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IPS अफसरों को अब हर साल करनी होगी पढ़ाई: AI और साइबर क्राइम के मिलेंगे टिप्स, प्रमोशन पर भी पड़ेगा असर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

IPS Cyber Security Training: आज के दौर में अपराध का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। साइबर ठगी, फेक ऑडियो-वीडियो, डीपफेक और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

अब अपराधी सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में बैठकर लोगों को चूना लगा रहे हैं।

ऐसे में पुलिस प्रशासन को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है।

अब भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों को हर साल नई तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा से जुड़े कोर्स करने होंगे।

यदि कोई अधिकारी यह ट्रेनिंग पूरी नहीं करता है, तो इसका सीधा असर उसकी सालाना परफॉर्मेंस रिपोर्ट (APAR) और आने वाले प्रमोशन पर पड़ेगा।

ट्रेनिंग का ढांचा: 24 कोर्स तय, 3 करने होंगे अनिवार्य

सरकार ने आईपीएस अफसरों के लिए कुल 24 विशेष कोर्स तैयार किए हैं। इन कोर्सों को अधिकारियों की सर्विस (अनुभव) के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

प्रत्येक वर्ग के अफसरों के लिए छह-छह कोर्स तय किए गए हैं, जिनमें से कम से कम तीन कोर्स हर हाल में पूरा करना अनिवार्य होगा।

यह पूरी पढ़ाई केंद्र सरकार के डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म ‘iGOT कर्मयोगी’ (iGOT Karmayogi) पर उपलब्ध होगी।

अफसर अपने काम के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से इन कोर्सों को पूरा कर सकेंगे।

अनुभव के आधार पर तय किए गए कोर्स

1. 9 साल तक की नौकरी वाले युवा अफसर:

जिन अधिकारियों की सेवा को अभी 9 साल या उससे कम समय हुआ है, उन्हें डिजिटल दुनिया की बुनियादी बातें और साइबर सुरक्षा के खतरों के बारे में पढ़ाया जाएगा।

इसके अलावा, जांच के दौरान तलाशी लेने और सबूतों या सामान को कानूनी तरीके से जब्त (Search & Seizure) करने की प्रक्रियाओं को तकनीकी रूप से कैसे मजबूत बनाया जाए, इसकी जानकारी दी जाएगी।

2. 9 से 16 साल के अनुभव वाले अधिकारी:

इस वर्ग के अधिकारियों को आधुनिक क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इनमें ICJS (Interoperable Criminal Justice System) मुख्य रूप से शामिल है।

आसान शब्दों में कहें तो ICJS एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए पुलिस, अदालत, जेल और फॉरेंसिक लैब आपस में जुड़ी होती हैं।

इससे किसी भी केस से जुड़ी फाइलें और जानकारियां एक विभाग से दूसरे विभाग तक तुरंत पहुंच जाती हैं।

अफसरों को सिखाया जाएगा कि इस सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल कर मामलों को जल्द से जल्द कैसे सुलझाया जाए।

3. 16 से 25 साल के तजुर्बेकार अफसर:

इस श्रेणी के वरिष्ठ अधिकारियों को Artificial Intelligence (AI) और ChatGPT जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स को इस्तेमाल करने का तरीका सिखाया जाएगा।

इसके साथ ही, उन्हें साइबर क्राइम की जांच, डेटा आधारित फैसले लेने और अपनी बात को प्रभावकारी तरीके से रखने की कला (Art of Storytelling) की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे जनसंचार और प्रशासनिक प्रस्तुतियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

4. 25 साल से अधिक सेवा वाले सबसे वरिष्ठ अफसर:

25 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अधिकारियों के लिए भी कोर्स अनिवार्य किए गए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए नई टेक्नोलॉजी और लीडरशिप के साथ-साथ इंटीग्रेटिव वेलनेस (Integrative Wellness) का कोर्स भी रखा गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य लगातार तनाव में काम करने वाले अफसरों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना है, ताकि वे अपनी सेहत और पुलिसिंग के काम के बीच संतुलन बना सकें।

फरार अपराधियों की संपत्ति पर कसता शिकंजा

इसी पहल के तहत पुलिस को वित्तीय जांच में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

अब भगोड़े और फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ उनकी संपत्तियों की भी गहन जांच की जाएगी।

बैंक खातों में जमा पैसों से लेकर जमीन-जायदाद तक की पूरी कड़ियों को खंगाला जाएगा।

तकनीकी समझ होने से पुलिस अफसर ऑनलाइन लेन-देन और बेनामी संपत्तियों का पता आसानी से लगा सकेंगे।

पुलिस अफसरों को AI और साइबर पढ़ाई की जरूरत क्यों पड़ी?

आज के दौर में साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं।

एआई (AI) की मदद से किसी की भी आवाज बदलना (Voice Cloning), चेहरे का गलत इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो बनाना और बैंकों के नाम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी करना आम हो गया है।

डिजिटल सबूतों (Digital Evidence) को इकट्ठा करना, उन्हें कानूनी रूप से सुरक्षित रखना और कोर्ट में पेश करना बिना तकनीकी ज्ञान के संभव नहीं है।

इसीलिए सरकार चाहती है कि हमारे आईपीएस अधिकारी सिर्फ पुरानी पारंपरिक पुलिसिंग पर निर्भर न रहें, बल्कि वे हाईटेक अपराधियों से दो कदम आगे सोचें और काम करें।

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