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गरबा में जाना ‘हराम’: भोपाल के मुफ्ती की मुस्लिम युवाओं को नसीहत, कहा- गैर कौम के रीति-रिवाजों से दूर रहें

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Mufti Garba Statement: नवरात्र पर्व की धूम के बीच गरबा आयोजनों में गैर-हिंदू युवाओं की मौजूदगी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

राजधानी भोपाल से आए हालिया बयानों ने इस विषय पर सामाजिक और धार्मिक हलचलों को बढ़ा दिया है।

भोपाल के शहर मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने एक सोशल मीडिया वीडियो जारी कर मुस्लिम समाज के युवाओं से गरबा जैसे आयोजनों से पूरी तरह दूरी बनाने का आह्वान किया है।

उन्होंने इसे इस्लामी मान्यताओं के अनुसार पूरी तरह से अनुचित और ‘हराम’ बताया है।

धार्मिक पहचान और शरीयत का हवाला

मुफ्ती गुफरान खान नदवी ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी मुस्लिम युवक के लिए दूसरी कौम के धार्मिक त्योहारों या रस्मों-रिवाजों में शिरकत करना जायज नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम में किसी अन्य धर्म या समाज के धार्मिक तौर-तरीकों का अनुकरण (मुशाबहत) करने से मना किया गया है।

जो व्यक्ति किसी दूसरी कौम का अनुकरण करता है, वह उन्हीं के तौर-तरीकों में शामिल माना जाता है।

उन्होंने आगे कहा, “आज के दौर में जो गरबा या अन्य धार्मिक रस्में होती हैं, उसमें मुस्लिम लड़कों का शामिल होना पूरी तरह हराम है। यह मामला धर्म के सिद्धांतों से जुड़ा है और इसमें किसी तरह के फितने (विवाद या बहकावे) की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।”

दोस्तों के साथ जाने से भी परहेज करने की सलाह

अक्सर देखा जाता है कि कई युवा अपने हिंदू दोस्तों या परिचितों के आमंत्रण पर गरबा पंडालों में चले जाते हैं।

इस पर मुफ्ती नदवी ने कहा कि भले ही दोस्त साथ ले जाने की बात करें, लेकिन युवाओं को खुद समझदारी दिखाते हुए जाने से बचना चाहिए।

उन्होंने मुस्लिम युवाओं को अपनी धार्मिक जड़ों से जुड़ने की सलाह दी और कहा कि इस्लाम का दीन इतना पाकीजा और खूबसूरत है कि मुस्लिम समाज के लोगों को किसी दूसरे धर्म के आयोजनों की तरफ आकर्षित होने की कोई जरूरत ही नहीं है।

मस्जिद के गेट और धार्मिक सवालों पर कही बात

अपने बयान में मुफ्ती नदवी ने सामाजिक परिस्थितियों और मस्जिदों के इर्द-गिर्द हो रही हलचलों पर भी अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि जो लोग पहले मस्जिदों के पास भी नहीं आते थे, वे अब मस्जिद के गेट तक पहुंच रहे हैं।

उनके मुताबिक यह संकेत है कि लोग मुस्लिम समाज की नमाज और परंपराओं के प्रति उत्सुक हो रहे हैं और सवाल कर रहे हैं।

इसी क्रम में उन्होंने कहा, “अगर कोई मस्जिद के गेट तक आ गया है, तो इंशाल्लाह वह आगे चलकर वजू और गुसल करके मस्जिद के अंदर भी आ जाएगा और अल्लाह उससे नमाज भी पढ़वा देगा।”

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी की भी यही अपील

मुफ्ती के बयान से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने भी मुस्लिम समुदाय से नवरात्र आयोजनों से दूरी बनाए रखने की अपील की थी।

कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माइल खान ने स्पष्ट किया कि यह अपील किसी धर्म या त्योहार के विरोध में नहीं है।

हाल के दिनों में कई स्थानों पर गरबा पंडालों में पहचान पत्र (ID Card) चेक करने और मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी पर आपत्तियों के मामले सामने आए हैं।

कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

कंटेस्ट और विवाद से बचने के उद्देश्य से त्योहार कमेटी ने जिला, संभाग और प्रदेश स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि वे स्थानीय उलेमाओं, सामाजिक संगठनों और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को समझाएंगे ताकि आपसी भाईचारा, शांति और सौहार्द बना रहे।

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