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मातम में बदली खुशियां: शादी की हल्दी से दुल्हन की मौत, दूल्हा समेत 4 लोग अस्पताल में भर्ती

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bride Died Fake Turmeric: कहते हैं शादियों का सीजन खुशियाँ लेकर आता है, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने रूह कंपा दी है।

एक छोटी सी लापरवाही और चंद पैसों के लालच में की गई मिलावट ने एक 22 साल की लड़की के सपनों को हमेशा के लिए दफन कर दिया।

जिस घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां अब चीख-पुकार मची है।

मामला ‘मिलावटी हल्दी’ से जुड़ा है, जिसने दुल्हन की जान ले ली और दूल्हे समेत चार अन्य लोगों को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरी घटना?

खरगोन जिले के टेकड़ी गांव की रहने वाली 22 वर्षीय राखी की शादी बड़े धूमधाम से ग्राम खामखेड़ा के एक युवक से तय हुई थी।

26 अप्रैल 2026 को बारात आनी थी। पूरा परिवार तैयारियों में जुटा था।

22 अप्रैल को घर में ‘हल्दी की रस्म’ का आयोजन किया गया।

जैसा कि हमारी संस्कृति में रिवाज है, दुल्हन को उबटन और हल्दी लगाई गई।

बाजार से खरीदी गई यह खुली हल्दी देखने में बहुत चमकदार और पीली थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह हल्दी नहीं, बल्कि ‘जहर’ है।

हल्दी लगाने के कुछ ही घंटों बाद राखी को बेचैनी होने लगी। धीरे-धीरे उसके गले में तेज जलन होने लगी और उसे सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई।

देखते ही देखते राखी के चेहरे, आंखों और होंठों पर भारी सूजन आ गई।

शरीर पर लाल रंग के बड़े-बड़े चकत्ते (Rashes) उभर आए।

परिवार वाले आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले गए, जहाँ उसकी बिगड़ती हालत को देख उसे तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती किया गया।

अस्पताल का संघर्ष और दुखद अंत

राखी की हालत में सुधार नहीं हो रहा था। डॉक्टरों ने उसे इंदौर के एमवाई (MY) अस्पताल रेफर कर दिया।

वहां जांच में पता चला कि हल्दी के केमिकल ने उसके आंतरिक अंगों पर बुरा असर डाला है।

गले की सूजन इतनी बढ़ गई थी कि वह सांस नहीं ले पा रही थी।

आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद परिवार उसे निजी अस्पताल भी ले गया, लेकिन वहां का खर्च उठाना मुश्किल था।

मजबूरन परिवार उसे वापस इंदौर ला रहा था, लेकिन रास्ते में ही राखी ने दम तोड़ दिया।

जिस दिन राखी के हाथों में मेहंदी रचनी थी और मंडप सजने वाला था, उसी दिन गांव के श्मशान में उसकी चिता सजी।

सिर्फ राखी ही नहीं, चार और लोग मौत से लड़ रहे हैं

यह मामला सिर्फ एक मौत तक सीमित नहीं है।

इंदौर के एमवाई अस्पताल में इस वक्त चार और ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिन्हें हल्दी की रस्म के बाद गंभीर एलर्जी हुई है।

इनमें से एक मरीज की हालत इतनी नाजुक है कि उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि इन सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण दिखे हैं—जैसे चेहरे का फूलना, सांस फूलना और शरीर में भारी कमजोरी।

आखिर हल्दी में क्या था? ‘मेटानिल यलो’ का जानलेवा सच

स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में जो बात सामने आई है, वह डराने वाली है।

मिलावटखोर हल्दी को गहरा पीला और चमकदार दिखाने के लिए मेटानिल यलो” (Metanil Yellow) नाम की एक औद्योगिक डाई का इस्तेमाल करते हैं।

विशेषज्ञों की राय: मेटानिल यलो का उपयोग असल में कपड़ा उद्योग (Textile Industry) में कपड़ों को रंगने के लिए किया जाता है।

जब यह सिंथेटिक डाई त्वचा के संपर्क में आती है, तो यह खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाती है।

इससे ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ पैदा होता है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) अचानक गिर जाती है।

यह फेफड़ों को जाम कर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘एआरडीएस’ (ARDS) कहा जाता है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई

खरगोन के सीएमएचओ (CMHO) डॉ. डीएस चौहान ने बताया कि पीड़ित परिवार के घर से हल्दी के सैंपल ले लिए गए हैं।

खाद्य विभाग (Food Department) इन सैंपलों की लैब में जांच कर रहा है।

प्रशासन अब उन थोक व्यापारियों की तलाश कर रहा है जिन्होंने यह जहरीली हल्दी बाजार में सप्लाई की थी।

डॉक्टरों की पर्ची पर स्पष्ट रूप से ‘हल्दी रिएक्शन’ का उल्लेख किया गया है, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि मौत का कारण मिलावट ही है।

डॉक्टरों की चेतावनी: सावधानी ही बचाव है

इंदौर के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र झंवर के अनुसार, हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, लेकिन आज के दौर में मिलावटखोर इसे ‘धीमा जहर’ बना रहे हैं।

उन्होंने सलाह दी है कि:

1. खुली हल्दी से बचें: शादियों जैसे आयोजनों के लिए कभी भी बाजार से खुली हल्दी न खरीदें।

2. पैकेट बंद और ब्रांडेड: हमेशा आईएसआई (ISI) या एगमार्क (Agmark) प्रमाणित हल्दी का ही उपयोग करें।

3. खुद पिसवाएं: सबसे सुरक्षित तरीका है कि खड़ी हल्दी की गांठें खरीदें और उसे अपनी आंखों के सामने चक्की पर पिसवाएं।

4. तुरंत धो लें: अगर हल्दी लगाने के बाद हल्की सी भी खुजली या जलन महसूस हो, तो उसे तुरंत ठंडे पानी और साबुन से धो लें और डॉक्टर से संपर्क करें।

आप घर पर कैसे करें असली और नकली हल्दी की पहचान?

मिलावटी हल्दी की पहचान करना बहुत आसान है।

आप नीचे दिए गए स्टेप्स अपना सकते हैं:

  • पानी का टेस्ट: एक गिलास साफ पानी लें और उसमें एक चम्मच हल्दी डालें। उसे हिलाएं नहीं।
  • असली हल्दी: पानी की तली में धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगी और पानी का रंग हल्का पीला ही रहेगा।
  • नकली हल्दी: जैसे ही पानी में जाएगी, पानी का रंग गहरा/चटक पीला या नारंगी हो जाएगा और वह पानी में घुली रहेगी।
  • हथेली का टेस्ट: थोड़ी सी हल्दी हथेली पर रगड़ें। अगर यह बहुत ज्यादा रंग छोड़ती है और आसानी से साफ नहीं होती, तो इसमें केमिकल रंग हो सकता है।

खरगोन की यह घटना एक चेतावनी है।

चंद पैसों के मुनाफे के लिए मिलावटखोर किसी की जान से खेलने में संकोच नहीं कर रहे हैं।

जागरूक नागरिक होने के नाते, हमें न केवल अपनी खरीददारी के प्रति सतर्क रहना चाहिए, बल्कि मिलावट की सूचना तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।

राखी तो अब इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसकी मौत से सबक लेकर हम भविष्य में ऐसी किसी और अनहोनी को रोक सकते हैं।

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