Sawan Kamika Ekadashi Vrat: हिंदू सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का अत्यंत विशेष स्थान है।
शास्त्रों में एकादशी तिथि को जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की प्रिय तिथि बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन सावन (श्रावण) के पवित्र महीने में आने वाली एकादशियों का फल कई गुना अधिक फलदायी हो जाता है।
इस महीने सावन मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी और शुक्ल पक्ष की श्रावण पुत्रदा एकादशी का पावन संयोग बन रहा है।

आइए जानते हैं 9 अगस्त को पड़ने वाली कामिका एकादशी के बारे में…
कामिका एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण समय
सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरूप की आराधना और जलाभिषेक का विधान है।
- व्रत तिथि: 09 अगस्त 2026 (रविवार)
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 08 अगस्त 2026
- एकादशी तिथि समाप्त: 09 अगस्त 2026
- व्रत पारण का समय: 10 अगस्त 2026 (सोमवार), प्रातः 05:47 बजे से 08:00 बजे तक
कामिका एकादशी की पौराणिक कथा:
प्राचीन काल में एक गांव में अत्यंत क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति रहता था।
एक दिन अज्ञानता और क्रोध के वश में आकर उसका किसी बात पर एक ब्राह्मण से विवाद हो गया और उसने गलती से उस ब्राह्मण की हत्या कर दी।
इस ब्रह्महत्या के पाप से उसका मन आत्मग्लानि और भय से भर गया।
पापमुक्ति का मार्ग खोजने के लिए वह एक ज्ञानी महर्षि की शरण में गया।

महर्षि ने उसे सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का पूरे विधि-विधान से व्रत करने की सलाह दी।
उस व्यक्ति ने सच्चे मन से श्री हरि विष्णु का ध्यान कर कामिका एकादशी का उपवास रखा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।
उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे ब्रह्महत्या के घोर पाप से मुक्त कर दिया।
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
सावन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।
यह व्रत संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष रूप से रखा जाता है।
- व्रत तिथि: 23 अगस्त 2026 (रविवार)
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त 2026, प्रातः 02:00 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त 2026, प्रातः 04:18 बजे तक
- व्रत पारण का समय: 24 अगस्त 2026 (सोमवार), प्रातः 06:00 बजे से 08:30 बजे के बीच

एकादशी व्रत रखने के अद्भुत आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ
* पाप मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति: एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा और दान-पुण्य करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को बैकुंठ लोक में स्थान मिलता है।
* शारीरिक डिटॉक्सिफिकेशन: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महीने में दो बार उपवास रखने से पाचन तंत्र को पूर्ण विश्राम मिलता है।
यह शरीर को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स (विषमुक्त) करता है, जिससे पाचन क्षमता और शारीरिक ऊर्जा में सुधार होता है।
* मानसिक शांति और एकाग्रता: व्रत के दौरान सात्विक आचरण, ध्यान और प्रभु भक्ति से मन शांत होता है।
इससे तनाव दूर होता है, नकारात्मक विचारों का शमन होता है और आत्म-नियंत्रण की शक्ति बढ़ती है।
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