MP Diwali travel Rush: दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, घर लौटने वालों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है।
हर कोई अपने परिवार के साथ इस खास मौके को मनाना चाहता है।
जो लोग पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहते हैं, उनके लिए यह समय साल का सबसे बड़ा मौका होता है घर जाने का।
लेकिन इस बार घर वापसी की राह आसान नहीं है। ट्रेनों में महीनों पहले से लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है और तत्काल टिकट मिलना किसी लॉटरी से कम नहीं है।
ऐसे में मजबूरी में लोगों को बसों का रुख करना पड़ रहा है, जिसका फायदा उठाकर प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने लूट मचा रखी है।

आलम यह है कि कई रूटों पर बस का किराया हवाई जहाज के टिकट को भी पीछे छोड़ चुका है।
हवाई जहाज सस्ता, बस का सफर भारी
अगर आप सोच रहे हैं कि बस का सफर हमेशा फ्लाइट से सस्ता होता है, तो ऑनलाइन बुकिंग ऐप्स के मौजूदा आंकड़े आपको हैरान कर देंगे।
मध्य प्रदेश से लंबी दूरी का सफर तय करने वाली प्राइवेट स्लीपर बसों का किराया आसमान छू रहा है।
भोपाल से अलग-अलग शहरों में जाने वाली बसों के किराए में आम दिनों की तुलना में 25 प्रतिशत से लेकर कई गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
त्योहारी सीजन के कारण यात्रियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है और ऑपरेटर इसी मजबूरी को भुना रहे हैं।

भोपाल से रीवा की बात करें, तो इस रूट पर फ्लाइट का टिकट लगभग 3,700 रुपये में उपलब्ध है।
लेकिन अगर आप प्राइवेट स्लीपर बस से जाना चाहें, तो आपको 5,000 रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं।
इसी तरह भोपाल से अहमदाबाद जाने के लिए फ्लाइट का टिकट 5,500 से 6,500 रुपये के आसपास है, जबकि बीआर ट्रैवल्स जैसी लग्जरी बसों का किराया 7,000 रुपये तक पहुंच गया है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा भोपाल से ग्वालियर रूट का है, जहां जय भवानी ट्रैवल्स की बस का एक टिकट 10,000 रुपये तक में बिकता हुआ दिखाई दे रहा है।

क्यों और कैसे बढ़ रहे हैं इतने दाम?
अचानक किराए में इस भारी उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘फ्लेक्सी फेयर सिस्टम’ (डायनामिक प्राइसिंग) है।
यह वही सिस्टम है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर एयरलाइंस कंपनियां करती हैं।
इसका सीधा सा गणित यह है कि जैसे-जैसे बसों में सीटें भरती जाती हैं और यात्रियों की मांग बढ़ती है, बचे हुए टिकटों के दाम अपने आप सॉफ्टवेयर के जरिए बढ़ा दिए जाते हैं।
मध्य प्रदेश प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का इस पूरे मामले पर अपना अलग ही तर्क है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जय कुमार जैन के मुताबिक, जो बसें ‘स्टेट कैरिज’ के तहत चलती हैं, वे सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के आधार पर ही किराया ले रही हैं।
असली खेल ‘ऑल इंडिया परमिट’ वाली टूरिस्ट बसों में हो रहा है। इन बसों के ऑपरेटर अपने ट्रिप और मांग के हिसाब से मनमाना किराया तय करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

इसके अलावा, जब यात्री किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे रेडबस या मेकमायट्रिप) से टिकट बुक करते हैं, तो वे कंपनियां भी अपना सर्विस चार्ज और टैक्स जोड़ देती हैं, जिससे फाइनल टिकट का दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाता है।
छतरपुर और इंदौर में भी यही हाल
यह समस्या केवल राजधानी भोपाल तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के अन्य छोटे-बड़े शहरों में भी यात्रियों का यही हाल है।
छतरपुर से दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सामान्य दिनों में जिस बस का स्लीपर किराया लगभग 1,050 रुपये रहता है, वह 7 नवंबर के लिए ऑनलाइन 3,109 रुपये से लेकर 3,599 रुपये तक दिखा रहा है।
वहीं, दिल्ली से छतरपुर वापसी का किराया तो 4,089 रुपये को भी पार कर गया है।
सीधे शब्दों में कहें तो त्योहार के नाम पर आम जनता से तीन से चार गुना ज्यादा पैसा वसूला जा रहा है।
इंदौर का हाल भी कुछ अलग नहीं है। आर्थिक राजधानी होने के नाते यहां से देश भर में लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
दिवाली से ठीक पहले 5 से 7 नवंबर के बीच मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे आईटी हब और महानगरों से इंदौर लौटने वालों की भारी भीड़ होने वाली है।
इन शहरों से इंदौर आने वाली बसों के किराए में भी जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है, जिससे नौकरीपेशा वर्ग का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।
परिवहन विभाग की चेतावनी
किराए में इस बेतहाशा बढ़ोतरी पर परिवहन विभाग का कहना है कि सरकार की तरफ से बस किराए में किसी भी तरह की कोई वृद्धि नहीं की गई है।
आरटीओ प्रभारी मधु सिंह ने बताया कि सभी बस संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बसों के अंदर सरकार द्वारा प्रमाणित आधिकारिक किराया सूची चस्पा करें।
विभाग का कहना है कि अगर कोई भी बस ऑपरेटर तय सीमा से ज्यादा किराया वसूलता हुआ पाया जाता है और इसकी पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों से कोसों दूर नजर आती है।
त्योहारी सीजन में जब घर जाना मजबूरी बन जाता है, तब यात्री शिकायत करने के बजाय किसी तरह टिकट बुक करके घर पहुंचने को प्राथमिकता देते हैं और इसी का सीधा फायदा मुनाफाखोर उठा रहे हैं।
ट्रेन में जगह न होने और फ्लाइट के सीमित विकल्पों के बीच, आम आदमी बस ऑपरेटरों की इस मनमानी का शिकार होने को मजबूर है।
#DiwaliTravel #MPNews #BusFareHike #Bhopal #Indore #TravelRush #FestiveSeason
