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भानु सप्तमी, अहोई अष्टमी और रवि पुष्य योग एक साथ: रविवार को बन रहा धन-सौभाग्य का दुर्लभ योग, जानिए किन कामों से चमकेगी किस्मत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ahoi Ashtami Bhanu Saptami: 1 नवंबर 2026 का दिन कोई आम रविवार नहीं है।

अगर आप पंचांग और ज्योतिष में थोड़ा भी विश्वास रखते हैं, तो बता दें कि इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों का एक ऐसा शानदार मेल बन रहा है, जो आपकी किस्मत के दरवाजे खोल सकता है।

दरअसल, इस दिन कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। दोपहर करीब 2:55 बजे तक सप्तमी रहेगी और उसके ठीक बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस एक ही दिन भानु सप्तमी, अहोई अष्टमी और ‘रवि पुष्य योग’ का त्रिवेणी संगम हो रहा है।

आम बोलचाल में कहें तो यह रविवार पूजा-पाठ, खरीदारी, नए काम की शुरुआत और निवेश के लिए सोने पे सुहागा है।

आइए जानते हैं कि इस दिन आपको क्या-क्या शुभ काम करने चाहिए।

रवि पुष्य योग: खरीदारी और नई शुरुआत का शानदार मौका

उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषी पंडित मनीष शर्मा बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में ‘पुष्य नक्षत्र’ को सभी 27 नक्षत्रों का राजा कहा जाता है।

जब यह शुभ नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘रवि पुष्य योग’ कहा जाता है।

यह योग अपने आप में धन, संपत्ति, बरकत और जीवन में स्थिरता (Stability) लाने वाला माना जाता है।

अगर आप काफी समय से सोना-चांदी या कोई गहना खरीदने का मन बना रहे हैं, कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं, या फिर नई गाड़ी और जमीन-जायदाद में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो 1 नवंबर का दिन आपके लिए एकदम परफेक्ट है।

मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए काम या की गई खरीदारी लंबे समय तक फायदा देती है। इस दिन घर में सुख-शांति के लिए माता लक्ष्मी की पूजा भी बेहद शुभ मानी जाती है।

भानु सप्तमी: ऐसे चमकाएं अपना आत्मविश्वास और सेहत

रविवार का दिन यूं भी सूर्य देव (सूरज भगवान) को समर्पित होता है।

1 नवंबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने की वजह से ‘भानु सप्तमी’ का खास योग बन रहा है।

धर्म-कर्म की मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की दिल से आराधना करने से इंसान को निरोगी काया, गजब का आत्मविश्वास (Confidence), और समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है।

क्या करें?

इस दिन सुबह बिस्तर जल्दी छोड़ दें और नहा-धोकर साफ कपड़े पहन लें।

इसके बाद तांबे के लोटे में साफ जल लें, उसमें थोड़ा सा लाल कुमकुम (रोली), साबुत चावल (अक्षत) और लाल रंग के फूल डालें।

अब उगते हुए सूरज की तरफ मुंह करके उन्हें अर्घ्य दें यानी जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का मन ही मन जाप करें।

अगर आपके पास थोड़ा ज्यादा समय हो, तो ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ जरूर करें। यह पाठ आपके अंदर एक नई ऊर्जा और पॉजिटिविटी भर देगा।

अहोई अष्टमी: बच्चों की सलामती और लंबे जीवन का व्रत

दोपहर 2:55 के बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो कि शाम के समय (प्रदोष काल) रहेगी। इसी वजह से अहोई अष्टमी का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।

उत्तर भारत में यह त्योहार माताओं के लिए बहुत अहमियत रखता है।

इस दिन माताएं अपने बच्चों की अच्छी सेहत, लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उनके सुनहरे भविष्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

पूजा का तरीका:

सुबह उठकर स्नान करने के बाद माताएं व्रत करने का संकल्प लेती हैं।

पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखने के बाद शाम को जब सूरज ढलने लगता है, तब अहोई माता की पूजा की जाती है।

घर के मंदिर या साफ दीवार पर अहोई माता और उनके बच्चों का पारंपरिक चित्र बनाया जाता है। आप चाहें तो बाजार से लाया गया कैलेंडर भी लगा सकते हैं।

इसके बाद रोली, चावल, फूल, और दीपक जलाकर पूरी श्रद्धा से पूजा होती है। इस दौरान परिवार की सभी महिलाएं साथ मिलकर अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ती या सुनती हैं।

रात को जब आसमान में तारे निकल आते हैं, तो उन तारों को अर्घ्य देकर बच्चों की मंगलकामना की जाती है।

हालांकि, कुछ इलाकों में तारों की बजाय चांद निकलने के बाद चंद्रमा के दर्शन करके ही व्रत खोलने का पुराना रिवाज है।

पुष्य नक्षत्र में दान-पुण्य करने का है बड़ा महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ दिन दान (Charity) करने की बड़ी महिमा बताई गई है।

रवि पुष्य योग जैसे महासंयोग के दिन अगर आप अपनी कमाई का एक छोटा सा हिस्सा भी जरूरतमंदों की मदद में लगाते हैं, तो उसका बहुत बड़ा पुण्य मिलता है।

इस दिन आप अपनी सुविधानुसार भूखे लोगों को खाना खिला सकते हैं या गौशाला में जाकर गायों की सेवा कर सकते हैं।

इसके अलावा गरीब बच्चों को पढ़ाई-लिखाई का सामान जैसे कॉपी, किताबें या पेन बांटना भी बहुत शुभ रहता है।

अगर आप चाहें तो अपनी क्षमता के अनुसार पीले फल, अनाज, गुड़, तांबे के बर्तन या कपड़ों का दान भी कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, 1 नवंबर 2026 का यह रविवार आपके जीवन में नई रोशनी और खुशियां लाने का बेहतरीन मौका है।

चाहे आप मां के रूप में अपने बच्चों के लिए व्रत रखें, एक कारोबारी के रूप में नई शुरुआत करें, या एक आम इंसान की तरह सूर्य देव को जल चढ़ाकर अच्छी सेहत की कामना करें—यह दिन हर किसी के लिए बहुत खास है।

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