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महाकाल लोक के बाद अब उज्जैन में बनेगा ‘सांदीपनि लोक’: 139 करोड़ से बदलेगी कान्हा की पाठशाला, लगेगी 108 फीट ऊंची प्रतिमा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sandipani Lok Ujjain: धार्मिक नगरी उज्जैन (अवंतिकापुरी) से देश के करोड़ों कृष्ण भक्तों के लिए एक बेहद शानदार और दिल खुश कर देने वाली खबर आई है।

भव्य ‘महाकाल लोक’ की अपार सफलता और लोकप्रियता के बाद, अब मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन में एक और ऐतिहासिक कॉरिडोर बनाने जा रही है।

इस नए प्रोजेक्ट का नाम है ‘सांदीपनि लोक’।

इस बार सरकार भगवान श्रीकृष्ण, उनके भाई बलराम और उनके परम मित्र सुदामा की शिक्षा स्थली यानी प्रसिद्ध सांदीपनि आश्रम का कायाकल्प करने जा रही है।

आइए जानते हैं कि इस पूरे प्रोजेक्ट का बजट क्या है, इसमें क्या-क्या खास होने वाला है और इससे उज्जैन की तस्वीर कितनी बदल जाएगी।

₹139 करोड़ का बजट और सिंहस्थ 2028 का टारगेट

इस बेहद भव्य और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 139 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है।

इस पूरे प्रोजेक्ट को ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ नाम दिया गया है।

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार का लक्ष्य है कि साल 2028 में होने वाले अगले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले इस कॉरिडोर का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालु इसके साक्षी बन सकें।

इस पूरे काम की जिम्मेदारी ‘उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड’ को सौंपी गई है।

कैसा होगा ‘सांदीपनि लोक’? द्वापर युग का मिलेगा अहसास

सांदीपनि लोक का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन और समृद्ध गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करना है।

इस कॉरिडोर का डिजाइन कुछ इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यहां कदम रखते ही श्रद्धालु सीधे द्वापर युग की यादों में खो जाएंगे।

भव्य प्रवेश द्वार: आश्रम का एंट्री गेट बेहद सुंदर और नक्काशीदार होगा, जो प्राचीन भारतीय वास्तुकला की झलक दिखाएगा।

महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा: जैसे ही लोग परिसर के अंदर कदम रखेंगे, उन्हें महर्षि सांदीपनि की एक बेहद खूबसूरत मूर्ति के दर्शन होंगे।

प्राचीन और आधुनिकता का संगम: इस पूरे परिसर में प्राचीनता को बनाए रखते हुए आधुनिक सुख-सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा।

डिजिटल तकनीक का कमाल: VR बॉक्स से दिखेगा इतिहास

सांदीपनि लोक सिर्फ पत्थरों और मूर्तियों का गलियारा नहीं होगा, बल्कि इसमें अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का ऐसा तालमेल देखने को मिलेगा जो बच्चों और युवाओं को बहुत आकर्षित करेगा।

AR और VR तकनीक (Augmented & Virtual Reality): यहाँ आने वाले लोग VR (वर्चुअल रियलिटी) बॉक्स या चश्मा पहनकर साक्षात द्वापर युग का अनुभव कर सकेंगे।

वे देख सकेंगे कि भगवान श्रीकृष्ण ने कैसे सांदीपनि आश्रम में रहकर 16 विद्याएं और 64 कलाएं सीखी थीं।

मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो गाइड: देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए अलग-अलग भाषाओं में डिजिटल और ऑडियो-विजुअल गैजेट्स उपलब्ध होंगे।

लोग हेडफोन लगाकर भगवान श्रीकृष्ण की कहानियों और उज्जैन के इतिहास को अपनी भाषा में सुन सकेंगे।

मुख्य आकर्षण: 108 फीट ऊंची श्रीकृष्ण की विराट प्रतिमा

इस पूरे कॉरिडोर की सबसे बड़ी यूएसपी (खासियत) यहाँ स्थापित होने वाली भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा होगी।

यह मध्य प्रदेश की सबसे ऊंची और भव्य मूर्तियों में से एक होगी।

आईआईटी (IIT) इंजीनियर्स करेंगे कमाल: इस प्रतिमा को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इस पर मौसम का कोई असर न पड़े।

इसके लिए बकायदा आईआईटी और एनआईआईटी के एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है।

 

मूर्ति की मजबूती जांचने के लिए ‘विंड टनल स्टडी’ (तेज हवाओं का टेस्ट) की जाएगी, जिससे आंधी-तूफान में भी मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित रहे।

इस प्रतिमा के पास एक खूबसूरत वाटर फाउंटेन (जलाकर्षण) भी बनेगा, जो रात के समय रंग-बिरंगी लाइटों के साथ बेहद खूबसूरत दिखेगा।

गोमती कुंड पर होगा ‘लाइट एंड साउंड शो’

सांदीपनि आश्रम परिसर के भीतर स्थित ऐतिहासिक गोमती कुंड के पास हर शाम एक वर्ल्ड-क्लास ‘लाइट एंड साउंड शो’ का आयोजन किया जाएगा।

इसमें लेटेस्ट लाइटिंग और बेहतरीन सराउंड साउंड सिस्टम का इस्तेमाल होगा।

इस शो के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, उनके कंस वध की कहानी, उज्जैन आगमन और सांदीपनि आश्रम में उनके बिताए दिनों के इतिहास को बयां किया जाएगा।

रोचक इतिहास: जब 11 साल के कान्हा 650 किमी पैदल चलकर उज्जैन आए

पौराणिक कथाओं और स्कंद पुराण के अनुसार, द्वापर युग में उज्जैन को अवंतिका नगरी कहा जाता था।

यहाँ की राजमाता, भगवान श्रीकृष्ण के पिता वासुदेव जी की मुंहबोली बहन थीं (यानी रिश्ते में श्रीकृष्ण की बुआ)।

जब श्रीकृष्ण और बलराम ने मथुरा में पापी कंस का वध कर दिया, तो उसके बाद वे दोनों भाई शिक्षा ग्रहण करने के लिए मथुरा से पैदल ही उज्जैन आए थे।

मथुरा से उज्जैन की दूरी लगभग 650 किलोमीटर है।

सबसे हैरान और श्रद्धा से भर देने वाली बात यह है कि जब श्रीकृष्ण पैदल चलकर उज्जैन आए थे, तब उनकी उम्र मात्र 11 साल 7 दिन थी।

यहाँ रहकर उन्होंने बेहद कम समय में गुरु सांदीपनि से समस्त कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया था।

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महाकाल लोक से बदला उज्जैन: अब शनि लोक की भी बारी

साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से ‘महाकाल लोक’ का लोकार्पण किया है, तब से उज्जैन की पूरी अर्थव्यवस्था और पर्यटन का चेहरा बदल गया है।

पिछले 4 सालों में उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 4 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

पहले जहां सामान्य दिनों में रोज़ाना 15 से 20 हजार लोग आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 से 60 हजार और त्योहारों पर 2 लाख के पार पहुंच जाता है।

इससे स्थानीय होटल, ऑटो, गाइड और छोटे व्यापारियों की कमाई कई गुना बढ़ गई है।

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इसी सफलता को देखते हुए सरकार अब ‘सांदीपनि लोक’ के साथ-साथ उज्जैन के प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर का कायाकल्प कर शनि लोक’ बनाने की तैयारी में भी है।

आने वाले समय में सांदीपनि लोक और शनि लोक, महाकाल लोक के साथ मिलकर उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।

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