Homeन्यूजकाशी, मथुरा और संभल पर सुप्रीम कोर्ट का 'समझौता' फॉर्मूला फेल, दोनों...

काशी, मथुरा और संभल पर सुप्रीम कोर्ट का ‘समझौता’ फॉर्मूला फेल, दोनों पक्षों ने कहा- कोर्ट में ही करेंगे फैसला

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Kashi Mathura Sambhal Dispute: उत्तर प्रदेश के तीन सबसे बड़े धार्मिक स्थलों—वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद—के विवादों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों मामलों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है।

दोनों पक्षों का साफ कहना है कि वे अब टेबल पर बैठकर कोई समझौता नहीं करना चाहते, बल्कि अदालत में केस लड़कर कानूनी तरीके से ही आखिरी फैसला चाहते हैं।

Corona Vaccine, Supreme Court Corona Vaccine, Corona Vaccine Side Effects, Supreme Court, Vaccine Compensation, No-Fault Compensation Policy, Covishield Side Effects, Vaccine Death Compensation, Supreme Court Verdict, कोरोना वैक्सीन मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अदालत के बाहर नहीं होगा समझौता

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट परिसर में आगामी 21 से 23 अगस्त तक ‘समाधान समारोह 2026’ के तहत एक विशेष लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है।

इसका मकसद सालों से खिंच रहे मुकदमों को बातचीत और आपसी सहमति से खत्म कराना है।

इसी पहल के तहत सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को पत्र भेजकर पूछा था कि क्या वे मध्यस्थता के लिए तैयार हैं? लेकिन किसी भी पक्ष ने इसके लिए हामी नहीं भरी।

जानिए सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव ठुकराने के बाद अब आगे क्या होगा?

जब दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने बैठकर मामला सुलझाने से इनकार कर दिया है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि अब आगे क्या होगा?

* नियमित कानूनी सुनवाई: अब सुप्रीम कोर्ट और संबंधित अदालतों में इन तीनों मामलों की रूटीन (नियमित) सुनवाई जारी रहेगी। दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने-अपने ऐतिहासिक सबूत, दस्तावेज और दलीलें पेश करेंगे।

* लंबी खिंचेगी कानूनी प्रक्रिया: चूंकि अब मामला पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इसमें गवाहियों, सबूतों की जांच और लंबी बहसों का दौर चलेगा। इसका मतलब है कि इन विवादों के अंतिम फैसले में अभी लंबा वक्त लग सकता है।

* भविष्य में मध्यस्थता की गुंजाइश: हालांकि अभी दोनों पक्षों ने मना कर दिया है, लेकिन कानूनन अगर भविष्य में कभी भी दोनों पक्षों को लगता है कि वे बातचीत करना चाहते हैं, तो अदालत दोबारा मध्यस्थता का विकल्प दे सकती है। फिलहाल के लिए फैसला कोर्ट के ऑर्डर से ही होगा।

देश की राजनीति और कानून को गरमाने वाले यूपी के ये 3 बड़े विवाद आखिर हैं क्या?

आइए जानते हैं कि काशी, मथुरा और संभल के इन तीनों विवादों की जमीनी हकीकत और दोनों पक्षों के दावे क्या हैं:

पहला विवाद: ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी)

* झगड़ा क्या है?: काशी विश्वनाथ मंदिर के ठीक बगल में ज्ञानवापी मस्जिद है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब ने यहां के प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर मस्जिद खड़ी कर दी थी।

* हिंदू पक्ष की मांग: इस पूरे परिसर को प्राचीन मंदिर घोषित किया जाए, मस्जिद के अंदर नियमित पूजा-पाठ का हक मिले और एएसआई (ASI) सर्वे में जो भी धार्मिक अवशेष मिले हैं, उन्हें मंदिर का हिस्सा माना जाए।

* मुस्लिम पक्ष का तर्क: मस्जिद को वैसे ही रहने दिया जाए जैसी वह है। 1991 के ‘पूजा स्थल अधिनियम’ (Places of Worship Act) का हवाला देते हुए मुस्लिम पक्ष का कहना है कि आजादी के समय जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, उसे बदला नहीं जा सकता।

फिलहाल वाराणसी कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसकी सुनवाई चल रही है।

दूसरा विवाद: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह (मथुरा)

* झगड़ा क्या है?: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर से सटी हुई शाही ईदगाह मस्जिद है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद ठीक उसी जगह बनी है जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था और वहां बने भव्य मंदिर को तोड़कर इसे बनाया गया।

* हिंदू पक्ष की मांग: शाही ईदगाह मस्जिद को वहां से हटाया जाए और पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपकर वहां भव्य मंदिर का दोबारा निर्माण हो।

* मुस्लिम पक्ष का तर्क: मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद वैध है और साल 1968 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हो चुका है, इसलिए अब इस विवाद को दोबारा नहीं उछाला जाना चाहिए।

यह मामला भी इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

तीसरा विवाद: शाही जामा मस्जिद (संभल)

* झगड़ा क्या है?: संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद को लेकर हाल ही में विवाद गहराया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद असल में प्राचीन ‘हरिहर मंदिर’ (कल्कि धाम से जुड़ा स्थल) को तोड़कर बनाई गई थी।

* हिंदू पक्ष की मांग: मस्जिद का वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे कराया जाए ताकि सच सामने आ सके। मंदिर के सबूत मिलने पर वहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाए।

* मुस्लिम पक्ष का तर्क: इसे एक ऐतिहासिक और वैध मस्जिद माना जाए। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जानबूझकर पुराने स्मारकों को निशाना बनाया जा रहा है और इस पर किसी भी तरह के सर्वे या नए मुकदमों को तुरंत रोका जाना चाहिए।

#SupremeCourt #GyanvapiDispute #MathuraEidgah #SambhalJamaMasjid #KashiMathuraSambhal #LegalNews #UPPolitics

- Advertisement -spot_img