Cyber fraud Ram Mandir case: आज के डिजिटल दौर में जहां एक तरफ हमारी जिंदगी आसान हुई है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधियों के हौसले भी बुलंद होते जा रहे हैं।
ये ठग लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए रोज नए-नए बहाने और हथकंडे खोज निकालते हैं।
इस बार इन अपराधियों ने देशभर में चर्चित रहे ‘अयोध्या राम मंदिर चोरी मामले’ को अपना नया हथियार बनाया है।
इस संवेदनशील और बड़े मामले का नाम लेकर अब मासूम लोगों को शिकार बनाने की कोशिश की जा रही है।

आइए जानते है कि यह पूरा मामला क्या है और आप इससे कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।
इंदौर में सामने आए मामले, अलर्ट पर साइबर सेल
मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई कहे जाने वाले शहर इंदौर से हाल ही में कुछ बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।
यहाँ कई नागरिकों को ऐसे फर्जी फोन कॉल्स और वीडियो कॉल्स आए हैं, जिनमें उन्हें राम मंदिर चोरी मामले से जोड़ने की धमकी दी गई है।
ठग फोन करके पीड़ित को बताते हैं कि उनके मोबाइल नंबर या पहचान पत्र का इस्तेमाल इस हाई-प्रोफाइल चोरी की घटना या उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करना) में हुआ है।

राहत की बात यह है कि इंदौर पुलिस और साइबर सेल की मुस्तैदी के कारण अभी तक शहर में इस नए पैंतरे से किसी के साथ आर्थिक ठगी दर्ज नहीं हुई है।
लेकिन कई लोगों तक ऐसे कॉल पहुंचने की पुष्टि होने के बाद साइबर सेल पूरी तरह सतर्क हो गया है और जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है।
समझिए कैसे बुना जाता है ठगी का जाल
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग हमेशा समाज में चल रही किसी बड़ी या चर्चित घटना का फायदा उठाते हैं ताकि लोग आसानी से डर जाएं।
इससे पहले भी ड्रग्स पार्सल, कोर्ट के समन, ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये ऐठे जा चुके हैं।
अब इसी कड़ी में राम मंदिर मामले का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ठगों का काम करने का तरीका कुछ इस तरह होता है:
*फर्जी पहचान और वर्दी: सबसे पहले ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या साइबर सेल का बड़ा अधिकारी बताकर फोन करते हैं।
अपनी बात को सच साबित करने के लिए वे स्काइप বা व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करते हैं, जहाँ वे फर्जी पुलिस स्टेशन का सेटअप, नकली आईडी कार्ड और पुलिस की वर्दी पहनकर बैठते हैं।
*डर का माहौल बनाना: इसके बाद वे पीड़ित से कहते हैं कि आपके बैंक खाते या पहचान पत्र [Aadhaar Redacted] का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों या मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
*पैसे ऐंठना: जब पीड़ित बुरी तरह डर जाता है, तो ठग ‘केस रफा-दफा’ करने या ‘बैंक खाते की जांच’ के नाम पर एक सीक्रेट अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
वे कहते हैं कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस मिल जाएंगे, जो कि सरासर झूठ होता है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ का पूरा सच
इस पूरे खेल में ठग जिस सबसे बड़े हथियार का इस्तेमाल करते हैं, उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।
वे पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर रहने और कमरे से बाहर न निकलने की धमकी देते हैं।
साइबर सेल ने इस भ्रम को पूरी तरह साफ करते हुए कहा है कि भारत के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था या प्रक्रिया ही नहीं है।
देश की कोई भी कानूनी या जांच एजेंसी (जैसे पुलिस, सीबीआई या ईडी) कभी भी किसी अपराधी या संदिग्ध को फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार या नजरबंद नहीं करती।
न ही कानूनन फोन पर किसी से पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल (जैसे ओटीपी) साझा करने के लिए कहा जाता है।

एक्सपर्ट की राय: सतर्कता ही असली बचाव है
साइबर एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि इस तरह के अपराधों से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और संयम है।
अगर आपके पास भी कोई ऐसा संदिग्ध कॉल आता है, तो घबराएं नहीं।
तुरंत फोन काट दें और स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
याद रखें, आपका डर ही ठगों की सबसे बड़ी ताकत है।
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