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पहाड़ों में आफत, मैदानों में सूखा: एमपी समेत 7 राज्यों से मानसून गायब, MP के 24 जिलों पर सूखे का संकट!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Monsoon Update Drought Alert: उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग से एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है।

देश का मौसम इस समय दो अलग-अलग छोरों पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

जहां एक तरफ पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और बादल फटने से नदियां उफान पर हैं और चारों तरफ तबाही मची है, वहीं मध्य प्रदेश समेत देश के कई मैदानी राज्यों में मानसून की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है।

हालत यह है कि 11 जुलाई की रात को जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत इलाके पहलगाम में अचानक बादल फट गया।

इस वजह से वहां भीषण बाढ़ आ गई, जिसने किसानों के लहलहाते खेतों को बर्बाद कर दिया और कई संपर्क सड़कें पूरी तरह बह गईं।

ऐसा ही खौफनाक मंजर उत्तराखंड के विकासनगर में भी देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बाद लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक बहुत बड़ा भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ।

इस मलबे की चपेट में आने से कई गाड़ियां और कंस्ट्रक्शन मशीनें दब गईं।

पहाड़ी इलाकों में तो पानी आफत बना हुआ है, लेकिन देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस समय पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने की कगार पर पहुंच गया है।

देश के 70% हिस्से से बादल गायब, बढ़ने लगी गर्मी

एक तरफ जहां पहाड़ों में पानी का तांडव है, वहीं मौसम विभाग के आंकड़े डराने वाले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय देश के करीब 70 फीसदी हिस्से से मानसून के बादल पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में अगले 5 दिनों तक बारिश की उम्मीद बहुत ही कम जताई गई है।

बारिश थमने की वजह से इन सभी राज्यों में उमस, चिलचिलाती धूप और गर्मी ने एक बार फिर लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

आखिर क्यों रूठ गया मानसून? पाकिस्तान की सूखी हवाओं ने बिगाड़ा खेल

हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर अचानक हंसता-खेलता मानसून कहां गायब हो गया?

मौसम की सटीक जानकारी देने वाली वेबसाइट ‘ऑल इंडिया वैदर’ की रिपोर्ट ने इसका कारण बताया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय पड़ोसी देश पाकिस्तान की तरफ से बेहद गर्म और सूखी हवाएं भारत के वायुमंडल में प्रवेश कर चुकी हैं।

ये सूखी हवाएं अरब सागर से लेकर मध्य भारत और दक्षिण भारत तक फैल गई हैं।

इन पश्चिमी सूखी हवाओं का असर यह हो रहा है कि ये वातावरण में मौजूद सारी नमी (Moisture) को सोख रही हैं।

हवा में नमी न होने के कारण मानसूनी बादल बन ही नहीं पा रहे हैं।

यही वजह है कि मध्य प्रदेश और उसके आसपास के राज्यों में बारिश की गतिविधियां एकदम ठप पड़ गई हैं।

क्या दोबारा होगी बारिश

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोबारा बारिश होगी?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हमारी सारी उम्मीदें प्रशांत महासागर पर टिकी हुई हैं।

वहां मौसम के 3 नए सिस्टम (वेदर सिस्टम) बन रहे हैं।

अगर इन तीन प्रणालियों में से एक भी सिस्टम आगे बढ़कर भारत की तरफ आता है और बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाता है, तो वहां एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) बनेगा।

ऐसा होने पर मानसूनी हवाओं को दोबारा भरपूर नमी मिलेगी और उत्तर, मध्य व पश्चिम भारत में एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकेगा।

मध्य प्रदेश में सूखे का बड़ा संकट, किसानों की बढ़ी धड़कनें

इस साल मध्य प्रदेश में मानसून को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो भविष्यवाणी की है, उसने सरकार से लेकर अन्नदाताओं तक की रातों की नींद उड़ा दी है।

आईएमडी के मुताबिक, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है।

अगर फिलहाल के आंकड़ों को देखें तो स्थिति अभी नियंत्रण में दिखती है, लेकिन आने वाले दिनों का खतरा बड़ा है।

भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार, एमपी में अब तक औसतन 9.4 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस समय तक सामान्य तौर पर 8.7 इंच बारिश होनी चाहिए थी।

