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राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें: चेक बाउंस केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई 3 महीने की जेल, लगा करोड़ों का जुर्माना

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rajpal Yadav jail sentence: मशहूर बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव, जो अपनी बेहतरीन कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं, इस समय एक बहुत बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पुराने चेक बाउंस मामले में उनकी 3 महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा है।

सिर्फ इतना ही नहीं, अदालत ने एक्टर के रवैये और व्यवहार को ‘संदिग्ध’ (Doubtful) बताते हुए उन पर ₹7.35 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोक दिया है।

कोर्ट ने साफ लफ्ज़ों में अधिकारियों से कहा है कि राजपाल यादव को वापस जेल भेजा जाए।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद साल 2010 से जुड़ा हुआ है। उस समय राजपाल यादव ने बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का फैसला किया था।

इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी से ₹5 करोड़ का कर्ज (लोन) लिया था। राजपाल यादव का कहना था कि यह एक इन्वेस्टमेंट है, न कि सिर्फ लोन।

साल 2012 में फिल्म रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई। फिल्म फ्लॉप होने के कारण राजपाल यादव भारी घाटे में चले गए और तय समय पर कंपनी का पैसा नहीं लौटा पाए।

इसके बाद जब उन्होंने कंपनी को पैसे चुकाने के लिए चेक दिए, तो वे चेक बैंक में बाउंस हो गए। इसी वजह से यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंच गया।

समय बीतने के साथ ब्याज जुड़ते-जुड़ते यह रकम ₹5 करोड़ से बढ़कर करीब ₹9 करोड़ हो गई।

कोर्ट ने क्यों कहा एक्टर का रवैया ‘संदिग्ध’?

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने राजपाल यादव की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि राजपाल यादव को अदालत में दिए गए अपने वादों (Under-taking) को पूरा करने के लिए एक नहीं, बल्कि कई मौके दिए गए थे।

जून 2024 में कोर्ट ने उनकी सजा पर अस्थायी रोक भी लगाई थी ताकि वह ईमानदारी से पैसे चुका सकें। लेकिन वह बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे।

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि राजपाल यादव के बयानों में काफी विरोधाभास (उलटफेर) था।

वह पहले कुछ और कह रहे थे और बाद में अपनी बातों से पलट रहे थे।

इसी वजह से कोर्ट ने उनके व्यवहार को संदिग्ध माना।

शिकायतकर्ता कंपनी के वकील अवनीत सिंह सिक्का ने भी कोर्ट में दलील दी कि एक्टर पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं, इसलिए अब वे अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं भाग सकते।

जुर्माने का पूरा गणित

अदालत ने राजपाल यादव के खिलाफ चल रहे सातों मामलों में कड़ी कार्रवाई की है।

कोर्ट ने हर एक मामले में ₹1.05 करोड़ का जुर्माना लगाया है।

इस हिसाब से सातों मामलों का कुल जुर्माना ₹7.35 करोड़ बनता है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस जुर्माने की रकम में से हर मामले के ₹1 करोड़ 4 लाख 75 हजार शिकायतकर्ता कंपनी को मिलेंगे, जबकि ₹25 हजार राज्य सरकार के खाते में जाएंगे।

 

समझौते की कोशिशें रहीं नाकाम

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की काफी कोशिश की थी।

कोर्ट के कहने पर शिकायतकर्ता कंपनी ₹6 करोड़ लेकर पूरे मामले का फाइनल सेटलमेंट करने के लिए तैयार भी हो गई थी।

लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने इस ऑफर को ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हो चुका है और अपनी देनदारी चुकाने के लिए उन्हें अपने गांव की करोड़ों रुपये की संपत्ति तक बेचनी पड़ी है।

इसके बाद कोर्ट ने ₹3 करोड़ चुकाने का एक न्यायिक सुझाव भी दिया था, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पहले भी जा चुके हैं जेल

राजपाल यादव इस मामले में पहले भी जेल की हवा खा चुके हैं।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें और उनकी पत्नी राधा को दोषी मानते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी।

इसके बाद, इसी साल 5 फरवरी 2026 को उन्हें तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था।

हालांकि, 16 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें उनकी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए ₹1.5 करोड़ जमा करने की शर्त पर अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद 17 फरवरी को वह जेल से बाहर आए थे।

अब उनकी अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने और सजा बरकरार रहने के बाद उन्हें फिर से जेल जाना होगा।

“मैं चलती-फिरती चेकबुक हूँ”

दिलचस्प बात यह है कि तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने बड़े ही बेबाक अंदाज में मीडिया से कहा था, “मैं पैसों से घिरा हुआ हूँ, राजपाल तो एक चलती-फिरती चेकबुक है। मैं खुद भी पैसा कमाता हूँ और दूसरों को भी कमाने में मदद करता हूँ।”

उन्होंने दावा किया था कि उनके पास आने वाले सालों में ब्रांडिंग और फिल्मों को मिलाकर करीब ₹1200 करोड़ का काम है और कई बड़े प्रोजेक्ट्स कतार में हैं।

हाल ही में राजपाल यादव ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टु द जंगल’ जैसी बड़ी फिल्मों में नजर आए थे, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था।

लेकिन इन सब के बावजूद, कानूनी पचड़े और वादे न निभाने की आदत ने आज इस दिग्गज कलाकार को एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

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