Delhi Police action Objectionable post: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में खत्म हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर किए गए कुछ आपत्तिजनक पोस्ट्स को लेकर दिल्ली पुलिस पूरी तरह एक्शन में आ गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है।
रविवार को पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार इंटरनेट पर एक्टिव है।
पुलिस जल्द ही X (ट्विटर), इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कानूनी नोटिस भेजने जा रही है।

इस नोटिस में साफ कहा जाएगा कि आंदोलन के दौरान या उसके बाद अपलोड किए गए विवादित, आपत्तिजनक और आपत्तिजनक वीडियो, कमेंट्स और पोस्ट्स को तुरंत हटाया जाए।
पुलिस की स्पेशल साइबर टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि कौन से पोस्ट्स कानून की सीमाओं को तोड़ते हैं और किनसे समाज में शांति और कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।
जो भी अकाउंट्स इस तरह का कंटेंट फैला रहे हैं, उनकी पहचान की जा रही है।

Gen-Z का आंदोलन: व्यंग्य, इंटरनेट और अलग अंदाज ने ध्यान खींचा
जंतर-मंतर पर लगभग 36 दिनों तक चला यह छात्र आंदोलन सिर्फ अपनी मांगों को लेकर ही चर्चा में नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे प्रदर्शनकारियों का अनोखा तरीका भी बड़ा कारण था।
इस बार सड़कों पर कोई पुरानी पीढ़ी नहीं, बल्कि आज की ‘Gen-Z’ (नई पीढ़ी) उतरी थी।
इस आंदोलन ने देश में विरोध प्रदर्शन का एक बिल्कुल नया मॉडल पेश किया।
इस आंदोलन के 4 बड़े और अनोखे ट्रेंड्स:
1. चंदा मांगने का बदला तरीका:
पारंपरिक आंदोलनों की तरह यहाँ नकद चंदा या लंगर की जरूरत नहीं पड़ी।
देश और विदेश में बैठे समर्थकों ने स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) जैसी फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए सीधे प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के लिए खाना, पानी और दवाइयां भेजीं।
इसके लिए जंतर-मंतर पर बाकायदा एक ‘SOS हेल्प डेस्क’ बनाई गई थी, जहाँ हर सामान का हिसाब रखा जाता था।
2. आपसी सहयोग की मिसाल:
भीषण गर्मी के बावजूद छात्र एक-दूसरे का ख्याल रखते दिखे। कोई अपने साथी को पंखा झेल रहा था, तो कोई पानी पिला रहा था।
मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने खुद की टीम बनाकर अपने साथियों की सेहत का पूरा ध्यान रखा।
3. महिलाओं की सुरक्षा बनी मिसाल:
इस आंदोलन में हजारों की संख्या में छात्राएं और युवतियां शामिल हुईं।
खास बात यह रही कि इतने लंबे चले प्रदर्शन में छेड़छाड़ या महिला सुरक्षा से जुड़ी एक भी शिकायत सामने नहीं आई।
युवतियों ने साफ कहा कि वे लड़कों के बीच पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रही थीं।
4. डिजिटल दुनिया बनी सबसे बड़ा हथियार:
अगर इंटरनेट की स्पीड धीमी भी हुई, तो भी छात्रों ने हार नहीं मानी।
रील्स, मीम्स, लाइव स्ट्रीमिंग, X पोस्ट और इंस्टाग्राम अपडेट्स के जरिए आंदोलन की हर छोटी-बड़ी खबर देश-दुनिया तक पहुंचती रही।
यह प्रदर्शन सड़कों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर 24 घंटे जिंदा रहा।
आंदोलन के आखिरी दिनों में खड़े हुए कुछ गंभीर सवाल
हालाँकि आंदोलन काफी हद तक अनुशासित रहा, लेकिन आखिरी दिनों में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्होंने इस पर सवालिया निशान भी लगाए:
* असामाजिक तत्वों की घुसपैठ: जैसे ही जंतर-मंतर पर फूड डिलीवरी बॉय खाना लेकर पहुंचते, कुछ ऐसे लोग जो छात्र नहीं थे, वे खाने के पैकेटों पर टूट पड़ते थे। इससे व्यवस्था खराब हुई।
* सुरक्षा बलों के लिए व्यवस्था की कमी: शुरुआती दिनों में पुलिसकर्मी और छात्र एक साथ खाना खाते थे। लेकिन 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के बाद यह तालमेल टूट गया और ड्यूटी पर तैनात जवानों के लिए अलग से भोजन की सही व्यवस्था नहीं दिखी।
* जीत के जश्न में हुई हिंसा: आंदोलन काफी शांतिपूर्ण था, लेकिन केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही जश्न के दौरान कुछ जगहों पर हिंसक घटनाएं हुईं, जिससे आंदोलन की अनुशासित छवि को नुकसान पहुंचा।

सत्ता पक्ष के नेताओं के बच्चों ने भी दिया छात्रों का साथ
इस आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसे केवल विपक्ष का समर्थन नहीं मिला, बल्कि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं के बच्चों ने भी खुलकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया:
* देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने हिंसा को गलत बताया।
* असम के मंत्री की बेटी दिबिसा: असम गण परिषद (AGP) के नेता और राज्य सरकार में मंत्री केशव महंत की बेटी दिबिसा खुद प्रदर्शन में शामिल हुईं। इस पर असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं कि बेटी हमेशा अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा से ही सहमत हो।
* अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता: भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता ने छात्रों के पक्ष में सोशल मीडिया पर लिखा— “मेरा परिवार धर्मेंद्र प्रधान के साथ हो सकता है, लेकिन मैं छात्रों के साथ खड़ी हूँ।”
36 दिनों के बाद ऐसे खत्म हुआ CJP का आंदोलन
इस पूरे मामले की शुरुआत 3 मई को नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों के साथ हुई थी।
छात्रों का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ा और 16 मई को सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बना।
इसके बाद 20 जून से छात्र जंतर-मंतर पर पक्के धरने पर बैठ गए।
यह आंदोलन पूरे 36 दिनों तक चला। आखिरकार 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि बीते 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है और यह लड़ाई उनके व्यक्तिगत सम्मान की नहीं है।

इसी आंदोलन के समर्थन में 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सरकार से ठोस आश्वासन मिलने के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी।
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