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राखी कब उतारें? 3 दिन, 7 दिन या जन्माष्टमी पर, जानें रक्षासूत्र विसर्जन का सही और आसान तरीका

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rakhi kab aur kaise utare: रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम और एक-दूसरे की परवाह करने का एक खूबसूरत अहसास है।

बहन जब भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती है, तो उस छोटे से धागे में उसकी ढेरों दुआएं, प्यार और भाई की लंबी उम्र की प्रार्थनाएं छिपी होती हैं।

त्योहार की गहमागहमी तो एक दिन में खत्म हो जाती है, लेकिन इसके बाद अक्सर भाइयों के मन में यह सवाल उठता है कि इस पवित्र धागे को कलाई पर कितने दिन तक बांधकर रखना चाहिए? और जब इसे उतारें, तो इसका क्या करें?

ज्यादातर लोग जानकारी न होने के कारण राखी को गलत तरीके से उतार देते हैं या कूड़े में फेंक देते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार बिल्कुल सही नहीं है।

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आइए, जानते हैं कि हमारी परंपराएं इस बारे में क्या कहती हैं।

कलाई पर कितने दिन बांधनी चाहिए राखी?

राखी को कलाई पर कितने दिन तक बांधना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग मान्यताएं हैं।

शास्त्रों के अनुसार, राखी बंधवाने के तुरंत बाद या अगले ही दिन इसे नहीं उतारना चाहिए।

इसे कम से कम तीन दिनों तक कलाई पर जरूर रखना चाहिए।

कई जगह लोग इसे सात दिन तक बांधते हैं, जो बहुत शुभ माना गया है।

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वहीं, उत्तर भारत के कई घरों में यह पुरानी परंपरा है कि रक्षाबंधन के दिन बंधी राखी सीधे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन, कान्हा की पूजा करने के बाद ही खोली जाती है।

आप अपने घर के बुजुर्गों से पूछकर अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन कर सकते हैं।

बस एक बात का खास ख्याल रखें कि जब तक राखी कलाई पर बंधी है, उसकी पवित्रता भंग न हो।

नहाते या हाथ धोते समय कोशिश करें कि धागा गंदा न हो और उस पर साबुन का ज्यादा झाग न लगे।

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राखी उतारने का सही तरीका और सावधानियां

राखी उतारने का भी अपना एक सलीका होता है।

यह कोई साधारण धागा नहीं है जिसे जब चाहा खींचकर तोड़ दिया।

राखी को हमेशा सुबह के समय, स्नान करने के बाद और शांत मन से उतारना चाहिए।

इसे उतारते समय मन में भगवान का शुक्रिया अदा करें कि उन्होंने आपको अपनी बहन की रक्षा करने के काबिल बनाया।

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सबसे जरूरी बात—राखी को कभी भी कैंची से काटकर या झटके से खींचकर न निकालें।

कैंची लगाने से उस धागे से जुड़ी बहन की भावनाओं और धार्मिक महत्व का खंडन होता है।

इसकी गांठ को अपनी उंगलियों से धीरे-धीरे खोलें।

घर पर राखी विसर्जन का ईको-फ्रेंडली तरीका

अब सवाल आता है कि उतारी गई राखी का क्या करें?

कुछ लोग इसे उतारकर अपनी पैंट की जेब में छोड़ देते हैं या फिर घर के किसी कोने में, जहां से वह अंत में कूड़ेदान में चली जाती है।

यह बहुत बड़ा अपशकुन है। सूती, रेशमी या ऊनी राखी का सबसे अच्छा अंत ‘जल विसर्जन’ है।

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उतारी गई राखी को एक साफ थाली में रखें और किसी बहती नदी या साफ तालाब में, थोड़े से ताजे फूलों के साथ प्रवाहित कर दें।

अगर आप किसी ऐसे शहर में रहते हैं जहां नदी या तालाब मिलना मुश्किल है, तो परेशान न हों। इसका एक बेहतरीन ईको-फ्रेंडली तरीका भी है।

अपने घर के किसी गमले या बगीचे की साफ मिट्टी में थोड़ा सा गड्ढा खोदकर राखी को वहां दबा दें।

कुछ ही दिनों में सूती धागा मिट्टी में गलकर उसी में मिल जाएगा।

इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और रक्षासूत्र का पूरा सम्मान भी होगा।

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सोने-चांदी और धातु की राखियों का क्या करें?

आजकल सोने, चांदी या अन्य धातुओं की राखियों का बहुत चलन है। जाहिर है, आप इन्हें पानी में नहीं बहाएंगे।

ऐसी कीमती राखियों को उतारने के बाद एक साफ, लाल या पीले सूती कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या अलमारी में सुरक्षित रख लें।

आप चाहें तो अगले साल इन्हें दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं या सुनार से गलवाकर कोई और आभूषण बनवा सकते हैं।

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अगर कलाई पर बंधी राखी अचानक टूट जाए तो क्या करें?

यह एक ऐसा डर है जो लगभग हर भाई के मन में कभी न कभी आता है।

कई बार हम ऑफिस का काम कर रहे होते हैं, या नहाते समय पानी लगने से धागा कमजोर हो जाता है और राखी अपने आप टूटकर गिर जाती है।

लोग इसे किसी बड़े अपशकुन या खतरे की घंटी मानकर घबरा जाते हैं।

आपको बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। राखी का टूटना कोई बुरी घटना नहीं है।

यह एक भौतिक धागा है, जो पसीने, पानी और रोजमर्रा की रगड़ से कमजोर होकर टूट सकता है।

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ईश्वर पर भरोसा रखें; बहन का प्यार और उसकी दुआएं किसी धागे के टूटने से खत्म नहीं होतीं।

अगर राखी टूट जाए, तो उसे जमीन से आदर के साथ उठाएं, भगवान से प्रार्थना करें और ऊपर बताए गए तरीके से उसे मिट्टी में दबा दें या जल में प्रवाहित कर दें।

पौराणिक कथाएं और रक्षासूत्र की महिमा

शास्त्रों में रक्षासूत्र की महिमा बहुत बड़ी बताई गई है।

कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र को राक्षसों से बचाने के लिए उनकी पत्नी इंद्राणी ने उन्हें रक्षासूत्र बांधा था।

माता लक्ष्मी ने भी राजा बलि की कलाई पर यही पवित्र धागा बांधकर भगवान विष्णु को वापस पाया था।

इसलिए इस धागे को महज एक फैशन का प्रतीक न समझें।

इसे सम्मान से पहनें और जब उतारें, तो पूरे आदर के साथ विदा करें।

सही तरीके से किए गए विसर्जन से न सिर्फ हमारी संस्कृति बची रहती है, बल्कि घर में भी हमेशा सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

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