Sadhvi Harshanand on saints: मॉडलिंग की दुनिया को छोड़कर संन्यास का रास्ता चुनने वाली हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि एक बार फिर चर्चा में हैं।
इस बार वजह उनका कोई प्रवचन नहीं, बल्कि संत समाज के एक वर्ग पर लगाया गया उनका तीखा आरोप है।
अपने पहनावे, मेकअप और परिवार के साथ रहने को लेकर हो रही बयानबाजी से नाराज साध्वी हर्षानंद ने एक वीडियो जारी कर संतों पर तंज कसा है और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

“संत संत न रहकर सास बन गए हैं”
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में साध्वी हर्षानंद ने बेहद बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि कुछ संतों को उनकी हर बात से परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा, “ये कौन से संत हैं जिन्हें मेरी हर बात बुरी लग जाती है? मैं क्या खाऊँ, क्या पहनूँ, कहाँ रहूँ, किससे मिलूँ या कहाँ घूमूँ—इन्हें हर बात से दिक्कत है। यह संत कम और मेरी सास ज्यादा बन गए हैं, जो हर छोटी-छोटी बात पर मुँह फुला लेते हैं।”
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उन्होंने संतों के स्वभाव पर बात करते हुए कहा कि एक सच्चे संत के मन में राग, द्वेष या ईर्ष्या जैसी भावनाएं नहीं होतीं। संत का स्वभाव तो प्यार देने का होता है और वे बड़ी से बड़ी बातों को हंसकर टाल देते हैं। लेकिन यहाँ तो संत छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो रहे हैं, जबकि संत का गुस्सा तो पानी के बुलबुले की तरह होना चाहिए जो तुरंत शांत हो जाए।

“जहाँ 2 महीने की बच्ची सुरक्षित नहीं, वहाँ मैं कहाँ जाऊँ?”
अपने परिवार के साथ रहने के आरोपों पर जवाब देते हुए साध्वी ने समाज में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जिस समाज में 2 महीने की मासूम बच्ची भी सुरक्षित नहीं है और आए दिन बलात्कार जैसी खौफनाक वारदातें सुनने को मिलती हैं, वहाँ मैं कहाँ रहूँ? मुझे कौन सुरक्षा देगा?”
साध्वी हर्षानंद ने साफ शब्दों में कहा कि जो संत उन पर परिवार छोड़ने का दबाव बना रहे हैं, वे पहले उनकी सुरक्षा की 100% जिम्मेदारी लें। अगर वे गारंटी देते हैं, तो वह तुरंत उनके आश्रम जाने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पास रहने के सिर्फ दो ही ठिकाने हैं—पहला गुरुजी का आश्रम, जहाँ वह दूसरों को परेशानी न हो इसलिए हमेशा नहीं रह सकतीं, और दूसरा उनके माता-पिता का घर, जहाँ वह खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं।

गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद उज्जैन में गुरु पूर्णिमा के दौरान शुरू हुआ था।
मौनी तीर्थ आश्रम में जब मीडिया ने उनसे सवाल किया कि संन्यास के बाद भी वह मोह-माया छोड़कर परिवार के साथ क्यों रह रही हैं, तो साध्वी ने दोटूक जवाब दिया था।
उन्होंने कहा था कि जिन संतों को समस्या है, उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं। जब उनका अपना आश्रम बन जाएगा, तो वह भी आश्रम में रहने लगेंगी।
इसी दौरान उन्होंने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा पर भी चिंता जताई थी और तंज कसते हुए कहा था कि कुछ संत खुद छुप-छुपकर ब्यूटी पार्लर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दूसरों के मेकअप पर उंगली उठाते हैं।

उनके इस बयान के बाद संत समाज में खलबली मच गई थी।
दीक्षा के बाद से ही निशाने पर हैं हर्षा
हर्षा रिछारिया ने 18 अप्रैल 2026 को उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद से संन्यास की दीक्षा ली थी।
दीक्षा के समय उन्होंने बाकायदा पिंड दान की प्रक्रिया पूरी की और फिर व्यासपीठ से कथा और प्रवचन देना शुरू किया।
हालांकि, उनके ग्लैमरस बैकग्राउंड, बाल रंगने, मेकअप करने और माता-पिता के साथ रहने को लेकर कुछ संत शुरू से ही उन पर सवाल उठाते रहे हैं।

अब साध्वी हर्षानंद ने इन सभी बयानों का करारा जवाब देकर विवाद को और बढ़ा दिया है।
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