Cockroach Janta Party: आज के डिजिटल युग में कब, क्या और कैसे वायरल हो जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन इंस्टाग्राम के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा अनोखा और हैरान करने वाला राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला हो।
खुद को दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल कहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की रेस में एक नए-नवेले सटायर (व्यंग्य) पेज ने बहुत पीछे छोड़ दिया है।
इंटरनेट की दुनिया में महज चार दिन पहले शुरू हुए कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party – CJP) के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का आंकड़ा 10 मिलियन (1 करोड़) को पार कर चुका है।

वहीं दूसरी तरफ, सालों की मेहनत और 18,400 से ज्यादा पोस्ट शेयर करने के बाद बीजेपी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर लगभग 8.7 मिलियन (87 लाख) फॉलोअर्स हैं।
यानी एक मीम या व्यंग्य से शुरू हुए इस पेज ने देश की सबसे बड़ी सत्ताधारी पार्टी को पछाड़ दिया है, वो भी महज 56 पोस्ट के साथ।

आखिर कैसे और क्यों शुरू हुआ यह आंदोलन?
इस अनोखे और बेहद तेजी से फैलते आंदोलन की शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक मंच, रैली या भारी-भरकम फंड से नहीं हुई है।
इसकी शुरुआत हुई देश की सर्वोच्च अदालत की एक कार्यवाही के बाद पैदा हुए ऑनलाइन गुस्से से।
दरअसल, 15 मई को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले और सिस्टम की आलोचना करने वाले बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टों) और ‘पैरासाइट्स’ (परजीवियों) से की थी।

बस, यही बात इंटरनेट पर आग की तरह फैल गई।
देश के युवाओं, खासकर जेन-जी (Gen-Z) को यह बात इतनी चुभ गई कि उन्होंने इस कथित अपमान को ही अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक और डिजिटल पहचान बना लिया।
युवाओं का मानना था कि जब देश के संविधान के रक्षक ही उनके बारे में ऐसी सोच रखेंगे, तो वे अपनी बात कहां कहेंगे।

कौन हैं इसके सूत्रधार अभिजीत दिपके?
इस पूरे डिजिटल आंदोलन के पीछे 30 साल के एक युवा अभिजीत दिपके का दिमाग है, जो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं।
अभिजीत कोई आम सोशल मीडिया यूजर नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर डिग्री ली है।
इसके अलावा, उनके पास राजनीतिक सोशल मीडिया मैनेजमेंट का पुराना अनुभव भी है।

साल 2020 से 2023 तक वे आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में बतौर वॉलंटियर काम कर चुके हैं।
अभिजीत बताते हैं कि उन्होंने ‘X’ (ट्विटर) पर CJI के इस बयान को देखा और सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए मजाक में पूछा कि “अगर देश के सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?”
इस पर 25 साल तक के युवाओं के ऐसे शानदार और मजेदार जवाब आए कि सबने मिलकर एक प्लेटफॉर्म बनाने की मांग कर दी।

