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अधिक मास खत्म-19 जून से गूंजेगी शहनाई, सिर्फ 36 दिन होंगे शुभ कार्य

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Jyeshtha Month Vivah Muhurat: हिंदू कैलेंडर के हिसाब से साल 2026 का ज्येष्ठ का महीना बेहद खास और बड़ा बदलाव लेकर आया।

इस बार ज्योतिषीय गणना के कारण एक नहीं, बल्कि दो ज्येष्ठ महीने पड़ रहे हैं, जिससे यह पूरा समय 59 दिनों का हो गया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें तीन साल में एक बार आने वाला ‘अधिक मास’ (जिसे हम पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) शामिल था।

अब यह अधिक मास खत्म हो चुका है और इसके जाते ही हर तरफ शुभ और मांगलिक कार्यों की धूम मचने वाली है।

जहां एक तरफ लोगों को पूजा-पाठ, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का फल मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से शादियों और मुंडन जैसे शुभ कामों पर लगा ब्रेक भी हट जाएगा।

आइए जानते हैं कि इस महीने क्या-क्या बड़े बदलाव होने जा रहे हैं और आपके पास शुभ काम करने के लिए कितना समय है।

खत्म हुआ अधिक मास, अब ‘शुद्ध ज्येष्ठ’ की शुरुआत

भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित अधिक मास अब विदा हो चुका है।

इस साल अधिक मास की शुरुआत 17 मई को हुई थी, जिसका समापन 15 जून को सोमवती अमावस्या के साथ हुआ।

सोमवार के दिन अमावस्या होने के कारण इस दिन पवित्र नदियों में नहाने और दान करने का बहुत बड़ा महत्व रहा। साथ ही पितरों की शांति के लिए भी यह दिन उत्तम माना गया।

अधिक मास के खत्म होते ही अगले दिन यानी मंगलवार, 16 जून से ‘शुद्ध ज्येष्ठ मास’ की शुरुआत हो चुकी है।

ज्योतिषियों और विद्वानों के अनुसार, शुद्ध मास ही असली चंद्र मास होता है, जो सूर्य की चाल पर तय होता है।

त्योहारों की लगेगी झड़ी

इस शुद्ध ज्येष्ठ महीने में कई बड़े और मुख्य व्रत-त्योहार आने वाले हैं।

15 जून को सोमवती अमावस्या के बाद 17 जून को रंभा तृतीया का व्रत रखा गया।

इसके बाद 18 जून को विनायकी चतुर्थी और 23 जून को महेश नवमी का त्योहार मनाया जाएगा।

वहीं, 25 जून को एकादशी और 29 जून को पूर्णिमा होगी।

इस बार 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग भी सोमवार के दिन ही पड़ रहा है।

इसका मतलब यह है कि श्रद्धालुओं को 15 दिनों के अंदर दो बार सोमवार के दिन पवित्र स्नान करने का महापुण्य मिलेगा।

19 जून से शुरू होंगे विवाह और मांगलिक कार्य

अगर आप भी घर में शादी, मुंडन या कोई नया काम शुरू करने का इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए अच्छी खबर है।

अधिक मास के कारण पिछले कई दिनों से शादियों पर जो रोक लगी थी, वह अब 19 जून से हट रही है।

19 जून से देश भर में फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी।

इस दौरान आप शादी-ब्याह के अलावा बच्चों का मुंडन और उपनयन (जनेऊ) संस्कार भी करा सकेंगे।

साथ ही नए घर में कदम रखने (गृह प्रवेश), बच्चे के नामकरण और नया बिजनेस शुरू करने के लिए भी यह समय ज्योतिष के नजरिए से बेहद शुभ माना जा रहा है।

जल्दी कीजिए! 12 जुलाई तक ही है समय

अगर आप शादी या गृह प्रवेश की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको थोड़ी जल्दी करनी होगी।

विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त केवल 12 जुलाई 2026 तक ही उपलब्ध हैं।

इसके बाद 25 जुलाई से ‘चातुर्मास’ शुरू हो जाएगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास लगते ही भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके कारण अगले चार महीनों तक शादियों और सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है।

इसलिए, शुभ कामों के लिए आपके पास 19 जून से 12 जुलाई के बीच का ही सीमित समय है।

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