CBSE Student Data Leak: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों और उनके पेरेंट्स के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है।
बोर्ड की तरफ से लगातार इनकार किए जाने के बावजूद, इंटरनेट की दुनिया में लाखों छात्रों का पर्सनल और बेहद गोपनीय डेटा खुलेआम बेचा जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह कीमती जानकारियां महज 999 रुपये से लेकर 5,000 रुपये जैसी मामूली कीमतों पर उपलब्ध हैं।
कुछ समय पहले ही एक एथिकल हैकर (वह हैकर जो सुरक्षा कमियों को सुधारने के लिए हैकिंग करता है) ने यह चेतावनी दी थी और साबित किया था कि सीबीएसई की वेबसाइट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और इसे आसानी से हैक किया जा सकता है।
लेकिन लगता है कि बोर्ड ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। अब नतीजा यह है कि यह सारा डेटा अनएथिकल (गलत इरादे वाले) हैकर्स के हाथ लग चुका है और वे इसे बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
चंद रुपयों में बिक रही है आपकी प्राइवेसी
इस डेटा ब्रीच (डेटा चोरी) में छात्रों की वो जानकारियां शामिल हैं जिन्हें बेहद गोपनीय रखा जाना चाहिए था।
हैकर्स के पास जो डेटा है, उसमें छात्र का नाम, उनके माता-पिता का नाम, उनका पर्सनल मोबाइल नंबर, स्कूल का नाम, छात्र के विषय (Subjects), उनका जिला और कई अन्य जरूरी जानकारियां शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला दावा यह है कि इन वेबसाइट्स पर चालू सत्र यानी 2025-26 बैच तक के छात्रों का डेटा भी बिक रहा है।
यह पूरा डेटा अलग-अलग राज्यों और शहरों के हिसाब से बेचा जा रहा है।
किस राज्य का डेटा कितने में मिल रहा है?*
- दिल्ली: 4.20 लाख से अधिक छात्र (12वीं कक्षा) — कीमत: ₹5,000
- उत्तर प्रदेश: 3.97 लाख छात्र — कीमत: ₹4,000
- बिहार: 1.62 लाख छात्र — कीमत: ₹4,000
- बेंगलुरु: लाखों छात्र — कीमत: ₹5,000 तक
री-इवैल्युएशन पोर्टल पर भी लगातार साइबर हमले
एक तरफ जहां पुराना और नया डेटा लीक होने की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई का री-इवैल्युएशन पोर्टल (नंबरों की दोबारा जांच करने वाली वेबसाइट) भी सुरक्षित नहीं दिख रहा है।
19 मई से जब से छात्रों के नंबरों की दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से इस पोर्टल पर लगातार साइबर हमले (Cyber Attacks) हो रहे हैं।
इस डर और तकनीकी दिक्कतों के बावजूद, छात्र अपने भविष्य को देखते हुए लगातार कॉपियों की दोबारा जांच के लिए आवेदन कर रहे हैं।
बता दें कि इस प्रक्रिया के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख 6 जून है।
अब तक के आंकड़ों के अनुसार:
- कुल आवेदन: लगभग 44 हजार छात्रों ने अब तक अप्लाई किया है।
- आंसरशीट वेरिफिकेशन: 4,924 छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को सत्यापित करने के लिए आवेदन किया है।
- री-इवैल्युएशन: 39,056 छात्रों ने कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए फॉर्म भरा है।
इस सब के बीच बुधवार, 3 जून को बहुत से छात्रों और उनके माता-पिता ने शिकायत की है कि पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों और खराबी की वजह से उन्हें अब तक अपनी आंसरशीट की फोटोकॉपी नहीं मिल पाई है, जिससे वे काफी परेशान हैं।
शिक्षा व्यवस्था और डेटा सुरक्षा पर बड़े सवाल
इस पूरे गंभीर मामले पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी मशहूर संस्था ‘करियर-360’ के प्रमुख महेश्वर पेरी ने गहरी चिंता जताई है।
महेश्वर पेरी का कहना है कि: “चाहे यह डेटा हैकिंग के जरिए बाहर आया हो, डेटा लीक हुआ हो या फिर विभाग के अंदरूनी स्तर पर किसी लापरवाही या सेंधमारी की वजह से ऐसा हुआ हो, यह हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बहुत ही गंभीर चेतावनी है।”
इतनी बड़ी घटना होने और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर होने के बावजूद, खबर लिखे जाने तक सीबीएसई (CBSE) या शिक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है।
ऐसे में छात्रों के माता-पिता बेहद चिंतित हैं कि उनके बच्चों के फोन नंबर और पर्सनल डिटेल का गलत इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा किया जा सकता है।
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