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MP में ‘अर्नब’ तूफान का तांडव: 33 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, पचमढ़ी सबसे ठंडा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Cyclone Arnab-MP weather update:अगर आप भी पिछले दो-तीन दिनों से आसमान में छाए काले बादलों और अचानक बढ़ी ठंड को देखकर हैरान हैं, तो आपको बता दें कि यह सब चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) का असर है।

जो सर्दी हमें नवंबर के मध्य में महसूस होनी चाहिए थी, वह इस तूफान के कारण अक्टूबर के आखिर में ही आ गई है।

मध्य प्रदेश समेत देश के करीब 14 राज्य इस समय आंधी, तेज बारिश और गिरते तापमान का सामना कर रहे हैं।

आइए बिल्कुल जानते हैं कि आखिर यह मौसम क्यों बदला है, मध्य प्रदेश के किन जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर है, और किसानों से लेकर आम आदमी तक इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है।

क्या है तूफान ‘अर्नब’ और अब क्या है इसकी स्थिति?

दरअसल, समुद्र में उठने वाले तूफानों का असर कई सौ किलोमीटर दूर तक होता है।

चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ अब थोड़ा कमजोर जरूर पड़ गया है और मौसम विज्ञान की भाषा में यह एक ‘कम दबाव वाले क्षेत्र’ (Low Pressure Area) में बदल गया है।

आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा सिस्टम बन गया है जो अपने आस-पास के बादलों और नमी को खींचकर मध्य और उत्तर भारत के ऊपर बरसा रहा है।

इसी वजह से कई राज्यों में लगातार बारिश हो रही है और ठंडी हवाएं चल रही हैं।

मध्य प्रदेश में 2 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम?

मध्य प्रदेश में इस चक्रवात का खासा असर देखा जा रहा है। शुक्रवार सुबह से ही ग्वालियर और मऊगंज जैसे इलाकों में रिमझिम बारिश शुरू हो गई।

मौसम विभाग (IMD) ने साफ कर दिया है कि यह मौसम अभी 2 नवंबर तक ऐसा ही रहने वाला है।

इन 33 जिलों में जारी हुआ अलर्ट:

अगर आप जबलपुर, ग्वालियर, राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, कटनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ या निवाड़ी जिले में रहते हैं, तो घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट जरूर साथ रखें।

मौसम विभाग ने इन 33 जिलों के लिए आंधी-तूफान और हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया है।

यहां खिली रहेगी धूप:

दूसरी तरफ, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, देवास, रतलाम और झाबुआ समेत करीब 22 जिलों के लोगों के लिए राहत की खबर है।

हालांकि गुरुवार को इनमें से कुछ जगहों (जैसे भोपाल, सीहोर) पर बारिश हुई थी, लेकिन अब यहां मौसम साफ रहने और धूप निकलने की पूरी उम्मीद है।

पचमढ़ी में सबसे ज्यादा ठंड, तापमान गिरा

लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं ने दिन के तापमान को भी गिरा दिया है। मध्य प्रदेश में दिन का तापमान अचानक 2 डिग्री तक लुढ़क गया है।

अगर रातों की बात करें, तो पचमढ़ी ने सबको पीछे छोड़ दिया है।

बीती रात पचमढ़ी का न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे वहां कड़ाके की ठंड का अहसास होने लगा है।

इसके अलावा नौगांव में 15.6, अमरकंटक में 16.1 और खरगोन-दमोह में तापमान 17 डिग्री के आसपास रहा।

किसानों की बढ़ी चिंता: खेतों से लेकर मंडियों तक बुरा हाल

यह बेमौसम की बारिश शहरी लोगों को भले ही सुहानी लग रही हो, लेकिन हमारे किसानों के लिए यह किसी आफत से कम नहीं है।

इस समय खेतों में धान की फसल पक कर तैयार खड़ी है। ऐसे में बारिश होने से धान के दाने काले पड़ सकते हैं और उनकी क्वालिटी खराब हो सकती है।

मंडियों का हाल तो और भी बुरा है। पांढुर्णा की कृषि मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा किसानों का हजारों क्विंटल मक्का भीग गया।

रायसेन के दशहरा मैदान में भी धान से भरी करीब 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी थीं, जिन्हें तिरपाल से ढंकने और बारिश से बचाने के लिए किसानों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

हालांकि, हर फसल को नुकसान नहीं है; कपास, संतरे और तुअर (अरहर) की फसल करने वाले किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हो सकती है।

सिर्फ MP ही नहीं, देश के 14 राज्य तूफान की चपेट में

तूफान अर्नब का दायरा बहुत बड़ा है। मध्य प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों में भी इसने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है:

* ओडिशा में बाढ़ के हालात: इस तूफान का सबसे खौफनाक रूप ओडिशा में देखने को मिला है। वहां के गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में बाढ़ आ गई है।

300 से ज्यादा गांवों का शहरों से संपर्क कट गया है और करीब 62 हजार लोग बाढ़ के पानी में फंस गए।

हालात इतने बिगड़े कि लोगों को बचाने के लिए NDRF की टीमों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करना पड़ा।

* दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ ठंड: राजधानी दिल्ली में गुरुवार रात हुई बारिश ने प्रदूषण तो थोड़ा कम किया, लेकिन ठंड बढ़ा दी।

गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री रहा, जो पिछले चार सालों में अक्टूबर महीने का सबसे ठंडा दिन है।

* राजस्थान और यूपी में भी आफत: राजस्थान के 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है, जयपुर समेत कई जगहों पर तो ओले भी गिरे हैं।

वहीं, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट दिया है।

लखनऊ से लेकर आगरा-मथुरा तक काले बादल छाए हुए हैं और दिन में ही अंधेरा सा हो गया है।

* बिहार और पहाड़ी राज्य: बिहार के सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे जिलों में भारी बारिश (रेड अलर्ट) की चेतावनी है।

वहीं उत्तराखंड की बात करें तो केदारनाथ और गंगोत्री धाम में भारी बर्फबारी शुरू हो गई है।

बर्फ की सफेद चादर ने वहां के तापमान को जमा देने वाले स्तर पर ला दिया है, फिर भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है।

* छत्तीसगढ़, हरियाणा और पंजाब: इन राज्यों में भी तापमान 8 डिग्री तक गिर गया है और लगातार बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दो दिन (31 अक्टूबर और 1 नवंबर) पूर्वी और दक्षिण भारत (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक) में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

2 नवंबर के बाद से इस सिस्टम का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा और आसमान साफ होना शुरू हो जाएगा।

कुल मिलाकर, इस बेमौसम बारिश ने मौसम का पूरा चक्र घुमा दिया है।

अगर आप प्रभावित राज्यों में रहते हैं, तो इस बदलते मौसम में अपनी सेहत का खास ख्याल रखें, गर्म कपड़े निकाल लें और अगर आप किसान हैं, तो अपनी कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित और सूखी जगह पर पहुंचाने का इंतजाम करें।

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