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450 करोड़ का रानी कमलापति स्टेशन बना ‘बफेलो एक्सप्रेस’ का ठिकाना, प्लेटफॉर्म पर दौड़ती दिखीं भैंसें, उठे गंभीर सवाल

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Buffalo in Rani Kamlapati Station: भोपाल का रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, जिसे देश के सबसे आधुनिक और विश्वस्तरीय (World-Class) रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है, इन दिनों एक अजीबोगरीब घटना के कारण सुर्खियों में है।

लगभग 450 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस स्टेशन पर हाल ही में कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद यात्रियों के साथ-साथ रेलवे प्रशासन के भी होश उड़ा दिए।

स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर अचानक दो भैंसें बड़ी बेफिक्री से टहलती और दौड़ती हुई नज़र आईं।

यह वही प्लेटफॉर्म है जहाँ से देश की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में से एक ‘शताब्दी एक्सप्रेस’ गुज़र रही थी।

जहाँ एक तरफ मुसाफिर अपनी ट्रेन पकड़ने की जल्दी में थे, वहीं दूसरी तरफ ये बेज़ुबान मवेशी आराम से प्लेटफॉर्म का ‘मुआयना’ कर रहे थे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्लेटफॉर्म भ्रमण का वीडियो

इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्लेटफॉर्म पर मुसाफिरों और रेलवे कर्मचारियों की मौजूदगी के बीच दो भैंसें बेझिझक चहलकदमी कर रही हैं।

स्टेशन की चमचमाती टाइल्स पर मवेशियों का इस तरह घूमना लोगों के लिए कौतूहल और हैरानी का सबब बन गया।

इतना ही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज़्यादा शर्मिंदगी वाली बात यह रही कि जाते-जाते इन भैंसों ने प्लेटफॉर्म पर ही गोबर भी कर दिया।

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…

करोड़ों की लागत से बने इस खूबसूरत और साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म पर जगह-जगह गोबर बिखरा हुआ दिखा, जिसने रेलवे की स्वच्छता और सुरक्षा दोनों ही दावों की हवा निकाल दी।

आखिर कैसे हुई इतनी बड़ी सुरक्षा चूक?

इस घटना के सामने आने के बाद अब स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

रानी कमलापति स्टेशन पर मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए करीब 160 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि दो भारी-भरकम भैंसें मुख्य एंट्री गेट्स को पार करके प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुँच गईं और किसी भी सुरक्षाकर्मी की नज़र उन पर समय रहते क्यों नहीं पड़ी?

जब इस मामले में स्टेशन प्रशासन से बात की गई, तो उनका कहना था कि वैसे तो स्टेशन परिसर को चारों तरफ से सुरक्षित और बाउंड्रीवॉल से कवर किया गया है, लेकिन कुछ एंट्री और एग्जिट पॉइंट अभी भी खुले हुए हैं।

प्रारंभिक जाँच के मुताबिक, मवेशी इन्हीं खुले रास्तों से स्टेशन परिसर के अंदर दाखिल हुए होंगे।

हालांकि, इस जवाब के बाद खुले रास्तों की फेंसिंग और निगरानी को लेकर रेलवे के रवैये पर उँगलियाँ उठ रही हैं।

450 करोड़ की लागत और पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (पूर्व में हबीबगंज स्टेशन) को निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत रिडेवलप किया गया है।

* कुल लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट के पुनर्विकास में लगभग 450 करोड़ रुपए तय किए गए थे, जिसमें से करीब 100 करोड़ रुपए मुख्य स्टेशन भवन और यात्री सुविधाओं पर खर्च हुए हैं।

* उद्घाटन: इस हाई-टेक स्टेशन का भव्य उद्घाटन 15 नवंबर 2021 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

इसे मध्यप्रदेश के पहले और देश के सबसे आधुनिक रेलवे स्टेशनों के रूप में पेश किया गया था।

* हाई-टेक सुविधाएं:

स्टेशन पर 84×36 मीटर का वातानुकूलित (AC) एयर-कॉनकर्स, 700 से अधिक यात्रियों के बैठने की क्षमता, 11 एस्केलेटर, 6 लिफ्ट, 3 ट्रैवलैटर, फूड कोर्ट, VIP लाउंज, और वातानुकूलित वेटिंग एरिया जैसी इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

सवालों के घेरे में ‘वर्ल्ड क्लास’ का दावा

अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे जैसी सुविधाएँ देने वाले इस स्टेशन पर जब भैंसों की ‘बफेलो एक्सप्रेस’ बेरोकटोक दौड़ती है, तो यात्रियों का भरोसा डगमगाता है।

क्या सिर्फ करोड़ों रुपए खर्च कर देने और चमचमाती इमारतें बना देने से कोई स्टेशन ‘वर्ल्ड क्लास’ बन जाता है?

असली वर्ल्ड क्लास व्यवस्था तो दुरुस्त रखरखाव, सख्त सुरक्षा और साफ-सफाई से तय होती है।

अब देखना यह होगा कि इस घटना से सबक लेते हुए रेलवे प्रशासन खुले रास्तों को कब तक बंद करता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है।

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