INDIA Alliance Protest CEC: देश में चुनावी निष्पक्षता, EVM के इस्तेमाल और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए जा रहे नामों को लेकर विपक्षी दलों का गुस्सा अब सड़कों पर फूटने वाला है।
राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन की एक अहम बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े आंदोलन का शंखनाद कर दिया है।
करीब तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा और जिलाधिकारी (DM) कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

इसके साथ ही 6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के सभी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय का घेराव करेंगे।
INDIA ब्लॉक की बैठक में बने 3 बड़े सहमति बिंदु
30 सितंबर 2026 को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के 240 से अधिक सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाले 19 प्रमुख राजनीतिक दल शामिल हुए।
लंबी चर्चा के बाद विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से तीन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई:
* मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और निष्कासन: विपक्ष ने मांग की है कि CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। अगर वे पद नहीं छोड़ते हैं, तो उनके खिलाफ संसद में निष्कासन का प्रस्ताव लाया जाएगा।
* वोटर लिस्ट में पारदर्शिता और प्रक्रिया में सुधार: मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से काटे गए सभी नामों की सूची बूथ और विधानसभा स्तर पर सार्वजनिक की जाए।
विपक्ष का कहना है कि किसी भी नागरिक का नाम हटाने से पहले उसे लिखित नोटिस दिया जाए और अपील का निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए।
* EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव: निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की जगह फिर से पुराने बैलेट पेपर (कागजी मतपत्र) के जरिए मतदान कराने की व्यवस्था लागू की जाए।

खड़गे का आरोप: “चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन चुका है”
बैठक के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला।
खड़गे ने कहा, “मोदी-शाह की जोड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को महज एक कठपुतली बनाकर रख दिया है। बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ‘वोट चोरी’ का खेल खेल रही है। जहां भी हमारे नेता लोकतंत्र और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है।”
खड़गे ने आगे बताया कि इस आंदोलन में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि युवा, आम नागरिक, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और लोकतंत्र की रक्षा के लिए काम करने वाली तमाम संस्थाएं एक साथ मंच पर आएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल देश के राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगेगा और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगा।

राहुल गांधी और ममता बनर्जी के कड़े तेवर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि देश के लोकतंत्र को चुनिंदा लोगों ने बंधक बना लिया है।
उन्होंने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार मिलकर भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला कर रहे हैं। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति या दल से बहुत बड़ा है। हम इस तानाशाही को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों को कानून के दायरे में सजा दिलाकर रहेंगे। हम सब एक अटूट गठबंधन हैं और देश में बदलाव लाकर रहेंगे।”

वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि बीजेपी ने कई राज्यों में चुनावों के दौरान धांधली की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी गड़बड़ियों के बल पर नतीजे बदले गए। ममता बनर्जी ने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार से तुरंत इस्तीफे की मांग की।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष के लगातार दबाव के कारण चुनाव आयोग को फॉर्म 6 की प्रक्रिया में बदलाव करने पड़े हैं, जो विपक्षी एकजुटता की पहली नैतिक जीत है।

बैठक में कौन-कौन से दल रहे शामिल?
दिल्ली में हुई इस बैठक में विपक्ष का व्यापक जनाधार देखने को मिला।
बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरद पवार), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), CPI-ML, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस (एम), MDMK, VCK, RSP, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) शामिल हुईं।
बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला और दीपांकर भट्टाचार्य जैसे वरिष्ठ नेता खुद मौजूद रहे, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस की क्रोनोलॉजी: हरियाणा चुनाव से अब तक
हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही कांग्रेस और सहयोगी दल लगातार चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।
आइए जानते हैं पिछले दो सालों में यह मुद्दा किस तरह आगे बढ़ा:
* अक्टूबर 2024: हरियाणा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस ने EVM बैटरी की 99% चार्जिंग और मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
* 7 अगस्त 2025: कर्नाटक के महादेवपुरा में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद विपक्ष ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ‘वोट चोरी’ शब्द का इस्तेमाल किया।
* 11 अगस्त 2025: INDIA गठबंधन के सांसदों ने मतदाता सूची में व्यापक संशोधन (SIR) के खिलाफ संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला।
* 17 अगस्त – 1 सितंबर 2025: बिहार में राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली और आरोप लगाया कि गरीबों और वंचितों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
* 5 नवंबर 2025: ‘H-Files’ नाम से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी ने हरियाणा में फर्जी वोटरों और वोटर लिस्ट में तस्वीरों की गड़बड़ी का मुद्दा उठाया।
* 14 दिसंबर 2025: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्ष ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नाम से एक विशाल रैली का आयोजन किया।
* 24 सितंबर 2026: राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए।
* 30 सितंबर 2026: INDIA गठबंधन के 19 दलों ने दिल्ली में एकजुट होकर 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ का आधिकारिक ऐलान किया।

आगामी दिनों में विपक्षी दलों का यह राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।
एक तरफ जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करार दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष पर इन आरोपों का जवाब देने का दबाव भी बढ़ेगा।
6 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाला सांसदों का घेराव इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु रहने वाला है।
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