Umaria Food Bill Scam: मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी पैसों की कैसी बर्बादी होती है, इसकी एक बानगी उमरिया जिले में देखने को मिली है।
सरकारी आयोजनों में चाय-नाश्ते के नाम पर ऐसे बिल बनाए जा रहे हैं, जिन्हें सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।
महज आधे घंटे के छोटे से भूमिपूजन कार्यक्रम में हजारों रुपये के नाश्ते का बिल पास करा लिया गया।
जब यह बिल सोशल मीडिया पर लीक हुआ, तो ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया।

उमरिया: आधे घंटे के भूमिपूजन में 43 हजार का खर्च
मामला उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के परासी ‘अ’ ग्राम पंचायत का है।
यहाँ 29 मई को 12 लाख रुपये की लागत से बनने वाली 300 मीटर लंबी सीसी रोड का भूमिपूजन हुआ था।
इस छोटे से कार्यक्रम में पूर्व मंत्री व स्थानीय विधायक मीना सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष अनुजा पटेल और जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए थे।

कार्यक्रम सिर्फ 30 मिनट तक चला, लेकिन जब इसका कुल खर्च सामने आया तो सबके होश उड़ गए।
इस आधे घंटे के आयोजन का कुल बिल करीब 43 हजार रुपये बनाया गया। बिल के मुताबिक:
- समोसे: 6,000 रुपये
- नमकीन: 4,000 रुपये
- अन्य इंतजाम व खाद्य सामग्री: करीब 33,000 रुपये
लोगों का कहना है कि इतने कम समय और सीमित भीड़ वाले कार्यक्रम में 10 हजार रुपये के समोसे और नमकीन खा जाना समझ से परे है।

विवाद बढ़ने पर जनपद पंचायत के अधिकारियों ने सफाई दी है।
ग्राम पंचायत सचिव का कहना है कि जितना खर्च हुआ, उतना ही भुगतान किया गया।
वहीं जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) अंकित सिरोठिया और एपीओ राजेश कुमार ने माना कि कार्यक्रम के हिसाब से बिल काफी ज्यादा लग रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।

शहडोल: 1 घंटे में 14 किलो ड्राई फ्रूट्स चट कर गए अफसर
सरकारी पैसों के दुरुपयोग की यह अकेली घटना नहीं है।
इससे कुछ ही समय पहले पड़ोस के शहडोल जिले में भी ऐसा ही अजीबो-गरीब मामला सामने आया था।
शहडोल की भदवाही ग्राम पंचायत में 25 मई को ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का एक जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और एसडीएम समेत तमाम बड़े अफसर पहुंचे थे।
कार्यक्रम की मेजबानी ग्राम पंचायत ने की थी।
बाद में जब नाश्ते और चाय का बिल सार्वजनिक हुआ तो पता चला कि महज एक घंटे के इस आयोजन में अफसर 14 किलो ड्राई फ्रूट्स खा गए।
* ड्राई फ्रूट्स का बिल: 5 किलो काजू, 6 किलो बादाम और 3 किलो किशमिश के नाम पर 19,010 रुपये का बिल बनाया गया।
* अनोखी चाय: अफसरों के लिए चाय बनाने के नाम पर 6 लीटर दूध में 5 किलो शक्कर मिलाई गई।
जब बिल वायरल हुआ तो जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
अधिकारियों का कहना है कि वे कार्यक्रम में मौजूद थे, लेकिन वहां इतना ड्राई फ्रूट नहीं परोसा गया था, यानी फर्जी बिल बनाकर भुगतान निकाला गया।
24 लीटर पेंट के लिए 443 लेबर और 215 मिस्त्री!
शहडोल जिले का ही एक और मामला काफी चर्चा में रहा, जहां शिक्षा विभाग में स्कूल मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया।
ब्यौहारी स्थित दो सरकारी स्कूलों में सिर्फ 24 लीटर पेंट कराया जाना था। बाजार में इस पेंट की कीमत लगभग 4,704 रुपये थी।
लेकिन इस 24 लीटर पेंट को दीवारों पर पोतने के लिए कागजों पर 443 मजदूर और 215 मिस्त्री काम पर लगा दिए गए।
इस पेंटिंग के नाम पर कुल 3.38 लाख रुपये का भुगतान उठा लिया गया।
जब यह घोटाला उजागर हुआ तो राज्य के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित स्कूल के प्राचार्य को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच बैठा दी।
जनता के पैसे की खुली लूट पर सवाल
इन सभी मामलों से यह साफ जाहिर होता है कि निचले स्तर पर सरकारी योजनाओं और आयोजनों के नाम पर कागजी बिल तैयार कर सरकारी फंड का बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है।

बिलों के सार्वजनिक होने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर जांच की बात तो कही जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस तरह की फिजूलखर्ची को लेकर आम जनता में काफी नाराजगी है।
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