Goverdhan Ghee Seized Indore: इंदौर (मध्य प्रदेश) में मिलावटी खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध और दुग्ध उत्पादों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन (Food Safety Administration) ने इंदौर में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए नामी ‘गोवर्धन’ ब्रांड के करीब 25 हजार लीटर घी की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
बाजार में रोके गए इस घी के स्टॉक की अनुमानित कीमत लगभग 1.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
खाद्य विभाग और FSSAI की संयुक्त टीम ने मौके से अलग-अलग पैकिंग साइज के 20 नमूने (सैंपल) एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला (लैब) भेज दिए हैं।

विशेष अभियान के तहत हुई कार्रवाई
मध्य प्रदेश में जुलाई 2026 से दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष राज्यव्यापी अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और बाहर के राज्यों से आने वाले दुग्ध उत्पादों की कड़ाई से निगरानी करना है।
इसी कड़ी में मिली गुप्त सूचना और नियमित निरीक्षण के आधार पर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

कंपनी डिपो पर टीम ने मारा छापा
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश और मार्गदर्शन में 6 अगस्त को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम एबी रोड पर स्थित ‘विक्टर हाउस-1, गोल्डन पैलेस कॉलोनी’ पहुंची।
अधिकारियों ने यहां संचालित ‘पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड’ के कंपनी डिपो का गहन निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि डिपो में महाराष्ट्र के पुणे स्थित पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘गोवर्धन’ ब्रांड घी का भारी मात्रा में भंडारण किया गया था और यहीं से इसकी बिक्री की जा रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, यह डिपो पूरे मध्य प्रदेश में गोवर्धन ब्रांड के घी की आपूर्ति (सप्लाई) का मुख्य केंद्र है।

FSSAI की केंद्रीय टीम भी जांच में शामिल
जांच के दौरान जब अधिकारियों को पता चला कि यह प्रतिष्ठान ‘सेंट्रल लाइसेंस’ के अंतर्गत आता है, तो इसकी सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों और FSSAI के पश्चिमी क्षेत्र के इंदौर शाखा कार्यालय को दी गई।
इसके तुरंत बाद FSSAI की केंद्रीय टीम भी मौके पर पहुंच गई।
दोनों टीमों ने मिलकर डिपो के पूरे स्टॉक का मुआयना किया और विभिन्न पैकिंग आकारों के कुल 20 सैंपल सील किए।
सुरक्षा के लिहाज से और जब तक लैब से रिपोर्ट नहीं आ जाती, अधिकारियों ने 25 हजार लीटर घी के पूरे स्टॉक की बिक्री पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी।

शिकायत पर महू में भी छापेमारी
खाद्य सुरक्षा विभाग केवल बड़े डिपो तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता से मिलने वाली शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई कर रहा है।
एक अन्य शिकायत के सिलसिले में विभाग की टीम ने शिकायतकर्ता से फोन पर बात कर जानकारी की पुष्टि की।
इसके बाद महू स्थित चिन्हित दुकानों और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई।
यहां से बेसन, पारंपरिक मिठाइयां, शक्कर और नमकीन के कुल 6 नमूने जांच के लिए उठाए गए।

त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई से शिकायतकर्ता ने भी संतोष व्यक्त किया।
रिपोर्ट आने के बाद होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभियान के तहत एकत्र किए गए सभी 26 नमूनों (20 घी के और 6 महू से लिए गए) को राज्य की प्रमाणित खाद्य प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006’ (FSSAI Act, 2006) और इसके अंतर्गत बने कड़े नियमों के तहत नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की मिलावट या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित कंपनी और डिपो संचालकों के खिलाफ सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।

मध्य प्रदेश सरकार के इस कड़े रुख से मिलावटखोरों और घटिया सामग्री बेचने वालों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन का कहना है कि आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
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