N Chandrasekaran resignation: देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित व्यावसायिक समूहों में से एक, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में एक बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिला है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) से ठीक पहले आया यह फैसला भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए बेहद चौंकाने वाला है।
हालांकि, चंद्रशेखरन तुरंत पद नहीं छोड़ रहे हैं; वे अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करते हुए फरवरी 2027 तक चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे।

यह घटनाक्रम सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे टाटा परिवार से जुड़े टाटा ट्रस्ट्स के अंदरूनी मतभेद, नए बिजनेस प्रोजेक्ट्स पर उठते सवाल और भविष्य की लीडरशिप को लेकर जारी खींचतान मुख्य वजह मानी जा रही है।
आखिर क्यों देना पड़ा इस्तीफा? मतभेद और बोर्ड रूम ड्रामा
एन चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस की कमान संभालने वाले टाटा परिवार के बाहर के पहले पेशेवर मैनेजर थे।
उन्होंने अपने 9 साल के कार्यकाल में समूह को नई बुलंदियों पर पहुंचाया, लेकिन बीते कुछ महीनों से स्थितियां उनके अनुकूल नहीं थीं।
* नोएल टाटा और ट्रस्ट के साथ मतभेद: टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी ‘टाटा ट्रस्ट्स’ की है।
दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स की कमान संभालने वाले नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच नए व्यवसायों में किए जा रहे भारी निवेश और उनके प्रदर्शन को लेकर मतभेद गहरे हो गए थे।

* कार्यकाल के विस्तार पर फंसा पेंच: फरवरी 2024 में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले 5 वर्षों का एक्सटेंशन देने की सिफारिश की थी।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था।
हालांकि, नोएल टाटा ने नए बिजनेस के कमजोर परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए और चंद्रशेखरन को 5 साल के बजाय केवल 2 साल का कार्यकारी कार्यकाल देने की वकालत की।
* बोर्ड की बैठक में एक राय न बन पाना: फरवरी 2026 में जब यह प्रस्ताव टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा गया, तो बोर्ड के एक सदस्य (नोएल टाटा पक्ष) के समर्थन न देने के कारण इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
6 महीने बीत जाने के बाद भी जब इस पर कोई आम सहमति नहीं बनी, तो चंद्रशेखरन ने इस अनिश्चितता को खत्म करने के लिए पद से हटने का फैसला किया।

एन चंद्रशेखरन का बयान: “स्टेकहोल्डर्स के लिए स्पष्टता जरूरी”
अपने फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए एन चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस एक विशाल और ऐतिहासिक संस्थान है, जहां कई बड़े और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी निर्णायक मोड़ पर हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया: “मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। ट्रस्ट्स और बोर्ड की सिफारिशों के बावजूद 24 फरवरी 2026 की बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति न मिलने से फैसला अटक गया। 6 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। ऐसे समय में कर्मचारियों, निवेशकों, अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स और अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि मैंने यह कदम उठाया ताकि भविष्य के नेतृत्व की राह साफ हो सके।”

रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के भीतर बढ़ी खींचतान
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के जाने के बाद टाटा समूह के अंदरूनी मतभेद खुलकर सतह पर आ गए थे।
समूह के अंदर निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगी थी।
कई वरिष्ठ ट्रस्टियों के इस्तीफे और आपसी खींचतान के कारण सीनियर सरकारी अधिकारियों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।
अधिकारियों ने सलाह दी थी कि ट्रस्टियों के आपसी मतभेदों का नुकसान समूह की रोजमर्रा की कंपनियों और व्यापारिक फैसलों पर नहीं पड़ना चाहिए।

चंद्रशेखरन का 9 सालों का रिपोर्ट कार्ड: कैसा रहा प्रदर्शन?
एन चंद्रशेखरन ने जब 2017 में आईटी दिग्गज टीसीएस (TCS) से निकलकर टाटा संस की कमान संभाली थी, तब समूह कई चुनौतियों से जूझ रहा था।
उनके 9 वर्षों के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने न सिर्फ अपनी पारंपरिक कंपनियों को मजबूत किया, बल्कि एयर इंडिया का अधिग्रहण कर एविएशन सेक्टर में वापसी की और सेमीकंडक्टर, ईवी बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे नए ज़माने के बिजनेस में अरबों डॉलर का निवेश किया।

