Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की सिविल कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई।
भरत तिवारी के परिवार की तरफ से पैरवी कर रहे वकील संजीव कुमार सिंह ने अदालत के सामने 11 मुख्य बातें (प्वाइंट्स) रखीं, जिन पर कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है।
अदालत ने इन सभी बिंदुओं पर सहमति जताते हुए भोजपुर के पुलिस कप्तान (SP) से अब तक की जांच की पूरी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

सुनवाई के बाद अदालत परिसर के बाहर वकील संजीव कुमार सिंह ने दावा किया कि कोर्ट ने एनकाउंटर में शामिल 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है।
हालांकि, अदालत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अभी गैर-जमानती वारंट जारी नहीं हुआ है, बल्कि वकील द्वारा उठाए गए 11 सवालों और बिंदुओं पर पुलिस प्रशासन से अपडेट रिपोर्ट मांगी गई है।

वकील ने कोर्ट के सामने रखे ये 11 अहम सवाल
भरत तिवारी के परिजनों के वकील ने पुलिस की कार्यशैली और जांच की गति पर सवाल उठाते हुए अदालत से निम्नलिखित 11 बिंदुओं पर जवाब और कार्रवाई की मांग की है:
- जांच का ब्योरा: अब तक इस पूरे मामले में कब-कब क्या जांच हुई, उसकी पूरी तारीख और डिटेल दी जाए।
- गिरफ्तारी के प्रयास: नामजद आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं?
- नोटिस का स्टेटस: आरोपियों को जो कानूनी नोटिस भेजे गए थे, उन पर क्या तामीली हुई और उनका क्या स्टेटस है?
- अरेस्ट न होने की वजह: अगर आरोपी पुलिसकर्मी या अधिकारी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं, तो इसके पीछे की स्पष्ट वजह क्या है?
- डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत: जांच के दौरान अब तक कौन-कौन से डिजिटल सबूत जुटाए गए हैं?
- गवाहों के बयान: इस केस से जुड़े किन-किन गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं?
- CCTV और CDR की जानकारी: क्या घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा एकत्र किए गए हैं?
- फरार आरोपियों पर एक्शन: क्या कोई आरोपी जानबूझकर पुलिस से भाग रहा है? यदि हां, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?
- जांच का मौजूदा चरण: वर्तमान समय में जांच किस मोड़ या चरण में पहुंच चुकी है?
- भविष्य का प्लान: आगे की जांच का क्या रोडमैप है और इसे पूरा करने की क्या समय-सीमा तय की गई है?
- गैर-जमानती वारंट की मांग: न्याय के हित में सभी आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए।

वकील का यह भी कहना है कि उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि 12 अगस्त तक तत्कालीन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया जाए।
इस मामले में तत्कालीन SDM संजीत कुमार, SDOP राजेश शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दरोगा अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, STF जवान अक्षय कुमार, विकास कुमार और SI रमाशंकर यादव समेत कुल 11 लोग नामजद हैं।
अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिजनों के आक्रोश और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद प्रशासन को कई कड़े कदम उठाने पड़े हैं:
* एक STF जवान की गिरफ्तारी: एनकाउंटर में शामिल STF जवान अक्षय कुमार को भोजपुर पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
* अधिकारियों पर गाज: जगदीशपुर के तत्कालीन SDM संजीत कुमार को पद से हटाकर पटना मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
* SDOP का तबादला रद्द: तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मा का तबादला पहले मद्य निषेध विभाग में किया गया था, लेकिन परिजनों के विरोध के बाद उन्हें लाइन क्लोज कर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया।
* थानाध्यक्ष सस्पेंड: शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

पीड़ित परिवार की सरकार से 4 मुख्य मांगें
* एनकाउंटर में शामिल SDM, SDOP और सभी पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
* बिलौटी गांव में स्वर्गीय भरत तिवारी की याद में एक प्रतिमा स्थापित की जाए।
* भरत तिवारी को ‘शहीद‘ का दर्जा दिया जाए और परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
* जिस गांव के हक की लड़ाई भरत लड़ रहे थे, उस गांव का नाम बदलकर ‘शहीद भरत तिवारी जविनिया गांव’ रखा जाए।

कैसे हुआ था एनकाउंटर? जानिए पूरी कहानी
यह पूरा मामला 15 जून की सुबह का है, जब भरत भूषण तिवारी ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक लाइव वीडियो स्ट्रीम किया था।
वीडियो में भरत एक सुनसान इलाके में खड़ा दिख रहा था, जहां उसके चारों ओर बुलेटप्रूफ जैकेट पहने भोजपुर पुलिस और STF के जवान हथियारों के साथ तैनात थे।
लाइव वीडियो में भरत ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था, “मैं कोई अपराधी नहीं हूं, फिर भी पुलिस और एसटीएफ मुझे पकड़ने आई है।”
वीडियो के अंत में भरत ने अपना हथियार पुलिस की तरफ फेंक दिया और सरेंडर करने की बात कहकर लाइव बंद कर दिया।
हालांकि, पुलिस का दावा अलग था।

पुलिस के अनुसार, सरेंडर का नाटक करने के बाद भरत ने दोबारा पिस्टल उठाकर पुलिस टीम पर गोली चलाने की कोशिश की।
जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं, जिससे भरत घायल हो गया और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि यह एक पूरी तरह से सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounter) था।
शुरुआत से अब तक की पूरी टाइमलाइन
* 15-17 जून: भरत तिवारी का फेसबुक लाइव, सरेंडर का दावा और पुलिस कार्रवाई में गोली लगना। इलाज के दौरान पीएमसीएच (PMCH) पटना में भरत की मौत।
* 18 जून: घटना के विरोध में भोजपुर समेत पूरे बिहार में प्रदर्शन और जन-आक्रोश।
* 20 जून: शुरुआती जांच में लापरवाही पाए जाने पर शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए।
* 21-22 जून: मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।
* 22 जून: मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव और DGP से जवाब तलब किया।
* 23 जून: भरत की मां की शिकायत पर तत्कालीन एसएचओ और एसडीपीओ समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या (302) की FIR दर्ज।

* 24-26 जून: पीड़ित परिवार के समर्थन में महापंचायत। पूर्व न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अगुवाई में न्यायिक जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया।
* 27 जून: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भरत को 5 गोलियां लगी थीं, जबकि पुलिस ने शुरुआत में 3 गोलियां मारने का दावा किया था।
* 28-29 जून: जब्त हथियारों को जांच के लिए FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) भेजा गया। राष्ट्रपति सचिवालय ने भी मामले का संज्ञान लिया।
* 24 जुलाई: पीड़ित परिवार ने पटना में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद SDM और SDOP को उनके पदों से हटा दिया गया।
* 31 जुलाई: केस में पहली बड़ी गिरफ्तारी करते हुए STF जवान अक्षय कुमार को जेल भेजा गया।

फिलहाल, आरा कोर्ट द्वारा भोजपुर एसपी से 11 बिंदुओं पर मांगी गई जांच रिपोर्ट के बाद इस केस में नया मोड़ आ गया है।
अब सभी की निगाहें पुलिस द्वारा अदालत में पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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