इसी भड़ास और गुस्से से जन्म हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का।
पार्टी का नारा और सदस्यता के लिए बेहद मजेदार शर्तें
इस पार्टी का आधिकारिक नारा बेहद व्यंग्यात्मक है—“सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी (Secular, Socialist, Democratic, Lazy)।”
हैरानी की बात यह है कि महज चार दिनों के भीतर इस सटायर वेबसाइट पर 2 लाख से ज्यादा युवाओं ने बकायदा मेंबरशिप फॉर्म भरकर अपना रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है।
इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए जो शर्तें रखी गई हैं, वे देश के मौजूदा हालात और युवाओं की मनोदशा पर एक करारा कटाक्ष हैं:
- पहली शर्त: आवेदक का बेरोजगार होना अनिवार्य है।
- दूसरी शर्त: आवेदक का पूरी तरह से आलसी होना (यानी डले रहो, पड़े रहो)।
- तीसरी शर्त: ‘क्रॉनिकली ऑनलाइन’ होना, यानी जिसे हर वक्त इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रहने की लत हो।
- चौथी शर्त: प्रोफेशनली और क्रिएटिव तरीके से अपनी भड़ास निकालने की क्षमता होना।
CJP का 5-सूत्रीय एजेंडा और गंभीर मैनिफेस्टो
भले ही यह आंदोलन देखने में एक मीम या मजाक लग रहा हो, लेकिन इसके पीछे जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वे देश की रग को छूते हैं।
इस आंदोलन से जुड़े युवाओं का कहना है कि पिछले 12 सालों से देश की राजनीति सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के इर्द-गिर्द ही घूम रही है, जबकि आज की युवा पीढ़ी रोजगार, एआई (AI), सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी जैसे भविष्य के जरूरी विषयों पर बातचीत करना चाहती है।
पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर एक 5-सूत्रीय एजेंडा और मैनिफेस्टो (घोषणापत्र) भी जारी किया है, जो इस प्रकार है:
1. न्यायाधीशों पर लगाम: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों (CJI) को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा की सीट या कोई भी सरकारी रिवॉर्ड नहीं दिया जाएगा।
2. चुनाव अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई: अगर किसी वैध वोटर का नाम वोटर लिस्ट से काटा जाता है या डिलीट किया जाता है, तो जिम्मेदार चुनाव अधिकारियों पर बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई (UAPA के तहत) होगी, क्योंकि किसी का वोटिंग अधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं है।
3. महिलाओं को 50% आरक्षण: महिलाओं के लिए संसद और देश की कैबिनेट में पूरे 50 फीसदी का आरक्षण होगा, न कि सिर्फ 33 फीसदी। इसके लिए सांसदों की सीटें बढ़ाने का नाटक भी नहीं किया जाएगा।
4. स्वतंत्र मीडिया और गोदी मीडिया पर कार्रवाई: देश के बड़े कॉरपोरेट्स (जैसे अंबानी और अडाणी) के मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे ताकि वास्तव में स्वतंत्र मीडिया को जगह मिल सके। साथ ही, कथित गोदी मीडिया एंकरों के बैंक खातों की जांच कराई जाएगी।
5. दलबदलू नेताओं पर बैन: यदि कोई विधायक या सांसद चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसके दोबारा चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाएगी और अगले 20 साल तक वह किसी भी पब्लिक ऑफिस या सरकारी पद पर नहीं बैठ सकेगा।
इसके अलावा युवाओं ने हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है और पूछा है कि इतनी बड़ी नाकामी के बाद भी देश के शिक्षा मंत्री अपने पद पर कैसे बने हुए हैं?
इस पूरे विवाद पर CJI ने सफाई में क्या कहा?
जब सोशल मीडिया पर यह आंदोलन एक सुनामी की तरह बढ़ने लगा, तो चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने खुद सामने आकर अपनी ‘पैरासाइट और कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दी।
CJI ने कहा, “मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को पूरी तरह से गलत तरीके से और संदर्भ से बाहर पेश किया है। मेरी वह टिप्पणी देश के आम युवाओं या बेरोजगारों के लिए नहीं थी।”
“वह टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत, मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में घुस आए हैं। ऐसे लोग व्यवस्था के लिए परजीवियों (Parasites) जैसे हैं।”

क्या 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी कॉकरोच पार्टी?
फॉलोअर्स के मामले में बीजेपी जैसी विशाल पार्टी को पीछे छोड़ने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह मोर्चा आने वाले समय में सच में चुनाव लड़ेगा?
क्या 2029 के लोकसभा चुनाव में यह पार्टी ईवीएम (EVM) पर एक विकल्प के रूप में दिखेगी?
इस सवाल पर फाउंडर अभिजीत दिपके का कहना है कि अभी इस बारे में कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी।
आंदोलन को शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। वे फिलहाल केवल रजिस्टर्ड युवाओं से बातचीत कर रहे हैं और उनकी राय ले रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे विपक्षी नेताओं जैसे अरविंद केजरीवाल या अन्य का समर्थन लेंगे?
तो अभिजीत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि नेता चाहें तो अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन ‘जेन-जी’ (Gen-Z) का कोई भी युवा यह नहीं चाहेगा कि इस आंदोलन में कोई भी स्थापित पारंपरिक राजनीतिक दल शामिल हो या उसकी परछाई भी इस मूवमेंट पर पड़े।
युवा चाहते हैं कि यह मंच पूरी तरह से स्वतंत्र रहे ताकि सिस्टम को उसकी कमियां आईना दिखाकर याद दिलाई जा सकें।
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