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त्योहार भी मनेगा और सांसें भी बचेंगी: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों पर बैन की मांग की खारिज, लेकिन 24 घंटे जलाने की छूट भी नहीं

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court on cracker ban: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा और संतुलित फैसला दिया है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगाना न तो सही है और न ही व्यावहारिक।

कोर्ट का मानना है कि अगर पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई, तो इससे देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लोगों को दिन-रात पटाखे फोड़ने की खुली छूट दे दी जाएगी।

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जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने स्पष्ट कहा कि 24 घंटे पटाखे फोड़ने की इजाजत किसी भी हाल में नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने सरकारों और प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे पटाखे फोड़ने के लिए एक निश्चित समय (टाइम स्लॉट) तय करें, ताकि लोग त्योहार का आनंद भी ले सकें और आतिशबाजी से किसी आम नागरिक या मरीज को परेशानी न हो।

पर्यावरण और परंपरा के बीच संतुलन जरूरी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में धार्मिक मान्यताओं, लोगों की सेहत और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच एक सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

न तो हम पर्यावरण और सेहत की अनदेखी कर सकते हैं और न ही त्योहार की खुशियों पर पूरी तरह रोक लगा सकते हैं।

इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल बेरियम की जांच करने, उनके शोर (डेसिबल लेवल) की सीमा तय करने और जरूरी फायर टेस्ट पूरे करने के लिए थोड़ा और वक्त दिया है।

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अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

क्या हैं ‘नेक्स्ट-जेनरेशन ग्रीन पटाखे’?

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में एक खास प्रस्ताव रखा।

उन्होंने बताया कि ‘काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च – नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (CSIR-NEERI) ने नई तकनीक से ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स’ विकसित किए हैं।

इन नए ग्रीन पटाखों की खासियत यह है कि इन्हें बनाने में जहरीले केमिकल और बेरियम साल्ट की मात्रा काफी कम कर दी गई है।

इससे इन पटाखों से निकलने वाला धुआं और हानिकारक गैसें बहुत हद तक कम हो जाती हैं।

ग्रीन पटाखों के लिए तय शर्तें

कोर्ट में पेश किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, इन नए ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए कुछ सख्त शर्तें लागू होंगी:

* केवल लाइसेंस वाले निर्माता: इन पटाखों को बनाने की इजाजत केवल उन्हीं कंपनियों को होगी जिनके पास सरकार का वैध लाइसेंस है।

* शोर की सीमा: इन पटाखों से निकलने वाली आवाज का स्तर 125 डेसिबल (dB) से अधिक नहीं होना चाहिए।

* प्रतिबंधित केमिकल पर रोक: ऐसे केमिकल जो सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, उनका इस्तेमाल इन पटाखों में पूरी तरह बैन रहेगा।

पिछले साल का फैसला और ग्रीन क्रैकर्स

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल भी दिवाली के दौरान दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में ग्रीन पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल की सीमित अनुमति दी थी।

उस समय भी कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ग्रीन पटाखे सिर्फ दिवाली से पहले और दिवाली वाले दिन ही, तय किए गए घंटों के दौरान ही चलाए जा सकेंगे।

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अदालत के इस नए रुख से एक बात साफ है कि आने वाले त्योहारों में आतिशबाजी तो होगी, लेकिन सख्त नियमों, समय की पाबंदी और पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों के साथ ही।

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