वित्तीय प्रदर्शन के प्रमुख आंकड़े:
* रेवेन्यू (कुल कमाई): वित्त वर्ष 2020 में समूह का राजस्व ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में दोगुने से अधिक बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
* शुद्ध मुनाफा (PAT): इसी अवधि के दौरान समूह का शुद्ध मुनाफा ₹32,000 करोड़ से लगभग 5 गुना बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया।
* मार्केट कैप: टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप FY20 के ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹24.39 लाख करोड़ हो गया (जबकि FY25 में यह ₹27.85 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर भी पहुंचा था)।

शेयर बाजार पर असर: निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल
इस्तीफे की खबर सार्वजनिक होते ही भारतीय शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की प्रमुख लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
* टीसीएस (TCS), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा स्टील (Tata Steel) और टाटा कंज्यूमर (Tata Consumer) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 3% तक टूट गए।
* निवेशकों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि टाटा संस में अचानक नेतृत्व परिवर्तन और टाटा ट्रस्ट्स के साथ जारी खींचतान से समूह की लंबी अवधि की रणनीतियों, जैसे एयर इंडिया के कायाकल्प, सेमीकंडक्टर प्लांट के निर्माण और ईवी बैटरी प्रोजेक्ट्स की गति धीमी हो सकती है।

कैसे चुना जाता है टाटा संस का नया चेयरमैन?
टाटा संस में चेयरमैन के चुनाव की एक तय प्रक्रिया है, जिसमें अंतिम शक्ति टाटा ट्रस्ट्स के पास ही होती है क्योंकि उनके पास कंपनी की 66% हिस्सेदारी है।
नया चेयरमैन चुनने के 4 प्रमुख चरण होते हैं:
* टाटा ट्रस्ट्स की सिफारिश: सबसे पहले टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख सदस्य आपस में बैठकर नए नाम या प्रस्ताव पर अपनी सहमति बनाते हैं।
* बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव: ट्रस्ट्स अपनी पसंद का प्रस्ताव टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास विचार के लिए भेजते हैं।
* परफॉर्मेंस और प्रोफाइल का मूल्यांकन: बोर्ड के सदस्य उम्मीदवार के अनुभव, पिछले रिकॉर्ड और भविष्य के विजन का बारीकी से आकलन करते हैं।
अंतिम निर्णय के 3 रास्ते:
* पहला: मौजूदा चेयरमैन के काम से संतुष्ट होने पर उन्हें 5 साल का नया एक्सटेंशन दे दिया जाए (जो चंद्रशेखरन के मामले में नहीं हो सका)।
* दूसरा: एक विशेष ‘सर्च कमेटी’ का गठन किया जाए, जो वैश्विक स्तर पर योग्य उम्मीदवारों की तलाश करे।
* तीसरा: टाटा ग्रुप की ही किसी प्रमुख कंपनी (जैसे टीसीएस, टाटा मोटर्स या टाटा स्टील) के मौजूदा शीर्ष कार्यकारी को प्रमोट करके टाटा संस का नया चेयरमैन बना दिया जाए।

आगे क्या? समूह के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां
चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 तक बने रहने से समूह को तुरंत नए नेता की तलाश करने का समय तो मिल गया है, लेकिन आने वाला संक्रमण काल आसान नहीं होगा।
टाटा समूह इस समय सेमीकंडक्टर फैब, इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और एयर इंडिया तथा विस्तारा के एकीकरण जैसे भारत के सबसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजरें टाटा ट्रस्ट्स और नोएल टाटा पर टिकी हैं कि वे इस ऐतिहासिक और विशाल व्यावसायिक साम्राज्य की कमान सौंपने के लिए किस नए चेहरे पर भरोसा जताते हैं।
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