यानी राज्य में अब तक कोटे से करीब 8% ज्यादा बारिश हो चुकी है। जुलाई की शुरुआत तक ही प्रदेश में पूरे सीजन की लगभग 25% बारिश हो चुकी है।

लेकिन परेशानी की बात यह है कि अब तेज बारिश का सिलसिला पूरी तरह थम चुका है।

खरीफ की फसलों (जैसे सोयाबीन, धान, मक्का) को इस समय लगातार पानी की जरूरत होती है।

अगर जुलाई के बचे हुए दिनों और पूरे अगस्त महीने में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों को भारी नुकसान पहुंचेगा, जिसका सीधा असर देश के पेट भरने वाले किसानों की जेब और उनकी मेहनत पर पड़ेगा।

CM मोहन यादव के गृह संभाग पर सबसे ज्यादा खतरा, सरकार का ‘प्लान-24’ तैयार

मौसम विभाग की इस गंभीर चेतावनी को मुख्यमंत्री मोहन यादव की मध्य प्रदेश सरकार ने बेहद संजीदगी से लिया है।

संकट आने से पहले ही प्रशासन ने किसानों को बचाने के लिए कमर कस ली है।

राज्य के 24 जिलों के लिए एक बेहद खास और आपातकालीन कार्ययोजना (Special Action Plan) तैयार की गई है।

इस बार सरकार की सबसे ज्यादा चिंता मुख्यमंत्री मोहन यादव के खुद के गृह संभाग ‘उज्जैन’ और पूरे मालवा क्षेत्र को लेकर है, जहां सूखे का खतरा सबसे ज्यादा मंडरा रहा है।

इन सभी प्रभावित जिलों में खेती-किसानी और आसमान से बरसने वाली हर बूंद पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इन 24 जिलों पर है सरकार की पैनी नजर:

* उज्जैन संभाग और मालवा क्षेत्र:

उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, अलीराजपुर और झाबुआ।

* मध्य और अन्य क्षेत्र:

सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, गुना, दतिया, ग्वालियर और भिंड।

सूखे से निपटने के लिए सरकार की फुलप्रूफ प्लानिंग

किसानों को इस संकट से उबारने के लिए कृषि विभाग और राजस्व विभाग को एक साथ मिलकर काम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने इन प्रभावित जिलों के लिए पहले से ही विशेष गाइडलाइन (कृषि एडवाइजरी) जारी कर दी है।

* 7 जिलों में ग्राउंड लेवल पर माइक्रो प्लानिंग: जिन 24 जिलों को चिन्हित किया गया है, उनमें से सबसे ज्यादा संवेदनशील 7 जिलों के लिए बिल्कुल जमीनी स्तर पर जाकर माइक्रो प्लानिंग की जा रही है, ताकि पानी की कमी से फसलों को बचाया जा सके।

* वैज्ञानिकों की तकनीकी निगरानी: कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों को एक्टिव कर दिया गया है। ये वैज्ञानिक लगातार फसलों की सेहत और बदलते मौसम पर तकनीकी नजर रखेंगे और रेडियो, मोबाइल या बैठकों के जरिए किसानों को समय-समय पर जरूरी सलाह देंगे कि कम पानी में फसलों को कैसे बचाएं।

* बजट का पुख्ता इंतजाम: अगर हालात बिगड़ते हैं और राज्य को सूखा घोषित करना पड़ता है, तो सरकार ने साल 2020 की सूखा नीति के तहत वित्तीय तैयारियां पूरी कर ली हैं।

राजस्व विभाग के पास राहत कार्यों के लिए फिलहाल 20 करोड़ 9 लाख रुपए का फंड तुरंत उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर सरकार और भी पैसा जारी करेगी।

* क्राइसिस मैनेजमेंट: सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टरों से ‘आपदा प्रबंधन प्लान’ पहले ही मंगवा लिया गया है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है, ताकि अगर सूखा पड़ता है तो तुरंत एक्शन लिया जा सके।

फिलहाल, सरकार मुस्तैद है और किसान आसमान की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि कब प्रशांत महासागर का सिस्टम बंगाल की खाड़ी में आए और सूखी धरती की प्यास बुझाए।

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