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मराठी भाषा विवाद: संजय दत्त बोले- ‘6 साल जेल में रहा, फिर भी नहीं सीख पाया’, बयान पर शुरू हुई राजनीति

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sanjay Dutt Marathi Controversy: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ती रहती है।

इसी बीच बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त के एक बयान ने फिर से इस मुद्दे को हवा दे दी है।

मुंबई के ठाणे में आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम के दौरान जब राज्य के मंत्री ने संजय दत्त से मराठी में बोलने का आग्रह किया, तो एक्टर ने बड़े ही मजाकिया और बेबाक अंदाज में मराठी बोलने से मना कर दिया।

अब संजय दत्त का यह बयान और उस पर मंच पर मौजूद नेताओं का रिएक्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इसके साथ ही इस पूरे वाकये पर राज्य की राजनीति भी गरमाने लगी है।

क्या है पूरा वाकया?

यह पूरा मामला ठाणे का है, जहां शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दही हांडी कार्यक्रम का आयोजन किया था।

इस खास मौके पर संजय दत्त बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।

जब संजय दत्त मंच पर आए और हिंदी में लोगों को संबोधित करने लगे, तो मंत्री प्रताप सरनाईक ने माइक संभालते हुए मुस्कुराकर कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बोलते हैं, लेकिन हम सब मराठी अच्छे से समझते हैं।”

मंत्री की इस बात पर मंच पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। इसके बाद संजय दत्त ने माइक हाथ में लिया और सबसे पहले पूरे जोश के साथ “हर हर महादेव” का नारा लगाया।

इसके फौरन बाद संजय हंसते हुए बोले, “प्रताप भाई, मैं 6 साल येरवडा जेल में रहा, लेकिन तब भी मराठी नहीं सीख पाया। हां, थोड़ी-बहुत सीख ली थी।”

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें...

 

BJP विधायक का निशाना: ‘सिर्फ आम ड्राइवरों पर ही दबाव क्यों?’

संजय दत्त के इस बयान और उस पर नेताओं के हंसने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।

नरेंद्र मेहता ने कहा कि जब कोई बड़ा सेलिब्रिटी या कलाकार मराठी बोलने से साफ मना कर देता है, तो नेता मंच पर ठहाके लगाते हैं।

लेकिन दूसरी तरफ शहर के गरीब और आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा बोलने का दबाव बनाया जाता है और उन पर भारी जुर्माने लगाए जाते हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसा न्याय है? नियम क्या केवल आम जनता के लिए हैं और बड़े सेलिब्रिटीज के लिए कोई कानून नहीं है?

इवेंट से निकलते समय धक्का-मुक्की, संजय दत्त ने शख्स का हाथ पकड़ा

कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब संजय दत्त अपनी सुरक्षा टीम के साथ मंच से नीचे उतर रहे थे, तब वहां एक और घटना घटी।

भीड़ में से एक शख्स तेजी से आया और संजय दत्त को जोर से धक्का देते हुए निकलने लगा।

संजय दत्त ने इस अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया। उन्होंने तुरंत उस शख्स का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया।

जैसे ही उस शख्स ने देखा कि उसने बॉलीवुड के ‘संजू बाबा’ को धक्का मार दिया है, उसके हाथ-पांव फूल गए और उसने तुरंत हाथ जोड़कर माफी मांग ली।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

संजय दत्त का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं:

  1.  VIP कल्चर पर सवाल: कई यूजर्स का कहना है कि भाषा का नियम सिर्फ आम ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए सख्ती से लागू होता है, जबकि बड़े स्टार्स इससे आसानी से बच निकलते हैं।
  2. संजय दत्त की ट्रोलिंग: कुछ मराठी भाषी लोगों ने संजय दत्त को ट्रोल करते हुए लिखा कि पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहने और यहीं से नाम-शोहरत कमाने के बावजूद मराठी न सीख पाना बेहद दुखद है।
  • स्टारडम का दबदबा: वहीं कुछ फैंस ने कहा कि सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान जैसे स्टार्स ही किसी मंत्री को मंच पर इस तरह हंसते-हंसते मना करने का जिगरा रखते हैं।

संजय दत्त के पुराने बयान, जिन पर मच चुका है बवाल

यह पहली बार नहीं है जब संजय दत्त अपने किसी बयान या डायलॉग की वजह से चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे कई मौकों पर विवादों से घिर चुके हैं:

* 2009 का सांप्रदायिक बयान: लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी का प्रचार करते हुए मऊ (यूपी) की एक रैली में उन्होंने कहा था कि उनकी मां (नरगिस) मुस्लिम थीं, इसलिए 1993 धमाकों के बाद उनके परिवार को निशाना बनाया गया। इस पर चुनाव आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया था।

* 2016 में सलमान खान को कहा ‘घमंडी’: एक इवेंट के दौरान जब उनसे सलमान खान के लिए एक शब्द चुनने को कहा गया, तो उन्होंने ‘एरोगेंट’ (घमंडी) कह दिया था, जिसके बाद दोनों की दोस्ती में दरार की खबरें उड़ी थीं।

* ‘धुरंधर’ फिल्म का डायलॉग विवाद: हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ में उनके किरदार एसपी चौधरी असलम के एक संवाद (“मगरमच्छ पर भरोसा कर सकते हैं, बलोच पर नहीं”) को लेकर बलोच समुदाय ने भारी आपत्ति जताई थी।

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मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद मेकर्स को थिएटर्स में उस डायलॉग को म्यूट करना पड़ा था।

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