LPG Price Hike May 2026: 1 मई 2026 से देश के आम और खास आदमी की जेब पर बड़ा असर पड़ने वाला है।
महीने के पहले ही दिन सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर (19 किलोग्राम) की कीमतों में एक ऐसी बढ़ोतरी की है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
दिल्ली से लेकर पटना और मुंबई से लेकर चेन्नई तक, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ₹993 से ₹994 तक का इजाफा किया गया है।
दिल्ली और अन्य शहरों में क्या हैं नए रेट?
देश की राजधानी दिल्ली में जो कमर्शियल सिलेंडर कल तक ₹2078.50 में मिल रहा था, उसकी कीमत आज से सीधे ₹3071.50 हो गई है।
यानी एक ही झटके में करीब ₹1000 का बोझ बढ़ गया है।
अन्य बड़े महानगरों की बात करें तो:
- कोलकाता: यहाँ सिलेंडर अब ₹2208 के बजाय ₹3202 में मिलेगा।
- मुंबई: आर्थिक राजधानी में कीमत ₹2031 से बढ़कर ₹3024 हो गई है।
- चेन्नई: यहाँ सबसे ज्यादा मार पड़ी है, जहाँ नया रेट ₹3237 तक पहुँच गया है।
- बिहार (पटना): पटना में अब एक सिलेंडर के लिए ₹3361 चुकाने होंगे।
- उत्तर प्रदेश: लखनऊ में ₹3194 और आगरा में ₹3125.5 के भाव से गैस मिलेगी।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
भले ही तेल कंपनियों ने 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए हैं और वह दिल्ली में ₹913 पर स्थिर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आम आदमी पर इसका असर नहीं होगा।
कमर्शियल गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से रेस्टोरेंट, ढाबों, चाय की दुकानों और कैटरिंग सर्विस में होता है।
जब हलवाई या रेस्टोरेंट मालिक को सिलेंडर ₹1000 महंगा मिलेगा, तो वह इसकी भरपाई आपकी थाली और नाश्ते के दाम बढ़ाकर ही करेगा।
आने वाले दिनों में बाहर खाना खाना, शादियों में कैटरिंग बुक करना और यहाँ तक कि सड़क किनारे मिलने वाली चाय और समोसे भी महंगे हो सकते हैं।
क्यों बढ़ी इतनी ज्यादा कीमतें? (अन्तर्राष्ट्रीय कारण)
इस भारी बढ़ोतरी के पीछे कोई स्थानीय कारण नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) है।
दरअसल, इस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।
इस तनाव की वजह से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का समुद्री रास्ता लगभग बाधित हो गया है।
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
रास्ता बंद होने के कारण सप्लाई चेन टूट गई है और भारत को अब दूसरे वैकल्पिक रास्तों या अन्य देशों से बहुत महंगे दामों पर गैस और तेल खरीदना पड़ रहा है।
जब तक खाड़ी देशों में शांति नहीं होती, तब तक इन कीमतों में कमी आने की संभावना कम है।
चुनाव और तेल कंपनियों का गणित
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि देश के 5 राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम आदि) में चुनाव की प्रक्रिया अभी-अभी खत्म हुई है।
अक्सर देखा गया है कि चुनावी माहौल के दौरान तेल कंपनियां दाम बढ़ाने से बचती हैं, ताकि सरकार को जनता के गुस्से का सामना न करना पड़े।
लेकिन जैसे ही वोटिंग की प्रक्रिया समाप्त हुई, कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया।
मई 2026 की शुरुआत महंगाई की तपिश के साथ हुई है।
जहाँ घरेलू गैस के स्थिर रहने से गृहणियों को थोड़ी राहत है, वहीं व्यापारिक क्षेत्र में मची इस खलबली का असर अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ने वाला है।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार आने वाले दिनों में टैक्स घटाकर जनता को कुछ राहत देती है या नहीं।
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