Amarnath Baba Barfani size decreases: पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू हुए अभी सिर्फ दो ही दिन हुए हैं, लेकिन बाबा बर्फानी (पवित्र हिमलिंग) के भक्तों के लिए एक चिंता की खबर सामने आ रही है।
गुफा में बनने वाले पवित्र बर्फ के शिवलिंग का आकार बहुत तेजी से छोटा हो रहा है।
पिछले करीब 40 दिनों में बाबा बर्फानी का आकार 7 फीट से घटकर सिर्फ 4 फीट रह गया है।
तस्वीरों में दिखा बदलाव: चौड़ाई भी हुई कम
दरअसल, 23 मई को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने पवित्र गुफा से बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर जारी की थी।
उस समय हिमलिंग का आकार करीब 7 फीट का था और वह काफी भव्य रूप में थे।

इसके बाद, जब 29 जून को यात्रा की शुरुआत से पहले ‘प्रथम पूजा’ की गई, तब भी शिवलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी।
लेकिन अब, 3 जुलाई को जो नई तस्वीर सामने आई है, उसमें बाबा बर्फानी का आकार घटकर लगभग 4 फीट रह गया है और इसकी चौड़ाई भी पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।

आखिर क्यों इतनी जल्दी पिघल रहे हैं बाबा बर्फानी?
कई लोगों के मन में यह सवाल है कि यात्रा शुरू होते ही बर्फ का शिवलिंग इतनी तेजी से क्यों पिघल रहा है?
वैज्ञानिकों और जानकारों के मुताबिक, अमरनाथ गुफा में बनने वाला शिवलिंग कोई ठोस बर्फ का ब्लॉक नहीं होता जिसे तराशा गया हो।
यह एक प्राकृतिक ‘आइस स्टैलेग्माइट’ (Ice Stalagmite) है।
आसान शब्दों में समझें तो गुफा की छत से जो पानी की बूंदें नीचे टपकती हैं, वे वहां के बेहद कम तापमान के कारण जमकर धीरे-धीरे शिवलिंग का रूप ले लेती हैं।

हर साल मौसम, वहां के तापमान और पानी के बहाव के हिसाब से इसका आकार छोटा या बड़ा होता रहता है।
इस बार शिवलिंग के तेजी से पिघलने की मुख्य वजह गुफा के आसपास बढ़ती मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियां हैं।
भारी संख्या में लोगों के पहुंचने, सांस लेने और आसपास की गर्मी के कारण गुफा का तापमान बढ़ रहा है।
यही वजह है कि ऊपर से टपकने वाला पानी पहले की तरह जम नहीं पा रहा है और बना हुआ हिमलिंग भी पिघल रहा है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने यात्रियों को दिलाए 5 संकल्प
अमरनाथ यात्रा के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी तीर्थयात्रियों के नाम एक विशेष पत्र जारी किया है।
इस पत्र में उन्होंने इस यात्रा को एक महान सौभाग्य बताते हुए यात्रियों से 5 संकल्प लेने की अपील की है:
- सफाई का ध्यान: यात्रा के पूरे रास्ते को साफ-सुथरा रखेंगे और वहां की प्राकृतिक सुंदरता को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
- नियमों का पालन: प्रशासन द्वारा दिए गए सभी सुरक्षा निर्देशों और एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करेंगे।
- लोकल को सपोर्ट: ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थानीय दुकानदारों और वहां के प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देंगे।
- पर्यावरण की रक्षा: यात्रा से वापस लौटने के बाद अपने घर या आसपास कम से कम एक पौधा जरूर लगाएंगे।
- भाईचारा: पूरी यात्रा के दौरान देश की एकता, सद्भाव और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देंगे।

प्रशासन सख्त: बिना रजिस्ट्रेशन नो एंट्री
जम्मू प्रशासन ने इस बार नियमों को लेकर काफी सख्ती दिखाई है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन यात्रियों के पास जिस तारीख का रजिस्ट्रेशन है, उन्हें उसी दिन यात्रा की अनुमति मिलेगी।
तारीख से पहले पहुंचने वाले लोगों को एंट्री नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा, बिना रजिस्ट्रेशन के आने वाले यात्रियों को तुरंत कोई सुविधा देना मुमकिन नहीं होगा, इसलिए नियमों का पालन करना जरूरी है।

यात्रा के दो रास्ते: एक लंबा तो दूसरा कठिन
अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं:
- पहलगाम रूट: यह पारंपरिक रास्ता है जो करीब 48 किलोमीटर लंबा है। यह रास्ता थोड़ा लंबा जरूर है, लेकिन इस पर चढ़ाई आसान और सरल है।
- बालटाल रूट: यह गांदरबल जिले से होकर जाता है। यह रास्ता सिर्फ 14 किलोमीटर का है, यानी बहुत छोटा है, लेकिन इसकी चढ़ाई बेहद कठिन और सीधी है।
बता दें कि यह पवित्र यात्रा आगामी 28 अगस्त तक चलेगी।
यात्रा के पहले ही दिन करीब 12 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन कर लिए हैं और भक्तों का उत्साह लगातार बना हुआ है।
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