Mamata Banerjee TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
पहले विधायकों की बगावत और अब सांसदों का पार्टी से मोहभंग होना, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बहुत बड़े संकट का इशारा कर रहा है।
ताजा अपडेट यह है कि टीएमसी के 20 सांसद भी अब ममता बनर्जी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने की तैयारी में हैं।

केंद्रीय मंत्री के घर हुई सीक्रेट मीटिंग
सोमवार की दोपहर दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल उस वक्त बढ़ गई, जब टीएमसी के 20 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की।
इस बैठक की खास बात यह थी कि इसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल होने पहुंचे।
हालांकि, इन 20 सांसदों में से लोकसभा और राज्यसभा के कितने-कितने सांसद हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

इस बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे बड़े चेहरे मौजूद थे।
बाकी के 11 सांसदों के नामों का खुलासा होना अभी बाकी है। आपको बता दें कि इस समय लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।
अगर ये 20 सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो यह ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा।

सुखेंदु शेखर रे का इस्तीफा और ममता पर गंभीर आरोप
इस सियासी ड्रामे के बीच, टीएमसी के बेहद वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने अपने पद और पार्टी, दोनों से इस्तीफा दे दिया है।
राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है।
इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर ने ममता बनर्जी की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पूरी तरह से मनमाने ढंग से पार्टी चला रही हैं, जहां किसी भी नेता को खुलकर काम करने की आजादी नहीं है।
उन्होंने अपने त्यागपत्र में साफ लिखा कि बंगाल की जनता ने इस बार भाजपा को जो भारी जनादेश दिया है, वह टीएमसी के 15 साल के भ्रष्ट और अराजक शासन को खत्म करने के लिए है।

सुखेंदु शेखर के इस्तीफे की 5 बड़ी बातें:
- नाकाम शासन: बंगाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह फेल रही है।
- जनता का मूड: इतिहास में पहली बार बंगाल के लोगों ने बीजेपी को इतना बड़ा जनादेश दिया है, जो टीएमसी के कुशासन के खिलाफ गुस्सा है।
- नेताओं की अनदेखी: पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो चुका है। फैसले लेते समय वरिष्ठ नेताओं की राय तक नहीं ली जाती।
- हार से कोई सबक नहीं: चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद भी ममता बनर्जी ने कोई आत्ममंथन नहीं किया और न ही हार के कारणों को जानने की कोशिश की।
- BJP की तारीफ: सुखेंदु ने नई बीजेपी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वे अपने वादों के मुताबिक बंगाल के पुनर्निर्माण और विकास के लिए सही कदम उठा रहे हैं।

बागी गुट ने किया समर्थन
सुखेंदु शेखर के इस कदम का टीएमसी के बागी विधायक और नए गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी समर्थन किया है।
ऋतब्रत ने कहा, “सुखेंदु जी की बातें काफी हद तक सच हैं। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है, वहां गंभीरता से काम होना चाहिए।”
याद दिला दें कि इससे पहले 3 जून को ही टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करके अपना एक अलग गुट बना लिया है, जिसका नेतृत्व ऋतब्रत कर रहे हैं।

काकोली घोष भी दे चुकी हैं इस्तीफा
सांसदों के इस असंतोष की शुरुआत कुछ दिन पहले ही हो गई थी।
27 मई को बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि उन्होंने सांसद पद अभी नहीं छोड़ा है।
काकोली का इस्तीफा उस बैठक के बाद आया था जो कल्याणी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई थी।
इस पूरी उठापटक पर भाजपा नेता सौमित्र खान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अगर बीजेपी आलाकमान चाहे, तो आने वाले कुछ ही दिनों में पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस का नामोनिशान पूरी तरह खत्म हो सकता है।

बंगाल की राजनीति किस करवट बैठेगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल ममता बनर्जी का किला ढहता हुआ नजर आ रहा है।
