Ghanshyam Singh vs Ashutosh Tiwari Assets: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच है।
सोमवार, 13 जुलाई को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था और इसी के साथ दोनों प्रत्याशियों के हलफनामे (शपथ पत्र) भी सामने आ चुके हैं।
इन हलफनामों को देखकर साफ पता चलता है कि दोनों प्रत्याशियों की माली हालत में बहुत बड़ा अंतर है।
एक तरफ जहां कांग्रेस प्रत्याशी राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी एक सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं।
आइए जानते हैं कि दोनों प्रत्याशियों के पास कितनी दौलत है, कितना सोना है और दोनों की शैक्षणिक व आपराधिक पृष्ठभूमि क्या है।

कांग्रेस के घनश्याम सिंह: राजघराने के मुखिया और ₹20 करोड़ के मालिक
कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव में घनश्याम सिंह पर दांव खेला है, जो दतिया राजघराने के मुखिया हैं।
राजसी पृष्ठभूमि होने के कारण उनके पास अकूत संपत्ति है।
कुल संपत्ति और देनदारियां
घनश्याम सिंह ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति ₹20 करोड़ 76 लाख घोषित की है। इसमें से:
- अचल संपत्ति (जमीन, मकान आदि): ₹19 करोड़ 36 लाख
- चल संपत्ति (बैंक बैलेंस, गाड़ी आदि): करीब ₹1 करोड़ 40 लाख
अगर व्यक्तिगत तौर पर देखें, तो घनश्याम सिंह के खुद के नाम पर ₹69 लाख 75 हजार की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के नाम पर ₹70 लाख 47 हजार की संपत्ति दर्ज है।
इस चल संपत्ति में नकद पैसा, बैंक डिपॉजिट, बीमा पॉलिसी और आभूषण शामिल हैं। उनके पास खुद ₹1 लाख 80 हजार की नकदी मौजूद है।
सोने के मामले में पत्नी आगे
दौलत के मामले में भले ही घनश्याम सिंह आगे हों, लेकिन सोने के मामले में उनकी पत्नी बाजी मार ले गई हैं। घनश्याम सिंह के पास 240 ग्राम सोना है, जबकि उनकी पत्नी के पास उनसे दोगुने से भी अधिक यानी 580 ग्राम सोना है।
कर्ज, टैक्स और आपराधिक मामले
अमीरी के साथ-साथ घनश्याम सिंह पर देनदारियां भी हैं। उन पर ₹5 लाख 63 हजार का कर्ज है।
इसके अलावा, नगर पालिका दतिया का ₹24 लाख 37 हजार का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) भी बकाया है।
तहसीलदार द्वारा उन पर ₹67 लाख 44 हजार की देनदारी भी तय की गई थी, जिसका मामला फिलहाल अदालत में चल रहा है।
घनश्याम सिंह के खिलाफ 3 आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
पढ़ाई-लिखाई और कमाई का जरिया
घनश्याम सिंह ने साल 1976 में आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) में एमए (Master of Arts) किया है। उनकी आय के मुख्य साधन खेती-किसानी, पेंशन और मकान का किराया हैं।
भाजपा के आशुतोष तिवारी: सादगी और ₹2.61 करोड़ की कुल संपत्ति
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की आर्थिक स्थिति कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले काफी साधारण है।
उनके पूरे परिवार की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹2 करोड़ 61 लाख है।
संपत्ति का पूरा ब्योरा
आशुतोष तिवारी के पास खुद की ₹1 करोड़ 29 लाख 75 हजार 443 की संपत्ति है। वहीं, उनकी पत्नी कल्पना तिवारी के नाम पर ₹1 करोड़ 31 लाख 37 हजार 900 की संपत्ति दर्ज है। यानी यहां भी पत्नी अपने पति से संपत्ति के मामले में थोड़ी आगे हैं।
सोना और नकदी की स्थिति
सोने के मामले में आशुतोष के पास 80 ग्राम सोना है, जबकि उनकी पत्नी कल्पना के पास 312 ग्राम सोना है।
नकदी की बात करें तो आशुतोष के पास ₹1 लाख 54 हजार और उनकी पत्नी के पास ₹42 हजार 600 नकद हैं।
बेटे के नाम पर भी संपत्ति
आशुतोष के हलफनामे में उनके आश्रित बेटे सुयश की संपत्ति का ब्योरा भी दिया गया है। सुयश के नाम पर ₹17 लाख 60 हजार की कृषि भूमि दर्ज है।
साथ ही उनके पास ₹85 हजार की नकदी और ₹4 लाख 18 हजार की एफडी (Fixed Deposit) भी है। परिवार के पास दभेरा में ₹96 लाख की कृषि भूमि है।
कर्ज और बेदाग छवि
तिवारी परिवार पर कुल ₹39 लाख 69 हजार का कर्ज है।
आशुतोष तिवारी के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनकी छवि बिल्कुल साफ है।
पढ़ाई और पेशा
आशुतोष तिवारी ने साल 2011 में बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से राजनीति विज्ञान (Political Science) में एमए किया है।
वह पेशे से एक किसान हैं और साथ ही गेस्ट लेक्चरर (अतिथि व्याख्याता) के रूप में भी काम करते हैं।
कौन किस पर भारी?
नीचे दी गई तालिका से आप दोनों उम्मीदवारों की स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं:

नामांकन की जांच और आगे का चुनावी शेड्यूल
दतिया उपचुनाव के लिए सोमवार, 13 जुलाई को नामांकन का आखिरी दिन था। इस दौरान जिले में कुल 32 नामांकन फॉर्म दाखिल किए गए हैं।
चुनावी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार एक से ज्यादा फॉर्म भी भरते हैं।
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने 2 और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 3 नामांकन दाखिल किए हैं।
अब चुनाव आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार आगे की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होगी:
* 14 जुलाई (मंगलवार): सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (बारीकी से जांच) की जाएगी।
* 16 जुलाई (गुरुवार): नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है। इसके बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी।
लोकतंत्र में मतदाता सबसे बड़ा निर्णायक होता है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक हर उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, देनदारी और आपराधिक मुकदमों की जानकारी जनता के सामने रखनी होती है। यह पारदर्शिता मतदाताओं को एक जागरूक फैसला लेने में मदद करती है।
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