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बिहार में ‘खेला’ पार्ट-2: नीतीश ने MLC पद त्यागा, पर CM की कुर्सी के लिए BJP के सामने रखी 4 शर्तें!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Nitish Kumar’s Resignation: बिहार की राजनीति एक ऐसी पहेली है जिसे सुलझाना बड़े-बड़े दिग्गजों के बस की बात नहीं रही।

सोमवार को राज्य की सियासत में एक बार फिर वैसा ही “ट्विस्ट” आया, जैसा अक्सर थ्रिलर फिल्मों में दिखता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं, उन्होंने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

लेकिन असली सस्पेंस उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर है।

नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वे कुर्सी तभी छोड़ेंगे, जब उनकी चार प्रमुख शर्तें मानी जाएंगी।

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नीतीश कुमार का इस्तीफा मंजूर

सोमवार 30 मार्च की सुबह जेडीयू के कद्दावर नेता ललन सिंह, अशोक चौधरी और संजय झा मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे।

कुछ ही देर बाद MLC संजय गांधी नीतीश कुमार का इस्तीफा लेकर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के पास पहुंचे।

इस्तीफा मंजूर कर लिया गया।

इस दौरान नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले मंत्री अशोक चौधरी अपने नेता के इस्तीफे के बाद कैमरे के सामने ही फफक कर रो पड़े।

तेजस्वी ने कहा- बीजेपी की साजिश

वहीं, दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पूरी घटना को बीजेपी की साजिश करार दिया।

तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी ने नीतीश कुमार पर दबाव बनाकर उनसे इस्तीफा दिलवाया है।

नीतीश की वो 4 शर्तें, जिन्होंने फंसाया पेंच

भले ही नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए हों, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से पहले बीजेपी के सामने अपनी ‘सौदेबाजी’ की ताकत दिखा दी है।

खबरों के मुताबिक, नीतीश ने साफ कह दिया है कि बिना इन 4 बिंदुओं पर सहमति बने वे इस्तीफा नहीं देंगे:

  1. अगले मुख्यमंत्री का नाम पहले तय हो: नीतीश चाहते हैं कि उनके हटने से पहले बीजेपी यह साफ करे कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी। अगर चेहरा उनकी पसंद का नहीं हुआ, तो वे वीटो लगा सकते हैं।

  2. गृह मंत्रालय का बंटवारा: बिहार में ‘गृह विभाग’ हमेशा से शक्ति का केंद्र रहा है। नीतीश चाहते हैं कि नए समीकरण में यह तय हो कि गृह मंत्रालय किसके पास रहेगा।

  3. विधानसभा अध्यक्ष का पद: विधानसभा का स्पीकर किस पार्टी का होगा, इस पर भी नीतीश ने स्पष्टता मांगी है।

  4. मंत्रालयों का नया बंटवारा: किस पार्टी के पास कौन से विभाग रहेंगे, इसका फॉर्मूला पहले ही लिखित या स्पष्ट तौर पर तय होना चाहिए।

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बीजेपी के लिए यह ‘झटका’ क्यों है?

बीजेपी के लिए स्थिति असहज हो गई है। पिछला चुनाव एनडीए ने नीतीश कुमार के चेहरे पर ही जीता था।

अब जब नीतीश केंद्र की राजनीति (राज्यसभा) में जा रहे हैं, तो बीजेपी बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है।

लेकिन नीतीश की शर्तों ने बीजेपी के हाथ बांध दिए हैं।

अगर बीजेपी नीतीश की पसंद का सीएम नहीं चुनती है, तो नीतीश अगले 6 महीने तक पद पर बने रहकर खेल बिगाड़ सकते हैं।

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क्या कहता है कानून?

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने साफ किया है कि संवैधानिक नियमों के अनुसार, नीतीश कुमार बिना किसी सदन (MLC या MLA) के सदस्य रहे भी अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।

चूंकि वे 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे, इसलिए उन्हें 14 दिनों के भीतर विधान परिषद से इस्तीफा देना अनिवार्य था, जो उन्होंने कर दिया।

अब उनके पास मुख्यमंत्री पद पर बने रहने या छोड़ने के लिए पर्याप्त समय है।

आगे क्या होगा? 

बिहार में अभी ‘खरमास’ का महीना चल रहा है, जो 14 अप्रैल को समाप्त होगा।

माना जा रहा है कि शुभ कार्यों की शुरुआत के साथ ही बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

चर्चा यह भी है कि बीजेपी किसी पिछड़ी जाति के चेहरे को आगे कर सकती है, लेकिन नीतीश की शर्तों के बाद अब गेंद बीजेपी के पाले में है।

घटनाक्रम: एक नजर में

  • सुबह 09:00 बजे सीएम आवास पर जेडीयू के बड़े नेताओं की बैठक।
  • सुबह 10:30 बजे संजय गांधी नीतीश का इस्तीफा लेकर विधान परिषद पहुंचे।
  • दोपहर 11:30 बजे सभापति ने नीतीश कुमार का इस्तीफा मंजूर किया।
  • दोपहर 12:00 बजे नितिन नवीन का विधायक पद से इस्तीफा संजय सरावगी ने सौंपा।
  • शाम तक नीतीश की 4 शर्तों की खबरें गलियारों में तैरने लगीं।

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