100% ethanol fuel govt approval: केंद्र सरकार ने देश में 100% एथेनॉल यानी E100 फ्यूल के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है।
इसके लिए सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन करते हुए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।
यह बड़ा फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां बाजार में अपनी फ्लेक्स-फ्यूल और E100 गाड़ियां लॉन्च करने की तैयारी में हैं।

आइए, इस पूरे फैसले, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और आम वाहन चालकों पर इसके असर को आसान भाषा में समझते हैं।
1. E100 फ्यूल क्या होता है और यह कैसे बनता है?
E100 का मतलब 100% शुद्ध एथेनॉल होता है। यह एक प्रकार का बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और अन्य बायोलॉजिकल स्रोतों से तैयार किया जाता है।
खास बात यह है कि इसमें पेट्रोल की कोई मिलावट नहीं होती। यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल तैयार किया जाने वाला ईंधन है।
2. क्या मौजूदा कार मालिक अपनी गाड़ी में E100 या E85 फ्यूल डलवा सकते हैं?
बिल्कुल नहीं! सरकार और जानकारों ने साफ कर दिया है कि जो गाड़ियां वर्तमान में सामान्य पेट्रोल या E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) पर चलती हैं, वे E85 या E100 पर नहीं चल सकतीं।
ऐसा करने से इंजन खराब हो सकता है। E85 और E100 जैसे हाई-एथेनॉल फ्यूल का इस्तेमाल केवल उन्हीं गाड़ियों में किया जा सकता है, जो इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन और सर्टिफाइड की गई हों।

3. क्या पुरानी पेट्रोल गाड़ियां बंद हो जाएंगी या नियम अनिवार्य है?
आम वाहन चालकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मौजूदा कार मालिकों पर इस नियम का कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्हें अपनी गाड़ियों में किसी भी तरह का बदलाव (मॉडिफिकेशन) कराने की जरूरत नहीं है।
सामान्य पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां बाजार में पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी और चलती रहेंगी।
यह नया नियम और फ्यूल पूरी तरह से एक वैकल्पिक व्यवस्था (Alternative Arrangement) के रूप में लाया गया है।
4. क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और यह कैसे काम करती है?
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस गाड़ियों में एक ही फ्यूल टैंक होता है, लेकिन उनका इंजन इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह पेट्रोल और एथेनॉल के किसी भी मिश्रण (जैसे E85 से लेकर E100 तक) को आसानी से पचा सके।
यानी ड्राइवर चाहें तो पेट्रोल डलवाएं या शुद्ध एथेनॉल, इंजन बिना किसी रुकावट के काम करेगा।

5. E100 गाड़ियां कौन खरीद और चला सकेगा?
इस तरह की नई गाड़ियां केवल वही लोग चला सकेंगे जो कार निर्माता कंपनियों (OEMs) द्वारा विशेष रूप से इस तकनीक के लिए तैयार की गई नई गाड़ियां खरीदेंगे।
बाजार में इन गाड़ियों के आते ही ग्राहकों के पास एक नया और ग्रीन विकल्प होगा।
6. देश को इस फैसले से क्या-क्या बड़े फायदे होंगे?
सरकार के इस कदम के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं:
* प्रदूषण में भारी कमी: पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल का कार्बन फुटप्रिंट काफी कम होता है।
इसके उपयोग से गाड़ियों के धुएं से निकलने वाली खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन गैसों में भारी कमी आएगी, जिससे हवा साफ होगी।
* विदेशी मुद्रा की बचत: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) विदेशों से आयात करता है, जिस पर अरबों रुपये खर्च होते हैं।
देश में बने एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से विदेशों से तेल आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी और देश का पैसा बचेगा।

7. दुनिया के दूसरे देशों में क्या हाल है?
भारत से पहले ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है।
वहां यह तकनीक काफी लोकप्रिय है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है।
अब भारत भी इस दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा रहा है।
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