India Citizenship Rules Revised: केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता से जुड़े नियमों में एक बहुत बड़ा और अहम बदलाव किया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की तरफ से जारी एक नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अपने पुराने देश का पासपोर्ट सरेंडर (जमा) करना होगा।
गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जैसे ही किसी आवेदक की भारतीय नागरिकता मंजूर होगी, उसके ठीक 15 दिनों के भीतर उसे अपने मूल देश (पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान) का पासपोर्ट जमा करना अनिवार्य होगा।
आइए समझते हैं कि सरकार ने यह कदम क्यों उठाया है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा।
क्या है नागरिकता का नया नियम?
गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 18 के तहत ‘नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026’ लागू किया है।
इसके तहत साल 2009 के पुराने नागरिकता नियमों में एक नया पैराग्राफ जोड़ा गया है।
अब जो भी व्यक्ति इन तीनों देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान) से भारत आया है और यहाँ की नागरिकता चाहता है, उसे एक हलफनामा (शपथ पत्र) देना होगा।
इस हलफनामे में उसे दो टूक जवाब देना होगा:
1. क्या उसके पास अपने पुराने देश का कोई वैध (Valid) या एक्सपायर (अमान्य) हो चुका पासपोर्ट है?
2. यदि उसके पास पासपोर्ट है, तो उसे उसकी पूरी डिटेल सरकार को देनी होगी। इसमें पासपोर्ट का नंबर, वो कब जारी हुआ था, कहाँ से जारी हुआ था और उसकी एक्सपायरी डेट क्या है, ये सब बताना जरूरी होगा।
15 दिन के अंदर करना होगा सरेंडर
नए नियम के मुताबिक, जैसे ही केंद्र सरकार किसी आवेदक को भारत का नागरिक स्वीकार करेगी, उस व्यक्ति को 15 दिनों के अंदर अपना विदेशी पासपोर्ट सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट या सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट (डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों) को सौंपना होगा।
इसके लिए आवेदक को लिखित में अपनी सहमति भी देनी होगी।
यह नियम आधिकारिक राजपत्र (Gazette) में छपते ही तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
सरकार ने क्यों लिया यह कड़ा फैसला?
भारतीय कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) रखने की इजाजत नहीं है।
यानी कोई भी व्यक्ति एक ही समय में भारत और किसी दूसरे देश का नागरिक नहीं रह सकता।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे जहाँ भारतीय नागरिकता मिलने के बाद भी कुछ लोग अपने पुराने देशों के पासपोर्ट या दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे थे।
सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद खतरनाक हो सकता है।
इसी फर्जीवाड़े और गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने यह ‘प्रशासनिक स्पष्टीकरण’ जारी किया है।
इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और सरकार के पास हर नागरिक का सटीक रिकॉर्ड रहेगा।
किसे देना होगा यह ब्यौरा?
यह नियम मुख्य रूप से उन धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) पर लागू होगा जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए हैं और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारत की नागरिकता मांग रहे हैं।
अब इन सभी आवेदकों को अपनी पहचान और यात्रा के इतिहास (Travel History) से जुड़े हर एक दस्तावेज का सही-सही ब्यौरा देना होगा।
महत्वपूर्ण बात: इससे पहले नागरिकता नियम 2009 में आखिरी बार 11 मार्च 2024 को बदलाव किया गया था, जब CAA के नियमों को देश में अधिसूचित किया गया था।
अब 2026 में हुए इस नए संशोधन से सुरक्षा और सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया को और ज्यादा मजबूत कर दिया गया है।
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