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अन्नामलाई का धमाका: बीजेपी छोड़ बनाई नई पार्टी, 2031 में तमिलनाडु फतह करने का प्लान!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

K Annamalai New Party: तमिलनाडु की सियासत में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने आखिरकार बीजेपी को अलविदा कह दिया है।

लेकिन कहानी सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं है; अन्नामलाई ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान भी कर दिया है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वे तमिलनाडु में एक नए ‘आंदोलन’ की शुरुआत कर रहे हैं और उनकी यह नई पार्टी साल 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

दिसंबर में ही बना लिया था मन, आलाकमान ने कहा था- ‘रुकिए’

अन्नामलाई का इस्तीफा भले ही शुक्रवार को सबके सामने आया हो, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बहुत पहले ही लिखी जा चुकी थी।

सामने आए पत्र के मुताबिक, अन्नामलाई ने पिछले साल 4 दिसंबर 2025 को ही पार्टी लीडरशिप को बता दिया था कि वे इस्तीफा देना चाहते हैं।

हालांकि, उस समय देश और राज्य के चुनावी माहौल को देखते हुए बीजेपी आलाकमान ने उनसे थोड़ा रुकने का आग्रह किया था।

पार्टी चाहती थी कि पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाए, उसके बाद कोई फैसला लिया जाए।

 

आलाकमान की बात मानकर अन्नामलाई तब तो रुक गए, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए, उन्होंने 2 जून को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

क्यों आई अलग होने की नौबत?

अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे की जो वजह बताई है, वह काफी हैरान करने वाली है। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि पिछले 18 महीनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (टॉप लीडरशिप) के साथ उनके गहरे मतभेद चल रहे थे।

उन्होंने कहा: “मेरे लिए यह चुनना बहुत मुश्किल दौर था कि मैं बीजेपी के साथ बना रहूं या फिर अपने तमिल मूल और तमिल लोगों की भावनाओं से जुड़ा रहूं। तमिलनाडु की राजनीति को आगे ले जाने और उसे बदलने के तरीकों को लेकर मेरे और दिल्ली (आलाकमान) के विचार अब आपस में मेल नहीं खा रहे थे।”

6 साल पहले राजनीति में कदम रखने वाले अन्नामलाई ने यह भी माना कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके और उनके नेतृत्व से बेहद प्रभावित होकर बीजेपी में आए थे।

उनका एकमात्र मकसद तमिलनाडु की पुरानी पड़ चुकी राजनीति को बदलना था।

उन्होंने मौका देने के लिए बीजेपी नेतृत्व का आभार भी जताया।

IPS की नौकरी छोड़, ऐसे बने थे बीजेपी का ‘पोस्टर बॉय’

अन्नामलाई की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी रही है।

वे कर्नाटक कैडर के एक बेहद कड़क और लोकप्रिय IPS अधिकारी थे।

25 अगस्त 2020 को उन्होंने खाकी वर्दी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था।

पार्टी ने भी उनकी काबिलियत को भांपते हुए तुरंत उन्हें तमिलनाडु का उपाध्यक्ष बना दिया।

इसके बाद साल 2021 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी की कमान सौंपी गई और वे प्रदेश अध्यक्ष बने।

अध्यक्ष बनते ही उन्होंने राज्य के कोने-कोने में जाकर बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत किया।

उन्होंने ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी धरती, मेरे लोग) नाम से एक बड़ी पदयात्रा निकाली, जिसने राज्य में काफी सुर्खियां बटोरीं।

हालांकि, चुनावी मोर्चे पर उन्हें असफलता हाथ लगी; वे 2021 का विधानसभा चुनाव (अरवाकुरिची सीट) और 2024 का लोकसभा चुनाव (कोयंबटूर सीट) दोनों हार गए, लेकिन उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ DMK सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठाकर खुद को विपक्ष के सबसे आक्रामक नेता के रूप में स्थापित कर लिया था।

अन्नामलाई के जाने से बीजेपी को क्या होगा नुकसान?

सियासी जानकारों का मानना है कि अन्नामलाई के जाने से तमिलनाडु में बीजेपी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं:

1. युवाओं और शहरी वोटर्स का छिटकना: अन्नामलाई की छवि एक पढ़े-लिखे, आक्रामक और ईमानदार युवा नेता की है। सोशल मीडिया और शहरों के मिडिल क्लास युवाओं में उनकी जबरदस्त दीवानगी है। उनके जाने से बीजेपी युवाओं के इस बड़े वोट बैंक को खो सकती है।

2. चेहरे का संकट: पिछले 4-5 सालों में तमिलनाडु में बीजेपी का मतलब सिर्फ अन्नामलाई ही था। अब उनके जाने के बाद पार्टी के पास फिलहाल ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं दिख रहा है, जिसकी वैसी ही लोकप्रियता हो।

3. विपक्षी वोटों का बंटवारा: अन्नामलाई सत्ताधारी पार्टी DMK के सबसे बड़े विरोधी थे। अब जब वे अपनी अलग पार्टी बना रहे हैं, तो DMK विरोधी वोट बीजेपी और अन्नामलाई के बीच बंट सकते हैं, जिसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को होगा।

बीजेपी के लिए राहत की बात क्या है?

भले ही यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है, लेकिन पार्टी को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।

इसके दो मुख्य कारण हैं:

पीएम मोदी का जादू: तमिलनाडु में बीजेपी का एक बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी पर्सनल ब्रांडिंग और लोकप्रियता के आधार पर वोट करता है, जो अन्नामलाई के जाने के बाद भी सुरक्षित रह सकता है।

गठबंधन की राजनीति: यदि आगामी चुनावों में AIADMK जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी के साथ एनडीए (NDA) गठबंधन में बनी रहती हैं, तो सांगठनिक नुकसान की भरपाई काफी हद तक हो सकती है।

तमिलनाडु का नया चुनावी समीकरण

हालिया चुनाव नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब कुछ नया चाहती है।

इस चुनाव में जहां बीजेपी को सिर्फ 1 सीट से संतोष करना पड़ा, वहीं तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की दो साल पुरानी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने रिकॉर्ड 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।

यह आंकड़ा राज्य की दो पारंपरिक दिग्गज पार्टियों DMK (59 सीटें) और AIADMK (47 सीटें) के कुल जोड़ से भी ज्यादा है।

अब जब सिनेमा के पर्दे से निकलकर विजय ने राजनीति में इतना बड़ा धमाका कर दिया है, तो पूर्व IPS अन्नामलाई भी अपनी नई पार्टी के साथ 2031 के महामुकाबले के लिए जमीन तैयार करने में जुट गए हैं।

देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु की जनता इस ‘सिनेमा बनाम खाकी’ की नई सियासी जंग में किसका साथ देती है।

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