Bargi Cruise Accident: जबलपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बरगी डैम में 30 अप्रैल 2026 की शाम जो भयावह मंजर देखने को मिला, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।
एक सुहावनी शाम देखते ही देखते मातम में बदल गई जब एक क्रूज अचानक अनियंत्रित होकर पानी में पलट गया।
इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
अब इस मामले में जबलपुर जिला अदालत ने बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है।

कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
आमतौर पर पुलिस जांच के बाद कार्रवाई करती है, लेकिन इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने ‘स्वतः संज्ञान’ (Sua Sponte) लिया है।
कोर्ट ने साफ तौर पर माना कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है।
कोर्ट ने बरगी थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि वे तुरंत क्रूज के चालक और अन्य क्रू सदस्यों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करें।

क्यों नाराज हुआ कोर्ट?
अदालत की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह चालक दल का व्यवहार रहा।
चश्मदीदों और शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, जब क्रूज डूब रहा था और यात्री अपनी जान बचाने के लिए चीख-पुकार मचा रहे थे, तब चालक और उसके साथी यात्रियों की मदद करने के बजाय खुद को बचाकर वहां से भाग निकले।
कोर्ट ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यात्रियों को मरता हुआ छोड़कर भाग जाना न केवल कायरता है, बल्कि एक गंभीर अपराध और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।”

इन धाराओं में फंसेगा क्रू स्टाफ
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की नई धाराओं के तहत मामला दर्ज हो:
- धारा 106: लापरवाही से मृत्यु कारित करना।
- धारा 110: आपराधिक मानव वध का प्रयास (Attempt to commit culpable homicide)।
अदालत का मानना है कि क्रूज को तय क्षमता से अधिक भरा गया था या उसे लापरवाही से चलाया जा रहा था, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।

2 दिन का समय और बड़े अफसरों पर नजर
अदालत ने पुलिस को केवल 2 दिन (Working Days) का समय दिया है।
पुलिस को दो दिनों के भीतर एफआईआर की कॉपी और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी।
खास बात यह है कि अब यह मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों (ड्राइवर या टिकट चेकर) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यटन विभाग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
मानवता की मिसाल को सलाम
एक तरफ जहां कोर्ट ने क्रू मेंबर्स को फटकार लगाई, वहीं दूसरी ओर उन स्थानीय लोगों और साहसी युवाओं की जमकर तारीफ की, जिन्होंने हादसे के वक्त बिना अपनी जान की परवाह किए पानी में छलांग लगा दी।
कोर्ट ने कहा कि इन्हीं लोगों की वजह से कुछ जानें बचाई जा सकीं और समाज में आज भी मानवता जिंदा है।
