Amarnath Baba Barfani Melted: अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले शिव भक्तों के लिए एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है।
पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग अब पूरी तरह से पिघल चुका है।
मंगलवार, 7 जुलाई को सामने आई ताजा तस्वीरों ने इस बात की पुष्टि कर दी है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल की अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी महज 5 दिन ही बीते हैं और करीब 3 लाख से ज्यादा भक्तों को अभी बाबा के दर्शन करने बाकी हैं।

मई के महीने में जो शिवलिंग लगभग 7 फीट ऊंचा था, वह अब 100% पिघल चुका है।
हालांकि, प्रशासन की तरफ से साफ किया गया है कि शिवलिंग पिघलने के बावजूद अमरनाथ यात्रा पर कोई रोक नहीं लगेगी और यह पहले की तरह ही जारी रहेगी।
आपको बता दें कि यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और कुल 57 दिनों तक चलकर 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी।
महज कुछ दिनों में कैसे बदला शिवलिंग का आकार?
हर साल की तरह इस बार भी बाबा बर्फानी का आकार बहुत तेजी से बदला है।

अगर हम पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बदलाव कुछ इस तरह रहा:
- तारीख: शिवलिंग की अनुमानित ऊंचाई – स्थिति
- 23 मई : लगभग 7 फीट – बेहद मजबूत और भव्य आकार में
- 29 जून : 5 फीट से ज्यादा – पहली पूजा के दिन तक आकार सुरक्षित था
- 6 जुलाई: करीब 1 फीट- तापमान और भीड़ की वजह से 90% पिघल गया

7 जुलाई: 0 फीट (पूरी तरह पिघला) बाबा बर्फानी पूरी तरह अंतर्ध्यान हो गए
भक्तों का उमड़ा सैलाब, प्रशासन ने जारी की नई एडवाइजरी
भले ही बाबा बर्फानी पिघल गए हों, लेकिन भक्तों के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
पिछले तीन दिनों में ही 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं।
यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2025 के मुकाबले करीब 18.6% ज्यादा है, जब शुरुआती तीन दिनों में 47,972 लोग पहुंचे थे।
इस साल अब तक 4 लाख से ज्यादा लोग यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
बढ़ती भीड़ को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक जरूरी सलाह (एडवाइजरी) जारी की है।

गुरुवार, 9 जुलाई तक के सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह फुल हो चुके हैं।
प्रशासन ने साफ कहा है कि जो लोग बिना रजिस्ट्रेशन के जम्मू या कश्मीर पहुंच रहे हैं, वे कुछ दिनों के लिए अपनी यात्रा टाल दें।
बालटाल और पहलगाम दोनों ही रूटों पर बिना रजिस्ट्रेशन वाले यात्रियों को आगे नहीं जाने दिया जाएगा।
उन्हें चेक पॉइंट्स पर ही रोक दिया जाएगा और 9 जुलाई के बाद ही हालात देखकर आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी।
रविवार से सिर्फ उन्हीं यात्रियों को कश्मीर की तरफ जाने दिया जाएगा जिनके पास वैलिड रजिस्ट्रेशन होगा।

आखिर कैसे बनता है यह अद्भुत हिम शिवलिंग?
यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे ‘आइस स्टैलेग्माइट’ कहा जाता है।
गुफा की छत से पानी की बूंदें धीरे-धीरे नीचे टपकती हैं और वहां के बेहद कम तापमान के कारण जमकर शिवलिंग का आकार ले लेती हैं।
हर साल इस शिवलिंग की ऊंचाई और मजबूती वहां के मौसम, ग्लोबल वार्मिंग, तापमान और गुफा के अंदर पहुंचने वाले लोगों की सांसों से पैदा होने वाली गर्मी पर निर्भर करती है।

यही वजह है कि इस बार तापमान में उतार-चढ़ाव और शुरुआती दिनों में उमड़ी भारी भीड़ के कारण बाबा बर्फानी समय से पहले ही अंतर्ध्यान हो गए हैं।
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