CJP on Ruchika Singh FIR: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है।
इस मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में आरोपी युवती रुचिका सिंह के खिलाफ पुलिस ने ZERO FIR दर्ज कर ली है।
दूसरी तरफ, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है।
पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास का कहना है कि किसी के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के बजाय इसे मानहानि का मामला मानना चाहिए था।


‘लोग तो रोज गाली देते हैं, ये अपराध कैसे?’ – CJP का बयान
मामले पर बयान देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया:
“इस देश में लोग चलते-फिरते आम बोलचाल में भी गालियां दे देते हैं। किसी बात को लेकर गुस्सा जाहिर करना अपराध कैसे बन गया? युवती के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करना सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग है। अगर कोई मामला बनता भी है, तो वह केवल मानहानि (Defamation) का होना चाहिए था।”

क्या है पूरा विवाद और कैसे शुरू हुई कार्रवाई?
घटना 23 जुलाई की है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का एक प्रदर्शन चल रहा था।
आरोप है कि इस दौरान गाजियाबाद की रहने वाली और नोएडा के एक मॉल में हेयर कटिंग का काम करने वाली रुचिका सिंह ने मीडिया और कैमरों के सामने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ बेहद अभद्र शब्दों का प्रयोग किया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

इसके बाद गाजियाबाद की रहने वाली और पेशे से वकील स्मृति सिंह चंदेल ने नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता स्मृति सिंह ने कहा:
“प्रधानमंत्री देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। सार्वजनिक मंच से देश के PM और उनकी मां के खिलाफ ऐसी अभद्र टिप्पणी करना न सिर्फ पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि इससे पूरी दुनिया में देश की छवि भी खराब होती है।”
ZERO FIR दर्ज, दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर हुआ केस
नोएडा पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत ZERO FIR दर्ज कर ली।
चूंकि घटना जंतर-मंतर (नई दिल्ली) में हुई थी, इसलिए इस एफआईआर को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया गया है।

समझें: क्या होती है ‘जीरो FIR’?
आमतौर पर FIR उसी थाने में दर्ज होती है, जहां अपराध हुआ हो। लेकिन अगर मामला गंभीर हो, तो पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है।
पुलिस बिना नंबर (0 नंबर) दिए केस दर्ज कर लेती है और फिर उसे संबंधित थाने में भेज देती है। इसे ही ‘जीरो FIR’ कहा जाता है।

रुचिका सिंह पर किन-किन धाराओं में केस दर्ज?
नोएडा पुलिस ने रुचिका सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
* धारा 352 (BNS): जानबूझकर किसी का अपमान करना, जिससे शांति भंग होने या विवाद पैदा होने का खतरा हो।
* सजा: 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।
* धारा 353(1) (BNS): ऐसी झूठी या भड़काऊ अफवाह/बयान फैलाना, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़े
* सजा: 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।
* धारा 356(1) (BNS): किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से मानहानि करना
* सजा: 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।

हिंदू संगठनों ने जताया विरोध, गिरफ्तारी की मांग
हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप खेतान ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर पुलिस से युवती की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
उन्होंने दावा किया कि रुचिका बालिग है और उसने पब्लिसिटी पाने के उद्देश्य से जानबूझकर पीएम और सेना के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की हैं।

PM मोदी के AI मॉर्फ्ड वीडियो पर भी बड़ा एक्शन: मेटा इंडिया प्रमुख पर FIR
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान का एक और विवादित मामला सामने आया है।
इस दौरान सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाया गया मॉर्फ्ड (फर्जी) वीडियो वायरल कर दिया गया था।
इस मामले में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

* क्यों हुई कार्रवाई? पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का ‘कंटेंट मॉडरेशन’ सिस्टम इस फर्जी वीडियो को वक्त रहते रोकने में नाकाम रहा।
* जांच का दायरा: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जी AI वीडियो को सबसे पहले किसने बनाया, किसने अपलोड किया और इसे फैलाने में किन नेटवर्क का हाथ था।
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