक का है, जिसकी कुल दूरी 889 किलोमीटर है।
* दूसरा सबसे लंबा रूट: इंदौर से शहडोल (791 किलोमीटर)।
* तीसरा सबसे लंबा रूट: इंदौर से मऊगंज (780 किलोमीटर)।
* चौथा सबसे लंबा रूट: इंदौर से अनूपपुर (760 किलोमीटर)।
* सबसे छोटा रूट: खरगोन से आगर मालवा तक का तय किया गया है, जिसकी दूरी महज 258 किलोमीटर है।

अकेले इंदौर से चलेंगी 22 बसें
रूट चार्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को इस योजना का मुख्य केंद्र बनाया गया है।
अकेले इंदौर से कुल 22 बसें अलग-अलग जिलों के लिए रवाना होंगी।
इंदौर से इन शहरों के लिए मिलेगी बस:
अनूपपुर, भिंड, दतिया, गुना, मैहर, मऊगंज, मुलताई, निवाड़ी, रीवा, श्योपुर, सिंगरौली, बंडा, बीना, डिंडोरी, ग्वालियर, मनासा, मुरैना, नरसिंहपुर, पिपरिया, शहडोल, शिवपुरी और उमरिया।
इसके अलावा अन्य जिलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी दी गई है। जैसे अलीराजपुर से आगर मालवा, मंदसौर और शाजापुर के लिए बसें खुलेंगी।
वहीं बड़वानी, बुरहानपुर, धार और खंडवा से भी कई रूट तय किए गए हैं।

कैसी होंगी बसें और कितनी होंगी सीटें?
यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए बसों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
सामान्य रूट (शॉर्ट डिस्टेंस): इन रास्तों पर छोटी यानी ‘मिडी बसें’ चलाई जाएंगी। इनमें सीटों की संख्या 23 से 34 तक होगी और ये साधारण, सेमी-डीलक्स और डीलक्स कैटेगरी की होंगी।
इंटर-सिटी रूट (लॉन्ग डिस्टेंस): लंबे सफर के लिए 35 से 70 सीटों वाली बड़ी बसें चलेंगी। यात्रियों को थकान न हो, इसलिए इनमें एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी।

हाईटेक सुविधाएं: ऐप से पता चलेगी बस की लोकेशन
इस सरकारी बस सेवा की सबसे बड़ी खासियत इसका हाईटेक होना है।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए निम्नलिखित फीचर्स जोड़े गए हैं:
लाइव ट्रैकिंग: सभी बसों में ‘व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस’ (VLTD) लगाई जाएगी। यह डिवाइस हर 5 से 10 सेकंड में बस की सटीक लोकेशन और उसकी स्पीड की जानकारी सीधे सरकारी कमांड सेंटर को भेजेगी।
मोबाइल ऐप: यात्री अपने मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे बस की लाइव लोकेशन देख सकेंगे। इससे उन्हें यह पता चल जाएगा कि बस उनके स्टॉप पर कितने बजे पहुंचेगी (ETA)।
डिजिटल टिकट: अब लाइन में लगने या छुट्टे पैसों का झंझट खत्म होगा। इस सेवा में पूरी तरह से ई-टिकटिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे टिकट डिजिटल माध्यम से बुक होंगे।

कड़े नियम: बसों की फिटनेस, साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
अगर कोई ड्राइवर तय स्पीड से तेज बस चलाएगा या नियम तोड़ेगा, तो उस पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।
किसी भी शिकायत के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन सिस्टम भी उपलब्ध रहेगा।
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