Atithi Vidvan Protest Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वानों (गेस्ट फैकल्टी) का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आने लगा है।
बुधवार सुबह भोपाल में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर धरना दे रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले को अचानक रोक लिया।
काफिला रुकते ही अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह चौहान को घेर लिया और उन्हें अपने पुराने वादे याद दिलाए।
शिक्षकों ने बताया कि किस तरह वे वर्षों से अपनी सेवाओं के स्थायित्व और नियमितीकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बातचीत के दौरान जब कुछ अतिथि विद्वान अपने मोबाइल से इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड करने लगे, तो शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें रोकते हुए कहा, “वीडियो मत बनाओ।”
इसके बाद शिक्षकों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन केंद्रीय मंत्री को सौंपा।
इंदर सिंह परमार ने ‘फॉलन आउट’ प्रक्रिया रोकने से किया इनकार
काफिला रोके जाने से ठीक पहले, बुधवार सुबह उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्थिति को संभालने के लिए अतिथि विद्वानों के चार प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए अपने बंगले के अंदर बुलाया था।
मंत्री ने शिक्षकों की समस्याओं को सुना जरूर, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार फिलहाल ‘फॉलन आउट’ (Fallen Out) प्रक्रिया को बंद नहीं कर सकती।

मंत्री के इस रवैये के बाद अतिथि विद्वानों का आक्रोश और बढ़ गया।
उनका कहना है कि जब तक प्रदेश सरकार उनके नियमितीकरण और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस और स्थाई नीति नहीं बना लेती, तब तक इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।
आखिर क्या है ‘फॉलन आउट’ प्रक्रिया, जिससे डरे हैं अतिथि विद्वान?
सरल शब्दों में समझें तो ‘फॉलन आउट’ वह प्रक्रिया है जिसके तहत सरकारी कॉलेजों में काम कर रहे अतिथि विद्वानों की नौकरी अचानक चली जाती है।
जब किसी कॉलेज में लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से किसी नियमित प्राध्यापक (प्रोफेसर) की नियुक्ति होती है या किसी स्थाई शिक्षक का वहां तबादला (ट्रांसफर) हो जाता है, तो उस पद पर पहले से पढ़ा रहे अतिथि विद्वान को तुरंत हटा दिया जाता है।
इसी प्रक्रिया को ‘फॉलन आउट’ कहा जाता है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सिर पर हमेशा नौकरी जाने की तलवार लटकी रहती है।

2023 से 2026 तक: सिर्फ आश्वासनों का ही मिला सहारा
अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह चौहान और इंदर सिंह परमार को दिए अपने ज्ञापन में past में मिले तमाम शासकीय आश्वासनों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया:
* 11 सितंबर 2023 का वादा: भोपाल में आयोजित अतिथि विद्वान महापंचायत के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद मंच से ऐलान किया था कि किसी भी अतिथि विद्वान को फॉलन आउट नहीं होने दिया जाएगा और उनका भविष्य सुरक्षित किया जाएगा।
* 10 जुलाई 2026 का सम्मेलन: भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में चर्चा हुई थी।
तब सरकार ने भरोसा दिया था कि हरियाणा मॉडल से भी बेहतर और मजबूत नीति बनाकर अतिथि विद्वानों को स्थाई किया जाएगा।
* 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन): प्रदेश भर से आईं अतिथि विद्वान बहनों ने उज्जैन स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर डॉ. मोहन यादव को रक्षासूत्र बांधा था।
तब भी सीएम ने नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का मौखिक आश्वासन दिया था।

अतिथि विद्वानों की दो प्रमुख मांगें
* समय सीमा तय हो: नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व के लिए जो भी नीति बनाई जा रही है, उसे लागू करने की एक निश्चित समयावधि (Deadline) घोषित की जाए।
* फॉलन आउट पर तुरंत रोक: जब तक स्थाई नीति बनकर तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी अतिथि विद्वान को नौकरी से बाहर (फॉलन आउट) न किया जाए।
शिक्षकों का कहना है कि वे सिर्फ रोजगार नहीं मांग रहे, बल्कि अपनी योग्यता, उच्च शिक्षा में दिए गए योगदान और इतने सालों के अनुभव के बदले सम्मानजनक भविष्य की सुरक्षा मांग रहे हैं।
शिवराज का काफिला रोकने की यह पहली घटना नहीं
यह पहली बार नहीं है जब अपनी मांगों को लेकर परेशान जनता या अभ्यर्थियों ने शिवराज सिंह चौहान का रास्ता रोका हो। हाल ही के महीनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं:
* 4 सितंबर 2026: नीलम पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे वर्ग-1 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर शिवराज का काफिला रोका था।
* 5 जुलाई 2026: सांची की बांके बिहारी कॉलोनी के निवासियों ने 8 साल से सड़क, बिजली और पानी न मिलने की शिकायत करते हुए केंद्रीय मंत्री की गाड़ी रोकी थी।
* 21 जून 2026: सीहोर में खाद की किल्लत और सर्वर डाउन होने से परेशान किसानों और कांग्रेस नेताओं ने उनका काफिला रोककर प्रदर्शन किया था।

भोपाल में चल रहा यह धरना प्रदर्शन अब और उग्र रूप ले सकता है, क्योंकि सरकार और मंत्रियों के आश्वासनों के बावजूद अतिथि विद्वान बिना किसी लिखित आदेश और ठोस नीति के हटने को तैयार नहीं हैं।
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