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जबलपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: चेकिंग में चाबी छीनना और अभद्रता गलत, पुलिस और वकील दोनों को मिली नसीहत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Vehicle Checking Rules: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा वाहन चालकों की चाबी छीनने और अभद्र व्यवहार करने की आदतों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

एक वकील और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि चेकिंग अभियान के नाम पर किसी गाड़ी चालक से चाबी छीनना, गाली-गलौज करना या बेवजह की बहस करना बिल्कुल भी सही नहीं है।

इसके साथ ही अदालत ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) को इस मामले में शिकायत की जांच कर कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 11 जुलाई 2026 का है, जब जबलपुर में ट्रैफिक पुलिस का चेकिंग अभियान चल रहा था।

इसी दौरान एक अधिवक्ता को पुलिसकर्मियों ने वाहन चेकिंग के लिए रोका।

पीड़ित वकील का आरोप है कि चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बेहद बदसूकी से बात की, गाली-गलौज की और नौबत मारपीट तक आ पहुंची।

यही नहीं, उन्हें कानूनी धमकी भी दी गई।

घटना से नाराज होकर वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने जबलपुर एसपी सम्पत उपाध्याय से मुलाकात कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

हालांकि, समय पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण पीड़ित वकील को अपनी न्याय की गुहार लेकर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।

हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने दी सफाई

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए बताया गया कि संबंधित अधिवक्ता एक ही मोटरसाइकिल पर दो अन्य लोगों को बैठाकर ले जा रहे थे।

यानी एक ही बाइक पर तीन लोग सवार थे और किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।

सरकार का कहना था कि यह पूरी तरह से मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) का उल्लंघन है।

जब पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियमों के तहत चालान काटने लगे, तभी विवाद शुरू हुआ।

इसके अलावा, कोर्ट को यह भी सूचित किया गया कि 13 जुलाई को दी गई शिकायत जबलपुर एसपी के पास पेंडिंग है और उस पर प्राथमिक जांच जारी है।

जस्टिस हिमांशु जोशी की दोनों पक्षों को नसीहत

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने पुलिस और वकील दोनों को कानून के दायरे में रहने की बात कही।

* वकीलों के लिए: कोर्ट ने कहा कि बार (अधिवक्ताओं) के सदस्यों से यह उम्मीद की जाती है कि वे देश के कानून और व्यवस्था का सबसे ज्यादा सम्मान करें। जो लोग कानून की रक्षा का जिम्मा उठाते हैं, उन्हें खुद भी नियमों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।

* पुलिस प्रशासन के लिए: अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस अफसरों की जिम्मेदारी है कि वे कानून लागू करवाते वक्त धैर्य, शालीनता और संयम से काम लें। वाहन चेकिंग के दौरान बिना बात कहासुनी करना, अभद्र भाषा बोलना या गाड़ी से चाबी निकाल लेना जैसी शिकायतें अक्सर आती हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट का अंतिम निर्देश

हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता की मुख्य समस्या उसकी शिकायत पर समय से कार्रवाई न होना है।

चूंकि मामला पहले से ही सक्षम पुलिस अधिकारी (जबलपुर एसपी) के पास जांच के अधीन है, इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि एसपी इस पूरे प्रकरण में बिना किसी देरी के निष्पक्ष और कानूनी कार्रवाई पूरी करें।

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