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मथुरा की लठमार होली से इंदौर की गेर तक, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाते हैं होली?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Holi Celebrations India: भारत में त्योहार सिर्फ कैलेंडर की तारीखें नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका हैं।

4 मार्च 2026 को पूरा देश रंगों के महापर्व ‘होली’ के स्वागत के लिए तैयार है।

यह एक ऐसा मौका है जब ऊंच-नीच और बैर-भाव मिटकर सिर्फ गुलाल का रंग बाकी रह जाता है।

उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, होली मनाने का तरीका जितना अलग है, उसकी भावना उतनी ही एक है।

आइए, भारत के इस सतरंगी सफर पर चलते हैं।

Holi Celebrations India

ब्रज की गलियों में प्रेम की लाठियां

होली का जिक्र हो और मथुरा-वृंदावन की बात न हो, ऐसा मुमकिन नहीं।

यहां की ‘लठमार होली’ पूरी दुनिया में मशहूर है।

बरसाना और नंदगांव की महिलाएं जब पुरुषों पर प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं, तो नज़ारा देखने लायक होता है।

वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है, जहाँ ऐसा लगता है मानो आसमान से खुशबू की बारिश हो रही हो।

वाराणसी: मसान की राख और गंगा का घाट

बनारस की होली में आध्यात्मिकता और जोश का अद्भुत मेल है।

गंगा के घाटों पर सुबह से ही हुड़दंग शुरू हो जाता है।

यहां की सबसे अनोखी परंपरा ‘मसान की होली’ है, जहां भक्त चिता की भस्म से होली खेलते हैं।

शाम को गंगा आरती के साथ जब पूरा घाट अबीर-गुलाल से सराबोर होता है, तो वह दृश्य अलौकिक लगता है।

मध्य प्रदेश: इंदौर की ‘गेर’ का जलवा

एमपी, खासकर इंदौर में होली का असली रंग ‘रंग पंचमी’ को चढ़ता है।

यहां की ‘गेर’ (होली का जुलूस) देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

बड़े-बड़े टैंकर्स और मिसाइलों से जब हवा में रंगों की बौछार की जाती है, तो पूरी सड़क रंगीन दरिया बन जाती है।

मालवा के लोक गीत और पकवानों की खुशबू माहौल को और भी खुशनुमा बना देती है।

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राजस्थान: रजवाड़ों की शाही होली

राजस्थान में होली आज भी राजसी वैभव के साथ मनाई जाती है।

जयपुर और उदयपुर में हाथियों, ऊंटों और घोड़ों का जुलूस निकलता है।

यहां ‘चंग’ की थाप पर लोक कलाकार झूमते हैं।

अगर आप यहां हैं, तो पारंपरिक ‘घेवर’ का स्वाद चखना न भूलें।

आतिशबाजी और लोक नृत्यों के साथ यहाँ की होली किसी रॉयल फेस्टिवल जैसी लगती है।

बंगाल की ‘डोल जात्रा’  

पश्चिम बंगाल में इसे ‘डोल पूर्णिमा’ या ‘बसंत उत्सव’ कहते हैं।

शांतिनिकेतन में रवींद्र संगीत पर थिरकते छात्र और पीले कपड़ों में सजे लोग संस्कृति का परिचय देते हैं।

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छत्तीसगढ़ का ‘फाग’

छत्तीसगढ़ में ‘फाग’ का जादू चलता है।

नगाड़ों की थाप पर डंडा नृत्य और घर-घर में बनने वाले ‘चीला’ और ‘फरा’ आपसी भाईचारे को बढ़ाते हैं।

महाराष्ट्र और गोवा: मटकी फोड़ और शिमगो

महाराष्ट्र में ‘मटकी फोड़’ की गूंज और पूरण पोली का स्वाद होली को खास बनाता है।

वहीं गोवा में इसे ‘शिमगो’ के रूप में मनाया जाता है।

यहाँ सड़कों पर भव्य झांकियां निकलती हैं और लोग पारंपरिक संगीत के साथ झूमते हैं।

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