EOW Raid Mandla: मध्य प्रदेश के मंडला जिले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
जबलपुर EOW की टीम ने बुधवार सुबह पश्चिम सामान्य वन मंडल में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 लिपिक (फॉरेस्ट क्लर्क) श्वेतांक चौरसिया के राज राजेश्वरी वार्ड स्थित आवास पर अचानक छापा मारा।
इस कार्रवाई के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है।
अनुकंपा नियुक्ति पर आए एक साधारण क्लर्क के पास से मिले अकूत धन और संपत्तियों को देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।

20 साल पहले मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
श्वेतांक चौरसिया को करीब 20 साल पहले वन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
इतने वर्षों की सेवा के दौरान EOW को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जमा करने की गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं।
शुरुआती गोपनीय जांच में जब गड़बड़ी के ठोस सबूत मिले, तो EOW ने मंडला अदालत से बाकायदा सर्च वारंट प्राप्त किया और बुधवार तड़के उनके ठिकाने पर दबिश दे दी।

14 अधिकारियों की टीम और सुरक्षा बल का पहरा
छापेमारी के लिए जबलपुर से EOW की 14 सदस्यीय टीम मंडला पहुंची थी।
इस कार्रवाई का नेतृत्व दो डीएसपी—स्वर्णजीत सिंह धामी और मंजीत सिंह कर रहे थे। टीम में तीन निरीक्षक और तीन हवलदार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
स्थानीय स्तर पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दो राजपत्रित अधिकारियों को गवाह के रूप में शामिल किया गया।
साथ ही, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम और पुलिस बल को क्लर्क के घर के बाहर तैनात कर दिया गया था।

घर से मिलीं लग्जरी गाड़ियां, कैश और जेवरात
तलाशी के दौरान जांच टीम को श्वेतांक चौरसिया के पास से करोड़ों की संपत्ति के सुराग मिले हैं। प्राथमिक जांच में सामने आई मुख्य चीजें इस प्रकार हैं:
* दुकान और मकान: क्लर्क के पास एक आलीशान मकान और करीब 50 लाख रुपए की लागत वाली एक कमर्शियल दुकान का पता चला है।
* नकद और जेवर: घर से लगभग 5 लाख रुपए नगद, 3 से 4 किलोग्राम चांदी और 150 से 200 ग्राम सोने के कीमती आभूषण बरामद हुए हैं।
* चार पहिया वाहन: क्लर्क के पास से तीन फोर-व्हीलर गाड़ियां पाई गई हैं।
* वित्तीय दस्तावेज: 4 बैंक खातों की जानकारी, कई LIC पॉलिसियां, बैंक लॉकर और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के कागजात जब्त किए गए हैं।

50 लाख की दुकान में बड़ा नकद लेनदेन
EOW के अनुसार, श्वेतांक चौरसिया की पूरी नौकरी के दौरान कुल वैधानिक (कानूनी) आय लगभग 55 से 60 लाख रुपए के आसपास आंकी गई है।
हालांकि, हाल ही में खरीदी गई 50 लाख रुपए की दुकान के मामले में जांच एजेंसी को गंभीर गड़बड़ी की आशंका है।
EOW को अंदेशा है कि इस सौदे के लिए करीब 45 से 50 लाख रुपए का भुगतान ब्लैक मनी यानी कैश के रूप में किया गया था।
इसके साथ ही, रजिस्ट्री में संपत्ति का सरकारी मूल्य कम दिखाकर टैक्स चोरी करने की भी जांच की जा रही है।

पत्नी का ब्यूटी पार्लर भी जांच के दायरे में
छापेमारी के दौरान यह बात भी सामने आई कि क्लर्क की पत्नी एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं।
नियमानुसार, किसी भी शासकीय सेवक को अपने या अपने परिवार के इस प्रकार के व्यावसायिक उपक्रमों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होता है।
हालांकि, जांच में पाया गया कि इस ब्यूटी पार्लर की कोई सूचना शासन को नहीं दी गई थी।
तलाशी में पार्लर से जुड़े आयकर रिटर्न (ITR), नगर निगम पंजीयन या MSME रजिस्ट्रेशन के कोई कानूनी दस्तावेज भी नहीं मिले हैं।

कमाई से 400% ज्यादा खर्च का अनुमान
EOW की शुरुआती गोपनीय पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि क्लर्क का कुल खर्च और संपत्ति उनकी घोषित आय से लगभग 290% अधिक थी।
लेकिन बुधवार को हुई छापेमारी में जो दस्तावेज, वाहन और संपत्तियां सामने आई हैं, उनके आधार पर EOW का अनुमान है कि आय और व्यय का यह अंतर बढ़कर 400% तक पहुंच सकता है।
फिलहाल EOW की टीम बैंक खातों, लॉकरों और अन्य बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों का गहराई से मूल्यांकन कर रही है।
लॉकर खुलने और पूरी जांच समाप्त होने के बाद ही क्लर्क की कुल काली कमाई का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।
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