Dewas Factory Blast: मध्य प्रदेश के देवास जिले में गुरुवार की सुबह जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर एबी रोड पर स्थित टोंक कलां इलाके में सुबह करीब 10:30 से 11:30 के बीच एक भीषण विस्फोट हुआ।
यह धमाका एक पटाखा फैक्ट्री में हुआ, जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि फैक्ट्री की छत पर लगे लोहे के शेड और टीन के टुकड़े उड़कर पास के नेशनल हाईवे तक जा गिरे।
देखते ही देखते चारों ओर काले धुएं का गुबार छा गया और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

मौत का आंकड़ा और भयावह मंजर
हादसे के बाद जो मंजर सामने आया, वह दिल दहला देने वाला था।
विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वहां काम कर रहे मजदूरों के शरीर के चिथड़े उड़ गए।
कुछ शवों के अवशेष फैक्ट्री परिसर से 20-25 फीट दूर जाकर गिरे।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, मरने वालों की संख्या 8 से 10 बताई जा रही है, हालांकि जिला प्रशासन ने फिलहाल दो मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है और आरएमओ (RMO) ने तीन मौतों की बात कही है।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि 23 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं।
इनमें से आधा दर्जन से अधिक श्रमिक 80 प्रतिशत से ज्यादा जल चुके हैं।

घायलों को तुरंत देवास जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए 15 लोगों को इंदौर के चोइथराम और अमलतास अस्पताल रेफर किया गया है।
मजदूरों का दर्द: “लंच होने ही वाला था कि सब खत्म हो गया”
फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकांश मजदूर बिहार के अररिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
घायल मजदूर विपिन कुमार ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे अपनी मशीन पर काम कर रहे थे, तभी करीब 20 मीटर की दूरी पर एक जोरदार धमाका हुआ।

विपिन के अनुसार, हादसे से महज 15-20 मिनट बाद लंच होने वाला था।
कई मजदूरों का खाना भी आ चुका था, लेकिन निवाला मुंह तक पहुँचने से पहले ही मौत ने दस्तक दे दी।
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद करीब पौन घंटे तक एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
अगर समय पर मदद मिल जाती, तो शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं।

प्रशासन की लापरवाही और ग्रामीणों का आक्रोश
हादसे की खबर मिलते ही जब संभागायुक्त (कमिश्नर) आशीष सिंह, डीआईजी और कलेक्टर मौके पर पहुंचे, तो उन्हें भारी जनआक्रोश का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने कमिश्नर की गाड़ी को घेर लिया और जमकर नारेबाजी की।
लोगों का सीधा आरोप है कि यह फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी या फिर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाई जा रही थी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

फैक्ट्री की सुरक्षा पर बड़े सवाल
जांच में यह बात सामने आई है कि फैक्ट्री करीब 4 से 5 बीघा जमीन पर फैली हुई थी और इसका निर्माण मात्र 6-8 महीने पहले ही हुआ था।
अभी भी वहां कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य चल रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, फैक्ट्री में रोजाना 400 से 500 लोग काम करते थे, जिनमें 200 से अधिक महिलाएं थीं।
फिलहाल तीन महिलाएं लापता बताई जा रही हैं, जिनकी तलाश मलबे में की जा रही है।

फैक्ट्री में भारी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखे रखे हुए थे, जिसके कारण आग बुझाने में दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अभी क्या है हालात
फिलहाल, प्रशासन की टीम पूरे इलाके को सैनिटाइज करने में जुटी है ताकि मलबे में दबे अन्य विस्फोटकों से दोबारा खतरा न हो।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी घटना पर नजर रखी जा रही है।
यह हादसा एक बार फिर अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और उनमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या प्रशासन की नींद अब खुलेगी या फिर अगले किसी बड़े धमाके का इंतजार किया जाएगा?
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